भगवद् गीता कुरुक्षेत्र युद्ध आरम्भ होने से ठीक पहले कृष्ण और अर्जुन के बीच हुआ संवाद है। यह महाभारत के भीष्म पर्व का भाग है और अर्जुन के उस नैतिक तथा भावनात्मक संकट से आरम्भ होती है जिसमें उसे कर्म का स्पष्ट मार्ग दिखाई नहीं देता।
कृष्ण का उत्तर कर्तव्य, अनुशासित कर्म, ज्ञान, भक्ति, आत्मसंयम और आत्मा के स्वरूप पर परस्पर जुड़ी हुई शिक्षा विकसित करता है। गीता के श्लोक स्वतंत्र रूप से बहुत उद्धृत होते हैं, किंतु पूरे संवाद के अंश के रूप में पढ़ने पर उनका आशय अधिक स्पष्ट होता है।