विदुर नीति महाभारत के उद्योग पर्व में चिंतित राजा धृतराष्ट्र को विदुर द्वारा दिया गया परामर्श है, जब कुरु संघर्ष युद्ध की ओर बढ़ रहा था। यह संवाद राजनीतिक संकट में स्थित है, किंतु उसके विचार व्यक्तिगत आचरण, विवेक, वाणी, मैत्री, समृद्धि और ज्ञानी व्यक्ति के स्वभाव तक विस्तृत हैं।
विदुर ऐसे सलाहकार के रूप में बोलते हैं जो नैतिक सिद्धांत और उसकी अवहेलना के परिणाम दोनों समझता है। इसलिए उनका परामर्श स्पष्ट दृष्टि, योग्य व्यक्तियों का चयन, विचार के बाद कर्म, आश्रितों की रक्षा तथा क्रोध, अहंकार और पक्षपात से बचने पर विशेष बल देता है।