चरित्र पर सुभाषित

43 सुभाषित इस विषय पर

यह विषय 6 स्रोतों से आए 43 सुभाषितों को एक साथ लाता है।

नवीनतम अद्यतन: 6 अक्टू॰ 2026

6 अक्टू॰ 2026
समराङ्गणसूत्रधार

ज्ञानवांश्च तथा वाग्मी कर्मस्वपि च निष्ठितः। एवं युक्तोऽपि न श्रेयान् यदि शीलविवर्जितः॥

jñānavāṃśca tathā vāgmī karmasvapi ca niṣṭhitaḥ । evaṃ yukto'pi na śreyān yadi śīlavivarjitaḥ ॥

ज्ञान, वाक्पटुता और कर्मकुशलता होने पर भी सदाचार से रहित व्यक्ति श्रेष्ठ नहीं होता।

विद्यासामर्थ्यचरित्रनैतिकता
5 अक्टू॰ 2026
हितोपदेश

शुचित्वं त्यागिता शौर्यं सामान्यं सुखदुःखयोः। दाक्षिण्यं चानुरक्तिश्च सत्यता च सुहृद्गुणाः॥

śucitvaṃ tyāgitā śauryaṃ sāmānyaṃ sukhaduḥkhayoḥ । dākṣiṇyaṃ cānuraktiśca satyatā ca suhṛdguṇāḥ ॥

निर्मलता, त्याग, साहस, सुख-दुःख में समान भाव, शिष्टता, अनुराग और सत्यता सच्चे मित्र के गुण हैं।

चरित्रनैतिकतासाहस
2 अक्टू॰ 2026
भगवद् गीता

अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च। निर्ममो निरहङ्कारः समदुःखसुखः क्षमी॥

adveṣṭā sarvabhūtānāṃ maitraḥ karuṇa eva ca । nirmamo nirahaṅkāraḥ samaduḥkhasukhaḥ kṣamī ॥

भगवद् गीता द्वेष और अहंकार से मुक्त, सभी प्राणियों के प्रति मैत्री रखने वाले और सुख-दुःख में सम रहने वाले व्यक्ति के गुण बताती है।

चरित्रविनम्रतासामंजस्य
18 सित॰ 2026
आर्यासप्तशती

स्वाधीनैव समृद्धिर्जनोपजीव्यत्वमुच्छ्रयश्छाया। सत्पुंसो मरुभूरिव जीवनमात्रं समाशास्यम्॥

svādhīnaiva samṛddhir janopajīvyatvam ucchrayaś chāyā । satpuṃso marubhūr iva jīvanamātraṁ samāśāsyam ॥

मरुभूमि में खड़े वृक्ष की तरह सत्पुरुष के लिए स्वाधीन समृद्धि, दूसरों का आधार, ऊँचाई और छाया सहज हैं, इसलिए उसका जीवित रहना ही कामना के योग्य है।

चरित्रनिःस्वार्थ सेवास्वतंत्रतासमृद्धि
11 सित॰ 2026
गरुड पुराण

सद्भिरेव सहासीत सद्भिः कुर्वीत सङ्गतिम्। सद्भिर्विवादं मैत्रीं च नासद्भिः किञ्चिदाचरेत्॥

sadbhir eva sahāsīta sadbhiḥ kurvīta saṅgatim । sadbhir vivādaṃ maitrīṃ ca nāsadbhiḥ kiṃcid ācaret ॥

गरुड पुराण का यह श्लोक सज्जनों के साथ रहने, संवाद करने और मैत्री रखने की सीख देता है।

नैतिकताचरित्रसामंजस्य
31 अग॰ 2026
सौन्दरनन्द

यद् यदेव प्रसक्तं हि वितर्कयति मानवः। अभ्यासात् तेन तेनास्य नतिर्भवति चेतसः॥

yad yad eva prasaktaṃ hi vitarkayati mānavaḥ । abhyāsāt tena tenāsya natir bhavati cetasaḥ ॥

मनुष्य जिस विषय का बार-बार चिन्तन करता है, उसका चित्त उसी दिशा में झुकने लगता है।

अनुशासनचरित्र
27 अग॰ 2026
ऋग्वेद

तन्तुं तन्वन्रजसो भानुमन्विहि ज्योतिष्मतः पथो रक्ष धिया कृतान्। अनुल्बणं वयत जोगुवामपो मनुर्भव जनया दैव्यं जनम्॥

tantuṃ tanvan rajaso bhānum anv ihi jyotiṣmataḥ patho rakṣa dhiyā kṛtān । anulbaṇaṃ vayata joguvām apo manur bhava janayā daivyaṃ janam ॥

ऋग्वेद का यह मन्त्र बुद्धि से निर्मित ज्योतिर्मय मार्गों की रक्षा और सच्चा मनुष्य बनकर दैवी गुणों से युक्त जन के निर्माण का आह्वान करता है।

विद्याकर्तव्यचरित्रआध्यात्मिकता
18 अग॰ 2026
महाभारत

उद्यच्छेदेव न नमेदुद्यमो ह्येव पौरुषम्। अप्यपर्वणि भज्येत न नमेदिह कस्यचित्॥

udyacched eva na named udyamo hy eva pauruṣam । apy aparvaṇi bhajyeta na named iha kasyacit ॥

महाभारत का यह श्लोक उद्यम को ही पौरुष बताता है: मनुष्य निरंतर प्रयत्न करे और कभी न झुके, चाहे उसे झुकने के बजाय टूटना ही क्यों न पड़े।

दृढ़तासाहसचरित्र
11 अग॰ 2026
विदुर नीति

अष्टौ गुणाः पुरुषं दीपयन्ति प्रज्ञा सुशीलत्वदमौ श्रुतं च। पराक्रमश्च बहुभाषिता च दानं यथाशक्ति कृतज्ञता च॥

aṣṭau guṇāḥ puruṣaṁ dīpayanti prajñā suśīlatva-damau śrutaṁ ca । parākramaś ca bahubhāṣitā ca dānaṁ yathāśakti kṛtajñatā ca ॥

विदुर नीति का यह श्लोक प्रज्ञा, सदाचार, संयम, ज्ञान, पराक्रम, दान और कृतज्ञता के साथ स्थापित पाठ में मितभाषिता को मनुष्य का प्रकाशक गुण बताता है।

ज्ञानचरित्रअनुशासनविद्यासाहस
7 अग॰ 2026
रसिकजीवनम्

किं चन्द्रमाः प्रत्युपकारलिप्सया करोति गोभिः कुमुदावबोधनम्। स्वभाव एवोन्नतचेतसां सतां परोपकारव्यसनं हि जीवितम्॥

kiṃ candramāḥ pratyupakāralipsayā karoti gobhiḥ kumudāvabodhanam । svabhāva evonnatacetasāṃ satāṃ paropakāravyasanaṃ hi jīvitam ॥

चन्द्रमा बिना प्रत्युपकार की इच्छा के कुमुदिनी को जगाता है; वैसे ही सज्जनों के लिए परोपकार जीवन का स्वाभाविक भाव है।

निःस्वार्थ सेवाचरित्र
27 जुल॰ 2026
समराङ्गणसूत्रधार

शीलवान् पूजितो लोके शीलवान् साधुसम्मतः। शीलवान् सर्वकर्मार्हः शीलवान् प्रियदर्शनः॥

śīlavān pūjito loke śīlavān sādhusammataḥ । śīlavān sarvakarmārhaḥ śīlavān priyadarśanaḥ ॥

भोजदेव के समराङ्गणसूत्रधार का यह श्लोक बताता है कि शीलवान् व्यक्ति समाज में सम्मानित, सज्जनों द्वारा स्वीकृत, प्रत्येक कार्य के योग्य और सबको प्रिय होता है।

चरित्रनैतिकतासम्मान
7 जुल॰ 2026
नीतिशतकम्

भवन्ति नम्रास्तरवः फलोद्गमैर्नवाम्बुभिर्दूरविलम्बिनो घनाः। अनुद्धताः सत्पुरुषाः समृद्धिभिः स्वभाव एवैष परोपकारिणाम्॥

bhavanti namrāstaravaḥ phalodgamair navāmbubhir dūravilambino ghanāḥ । anuddhatāḥ satpuruṣāḥ samṛddhibhiḥ svabhāva evaiṣa paropakāriṇām ॥

नीतिशतकम् का यह श्लोक फलयुक्त वृक्षों और जलभरे मेघों के माध्यम से बताता है कि सज्जन समृद्धि में और विनम्र हो जाते हैं।

विनम्रतानिःस्वार्थ सेवाचरित्रप्रकृति
29 जून 2026
विदुर नीति

देशाचारान् समयाञ्जातिधर्मान् बुभूषते यस्तु परावरज्ञः। स तत्र तत्राधिगतः सदैव महाजनस्याधिपत्यं करोति॥

deśācārān samayāñ jātidharmān bubhūṣate yastu parāvarajñaḥ । sa tatra tatrādhigataḥ sadaiva mahājanasyādhipatyaṁ karoti ॥

विदुर नीति का यह श्लोक बताता है कि स्थानीय आचार, सामाजिक मर्यादाओं और समुदायों की समझ से विश्वास, सम्मान और प्रभाव प्राप्त होता है।

ज्ञानसंस्कृतिसम्मानचरित्र
23 जून 2026
कैवल्योपनिषद्

न कर्मणा न प्रजया धनेन त्यागेनैके अमृतत्वमानशुः। परेण नाकं निहितं गुहायां विभ्राजते यद् यतयो विशन्ति॥

na karmaṇā na prajayā dhanena tyāgenaike amṛtatvam ānaśuḥ । pareṇa nākaṃ nihitaṃ guhāyāṃ vibhrājate yad yatayo viśanti ॥

कैवल्योपनिषद् का यह मंत्र बताता है कि अमरत्व त्याग, निःस्वार्थ समर्पण और उच्च आदर्शों के प्रति निष्ठा से प्राप्त होता है।

निःस्वार्थ सेवाकर्तव्यचरित्रआध्यात्मिकता
17 जून 2026
कुमारसम्भवम्

त्वत्सम्भावितमात्मानं बहु मन्यामहे वयम्। प्रायः प्रत्ययमाधत्ते स्वगुणेषूत्तमादरः॥

tvatsambhāvitam ātmānaṃ bahu manyāmahe vayam । prāyaḥ pratyayam ādhatte svaguṇeṣūttamādaraḥ ॥

यह सुभाषित बताता है कि श्रेष्ठ व्यक्तियों से मिला आदर मनुष्य को अपने गुणों के प्रति दृढ़ आत्मविश्वास देता है।

सम्मानआत्मविश्वासवैयक्तिकताचरित्र
16 जून 2026
किरातार्जुनीयम्

सहसा विदधीत न क्रियामविवेकः परमापदां पदम्। वृणते हि विमृश्यकारिणं गुणलुब्धाः स्वयमेव सम्पदः॥

sahasā vidadhīta na kriyām avivekaḥ paramāpadāṃ padam । vṛṇate hi vimṛśyakāriṇaṃ guṇalubdhāḥ svayameva sampadaḥ ॥

भारवि के किरातार्जुनीयम् का यह श्लोक उतावलेपन से बचने और विवेकपूर्ण निर्णयों द्वारा सफलता व समृद्धि प्राप्त करने की शिक्षा देता है।

ज्ञानअनुशासनसफलताचरित्र
9 जून 2026
विदुर नीति

आर्यकर्मणि रज्यन्ते भूतिकर्माणि कुर्वते। हितं च नाभ्यसूयन्ति स वै पण्डित उच्यते॥

āryakarmaṇi rajyante bhūtikarmāṇi kurvate । hitaṃ ca nābhyasūyanti sa vai paṇḍita ucyate ॥

विदुर नीति का यह श्लोक बताता है कि सच्ची बुद्धिमत्ता श्रेष्ठ कर्मों में रुचि, लोककल्याण के प्रति समर्पण और हितकारी कार्यों के प्रति निष्कपट सम्मान में है।

ज्ञाननैतिकताचरित्रकर्तव्य
29 मई 2026
भगवद् गीता

तेजः क्षमा धृतिः शौचमद्रोहो नातिमानिता। भवन्ति सम्पदं दैवीमभिजातस्य भारत॥

tejaḥ kṣamā dhṛtiḥ śaucam adroho nātimānitā । bhavanti sampadaṃ daivīm abhijātasya bhārata ॥

भगवद् गीता का यह श्लोक तेजस्विता, क्षमा, धैर्य, शुचिता, अद्रोह और अहंकाररहित विनम्रता जैसे छह दैवी गुणों का वर्णन करता है।

चरित्रविनम्रतानैतिकतासाहस
28 मई 2026
सुभाषितावलि

अनन्तोद्भूतभूतौघसङ्कुले भूतलेऽखिले। शस्त्रे शास्त्रे त्रिचतुराश्चतुरा यदि मादृशाः॥

anantodbhūtabhūtaughasaṅkule bhūtale'khile । śastre śāstre tricaturāś caturā yadi mādṛśāḥ ॥

यह श्लोक उस विरले व्यक्तित्व की वंदना करता है जो शस्त्र (शौर्य) और शास्त्र (ज्ञान) दोनों में समान रूप से निपुण हो।

ज्ञानसाहसविद्याचरित्र
15 मई 2026
विदुर नीति

यथाशक्ति चिकीर्षन्ति यथाशक्ति च कुर्वते। न किञ्चिदवमन्यन्ते नराः पण्डितबुद्धयः॥

yathāśakti cikīrṣanti yathāśakti ca kurvate । na kiñcidavamanyante narāḥ paṇḍitabuddhayaḥ ॥

विदुर नीति का यह श्लोक बताता है कि सच्ची बुद्धिमत्ता वही है जो यथाशक्ति लक्ष्य निर्धारित करे, अनुशासित कर्म करे और किसी भी बात को तुच्छ न समझे।

ज्ञानसामर्थ्यअनुशासनचरित्र
6 मई 2026
महाभारत

अद्रोहः सर्वभूतेषु कर्मणा मनसा गिरा। अनुग्रहश्च दानं च शीलमेतत्प्रशस्यते॥

adrohaḥ sarvabhūteṣu karmaṇā manasā girā । anugrahaśca dānaṁ ca śīlametatpraśasyate ॥

सच्ची मानवता और नैतिक आचरण पर एक मार्गदर्शक सिद्धांत, जो सभी जीवों के प्रति दया, दान और द्वेषहीनता पर जोर देता है।

नैतिकताचरित्रधर्म
4 मई 2026
चाणक्य नीति

को हि भारः समर्थानां किं दूरं व्यवसायिनाम्। को विदेशः सुविद्यानां कः परः प्रियवादिनाम्॥

ko hi bhāraḥ samarthānāṁ kiṁ dūraṁ vyavasāyinām । ko videśaḥ suvidyānāṁ kaḥ paraḥ priyavādinām ॥

यह श्लोक बताता है कि कैसे कौशल, परिश्रम, शिक्षा और मधुर वाणी सफलता और अपनेपन की सभी बाधाओं को दूर कर देते हैं।

सामर्थ्यशिक्षादृढ़ताचरित्र
27 अप्रैल 2026
सुभाषितरत्नभाण्डागारम्

छायामन्यस्य कुर्वन्ति तिष्ठन्ति स्वयमातपे। फलान्यपि परार्थाय वृक्षाः सत्पुरुषा इव॥

chāyāmanyasya kurvanti tiṣṭhanti svayamātape । phalānyapi parārthāya vṛkṣāḥ satpuruṣā iva ॥

यह श्लोक वृक्षों की तुलना सज्जन पुरुषों से करता है, जो स्वयं कष्ट सहकर दूसरों का कल्याण करते हैं।

निःस्वार्थ सेवानैतिकताचरित्र
21 अप्रैल 2026
दर्पदलनम्

शीलं परहितासक्तिः अनुत्सेकः क्षमा धृतिः। अलोभश्चेति विद्यायाः परिपाकोज्ज्वलं फलम्॥

śīlaṁ parahitāsaktiḥ anutsekaḥ kṣamā dhṛtiḥ । alobhaśceti vidyāyāḥ paripākojjvalaṁ phalam ॥

विद्या की पूर्णता केवल ज्ञान संचय में नहीं, बल्कि शील, परोपकार और धैर्य जैसे गुणों के विकास में है। यह श्लोक विद्या के वास्तविक स्वरूप को परिभाषित करता है।

चरित्रविद्यानैतिकता
13 अप्रैल 2026
ऋग्वेद

इन्द्रं वर्धन्तो अप्तुरः कृण्वन्तो विश्वमार्यम्। अपघ्नन्तो अराव्णः॥

indraṁ vardhanto apturaḥ kṛṇvanto viśvamāryam । apaghnanto arāvṇaḥ ॥

ऋग्वेद का यह मंत्र समाज की कल्याणकारी शक्तियों को बढ़ाने और अन्यायपूर्ण शक्तियों का प्रतिरोध कर पूरे विश्व को श्रेष्ठ बनाने का एक ओजस्वी वैदिक आह्वान है।

धर्मसाहसचरित्रएकता
8 अप्रैल 2026
विदुर नीति

आत्मज्ञानं समारम्भस्तितिक्षा धर्मनित्यता। यमर्था नापकर्षन्ति स वै पण्डित उच्यते॥

ātmajñānaṁ samārambhas titikṣā dharmanityatā । yam arthā nāpakarṣanti sa vai paṇḍita ucyate ॥

विदुर नीति का यह श्लोक एक बुद्धिमान व्यक्ति के गुणों का वर्णन करता है: आत्मज्ञान, दृढ़ निश्चय, सहनशीलता और प्रलोभनों से ऊपर उठकर जनकल्याण के मार्ग पर अडिग रहना।

ज्ञानआत्मज्ञानचरित्रधर्मदृढ़ता
6 अप्रैल 2026
हितोपदेश

सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादात्तस्य धूर्जटेः। जाह्नवीफेनलेखेव यन्मूर्ध्नि शशिनः कला॥

siddhiḥ sādhye satām astu prasādāt tasya dhūrjaṭeḥ । jāhnavī-phena-lekheva yan-mūrdhni śaśinaḥ kalā ॥

जिन महादेव के मस्तक पर चन्द्रमा की कला गंगा के झाग के समान सुशोभित है, उनकी कृपा से सज्जनों के संकल्प सिद्ध हों।

भक्तिआध्यात्मिकतादृढ़ताचरित्र
3 अप्रैल 2026
विद्दशालभाञ्जिका

श्रियः प्रदुग्धे विपदो रुणद्धि यशांसि सूते मलिनं प्रमार्ष्टि। संस्कारशौचेन परं पुनीते शुद्धा हि बुद्धिः किल कामधेनुः॥

śriyaḥ pradugdhe vipado ruṇaddhi yaśāṃsi sūte malinaṃ pramārṣṭi । saṃskāraśauchena paraṃ punīte śuddhā hi buddhiḥ kila kāmadhenuḥ ॥

यह सुभाषित संस्कारित और शुद्ध बुद्धि की शक्ति का गुणगान करता है, और इसकी तुलना कामधेनु से करता है जो सभी इच्छाओं को पूर्ण करती है।

ज्ञानविद्याचरित्र
31 मार्च 2026
पञ्चतन्त्र

श्रूयतां धर्मसर्वस्वं श्रुत्वा चैवावधार्यताम्। आत्मनः प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत्॥

śrūyatāṃ dharmasarvasvaṃ śrutvā caivāvadhāryatām । ātmanaḥ pratikūlāni pareṣāṃ na samācaret ॥

यह सुभाषित धर्म के समस्त सार को एक सुवर्ण नियम में समेटता है — जो व्यवहार अपने लिए अनुचित लगे, वह दूसरों के साथ कभी न करें।

नैतिकताधर्मचरित्र
17 मार्च 2026
कामन्दकीय नीतिसार

एकोऽपि सिंहः साहस्रं यूथं मथ्नाति दन्तिनाम्। तस्मात् सिंहमिवोदारमात्मानं वीक्ष्य सम्पतेत्॥

eko'pi siṁhaḥ sāhasraṁ yūthaṁ mathnāti dantinām । tasmāt siṁham ivodāram ātmānaṁ vīkṣya sampatet ॥

जैसे एक अकेला सिंह हाथियों के झुंड पर भारी पड़ता है, वैसे ही साहस और संकल्प से मनुष्य कठिनतम चुनौतियों को पार कर सकता है।

साहसआत्मविश्वासचरित्रशक्ति
2 फ़र॰ 2026
सुभाषितावलि

नाम्भोधिरर्थितामेति सदाम्भोभिश्च पूर्यते। आत्मा तु पात्रतां नेयः पात्रमायान्ति सम्पदः॥

nāmbhodhir arthitām eti sadāmbhobhiśca pūryate । ātmā tu pātratāṁ neyaḥ pātramāyānti sampadaḥ ॥

यह श्लोक सिखाता है कि वास्तविक समृद्धि बाहरी याचना से नहीं, बल्कि आंतरिक योग्यता और पात्रता से प्राप्त होती है।

सामर्थ्यचरित्रसमृद्धि
27 जन॰ 2026
चाणक्य नीति

शान्तितुल्यं तपो नास्ति न सन्तोषात् परं सुखम्। न तृष्णायाः परो व्याधिर्न च धर्मो दयापरः॥

śāntitulyaṁ tapo nāsti na santoṣāt paraṁ sukham । na tṛṣṇāyāḥ paro vyādhir na ca dharmo dayāparaḥ ॥

शान्ति सर्वोच्च तप, सन्तोष सबसे बड़ा सुख, तृष्णा सबसे कठिन रोग और दया सबसे महान धर्म है।

शांतिधर्मकल्याणचरित्र
23 जन॰ 2026
दर्पदलनम्

एतदेव परं शौर्यं यत् परप्राणरक्षणम्। नहि प्राणहरः शूरः शूरः प्राणप्रदोऽर्थिनाम्॥

etadeva paraṁ śauryaṁ yat paraprāṇarakṣaṇam । nahi prāṇaharaḥ śūraḥ śūraḥ prāṇaprado'rthinām ॥

सच्ची वीरता प्राण लेने में नहीं, बल्कि प्राणों की रक्षा करने में है। यह श्लोक एक सच्चे वीर को संकट में पड़े लोगों को जीवन देने वाले के रूप में परिभाषित करता है।

साहसनैतिकताधर्मचरित्र
7 जन॰ 2026
चाणक्य नीति

गुणो भूषयते रूपं शीलं भूषयते कुलम्। सिद्धिर्भूषयते विद्यां भोगो भूषयते धनम्॥

guṇo bhūṣayate rūpaṁ śīlaṁ bhūṣayate kulam । siddhir bhūṣayate vidyāṁ bhogo bhūṣayate dhanam ॥

रूप की शोभा गुणों से है, कुल की सदाचार से, विद्या की सफलता से और धन की शोभा उसके सदुपयोग से है।

चरित्रविद्यासमृद्धि
6 जन॰ 2026
चाणक्य नीति

प्रियवाक्यप्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः। तस्मात् तदेव वक्तव्यं वचने का दरिद्रता॥

priyavākyapradānena sarve tuṣyanti jantavaḥ । tasmāt tadeva vaktavyaṁ vacane kā daridratā ॥

प्रिय और मधुर वचन सभी को प्रसन्न करते हैं। यह श्लोक हमें सिखाता है कि जब मधुर वचन बोलने में कुछ खर्च नहीं होता, तो बोलने में कंजूसी क्यों करनी चाहिए?

नैतिकताचरित्रसामंजस्य
1 जन॰ 2026
श्रीमद्भागवत पुराण

ज्ञानं विरक्तिरैश्वर्यं शौर्यं तेजो बलं स्मृतिः। स्वातन्त्र्यं कौशलं कान्तिर्धैर्यं मार्दवमेव च॥

jñānaṁ viraktiḥ aiśvaryam śauryaṁ tejo balaṁ smṛtiḥ । svātantryaṁ kauśalaṁ kāntiḥ dhairyaṁ mārdavaṁ eva ca ॥

ज्ञान, वैराग्य, सामर्थ्य, शौर्य, तेज, धैर्य और कोमलता जैसे पूरक गुण मिलकर एक परिपक्व चरित्र का निर्माण करते हैं।

चरित्रविद्यासाहसस्वतंत्रताज्ञान
31 दिस॰ 2025
विदुर नीति

यथा यथा हि पुरुषः कल्याणे कुरुते मनः। तथा तथाऽस्य सर्वार्थाः सिद्ध्यन्ते नात्र संशयः॥

yathā yathā hi puruṣaḥ kalyāṇe kurute manaḥ । tathā tatha'sya sarvārthāḥ siddhyante nātra saṁśayaḥ ॥

मन जितना कल्याणकारी विचारों की ओर मुड़ता है, आचरण और उसके परिणाम उतने ही उस शुभ संकल्प के अनुरूप होने लगते हैं।

कर्मचरित्रसफलता
26 दिस॰ 2025

बन्धनं मरणं वापि जयो वापि पराजयः। उभयत्र समो वीरः वीरभावो हि वीरता॥

bandhanaṁ maraṇaṁ vāpi jayo vāpi parājayaḥ । ubhayatra samo vīraḥ vīrabhāvo hi vīratā ॥

बंधन या मृत्यु, विजय या पराजय—हर परिस्थिति में साहस और समभाव बनाए रखना ही सच्ची वीरता है।

साहसदृढ़ताचरित्र
25 दिस॰ 2025
भगवद् गीता

यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः। स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥

yad yad ācarati śreṣṭhas tat tad evetaro janaḥ । sa yat pramāṇaṃ kurute lokas tad anuvartate ॥

श्रेष्ठ व्यक्तियों का आचरण और उनके स्थापित मानदंड समाज को दिशा देते हैं, क्योंकि अन्य लोग स्वाभाविक रूप से उनका अनुसरण करते हैं।

नेतृत्वचरित्रनैतिकताकर्तव्य
24 दिस॰ 2025
विदुर नीति

यस्य कृत्यं न विघ्नन्ति शीतमुष्णं भयं रतिः। समृद्धिरसमृद्धिर्वा स वै पण्डित उच्यते॥

yasya kṛtyaṁ na vighnanti śītamuṣṇaṁ bhayaṁ ratiḥ । samṛddhir asamṛddhir vā sa vai paṇḍita ucyate ॥

सच्चा ज्ञानी सर्दी-गर्मी, भय-इच्छा और संपत्ति-विपत्ति के बीच भी अपने कर्तव्य से विचलित नहीं होता।

ज्ञानदृढ़ताचरित्रअनुशासन
18 दिस॰ 2025
सुभाषितरत्नाकर

धर्मो यशो नयो दाक्ष्यम् मनोहारि सुभाषितम्। इत्यादिगुणरत्नानां संग्रहीनावसीदति॥

dharmaḥ yaśo nayaḥ dākṣyam manohāri subhāṣitam । ityādi guṇaratnānāṁ saṅgrahīnāvasīdati ॥

धर्म, यश, नीति, दक्षता और मधुर वाणी से युक्त चरित्र विपरीत परिस्थितियों में भी व्यक्ति को विषाद से बचाता है।

चरित्रज्ञाननैतिकता
16 दिस॰ 2025
वाल्मीकि रामायण

न मर्षयन्ति चात्मानं सम्भावयितुमात्मना। अदर्शयित्वा शूरास्तु कर्म कुर्वन्ति दुष्करम्॥

na marśayanti cātmānaṁ sambhāvayitum ātmana । adarśayitvā śūrāstu karma kurvanti duṣkaraṁ ॥

सच्चे वीर अपनी महानता का स्वयं बखान नहीं करते; उनके कठिन कर्म और मौन साहस ही उनका मूल्य प्रकट करते हैं।

विनम्रतासाहसचरित्र
12 दिस॰ 2025
वाल्मीकि रामायण

क्रोधः प्राणहरः शत्रुः क्रोधो मित्रमुखो रिपुः। क्रोधो ह्यसिर्महातीक्ष्णः सर्वं क्रोधोऽपकर्षति॥

krodhaḥ prāṇaharaḥ śatruḥ krodho mitramukho ripuḥ । krodho hy asir mahātīkṣṇaḥ sarvaṃ krodho ’pakarṣati ॥

क्रोध भीतर बसने वाला ऐसा शत्रु है जो विनाशकारी, दुर्जेय और अंततः उसे धारण करने वाले व्यक्ति के पतन का कारण बनता है।

नैतिकताचरित्रअनुशासन