न कर्मणा न प्रजया - त्याग से अमरत्व

23 जून 2026

न कर्मणा न प्रजया धनेन त्यागेनैके अमृतत्वमानशुः। परेण नाकं निहितं गुहायां विभ्राजते यद् यतयो विशन्ति॥

na karmaṇā na prajayā dhanena tyāgenaike amṛtatvam ānaśuḥ । pareṇa nākaṃ nihitaṃ guhāyāṃ vibhrājate yad yatayo viśanti ॥

प्रधानमंत्री का संदेश

निःस्वार्थ भाव से राष्ट्र और समाज की सेवा में आजीवन समर्पित रहे देश की महान विभूति डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को उनके बलिदान दिवस पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। उनके प्रखर विचार और आदर्श देश की हर पीढ़ी को मातृभूमि की सेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे।

न कर्मणा न प्रजया का अर्थ

अमृतत्व केवल कर्म, धन या वंश से प्राप्त नहीं होता बल्कि त्याग और उच्च आदर्शों के प्रति पूर्ण समर्पण से प्राप्त होता है। जो यतिजन राष्ट्र, समाज और सत्य के लिए अपने स्वार्थों का त्याग करते हैं, उनका जीवन, काल की सीमाओं से परे जाकर जनमानस में अमर हो जाता है।

शब्दार्थ

न कर्मणाna karmaṇā

न कर्म से

√कृ

न प्रजयाna prajayā

न सन्तान से

प्र + √जन्

धनेनdhanena

धन से

धन

त्यागेनtyāgena

त्याग से

√त्यज्

एकेeke

कुछ लोग

एक

अमृतत्वम्amṛtatvam

अमृतत्व

अ + √मृ

आनशुःānaśuḥ

प्राप्त कर चुके

√अश्

परेण नाकम्pareṇa nākam

स्वर्ग से परे

पर + नाक

निहितम्nihitam

निहित

नि + √धा

गुहायाम्guhāyām

गुहा में

√गुह्

विभ्राजतेvibhrājate

देदीप्यमान होता है

वि + √भ्राज्

यत्yat

जो

यद्

यतयःyatayaḥ

यति जन

√यत्

विशन्तिviśanti

प्रवेश करते हैं

√विश्

व्याख्या

यह उपनिषद्-मंत्र तीन बाहरी साधनों—कर्म, प्रजा या संतान, और धन—को अमृतत्व की प्राप्ति के लिए अपर्याप्त बताकर त्याग को उसका मार्ग मानता है। ‘परेण नाकम्’ का अर्थ परम स्वर्ग अथवा सर्वोच्च आनन्द है; साथ दिए अर्थ का ‘स्वर्ग से भी परे’ शाब्दिक अनुवाद नहीं, एक स्वतंत्र प्रस्तुति है। आगे मंत्र उस परम तत्त्व को अंतर-गुहा में निहित और प्रकाशमान बताता है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को दी गई श्रद्धांजलि के संदर्भ में इस आध्यात्मिक शिक्षा का नागरिक अनुप्रयोग किया गया है। राष्ट्र और समाज के लिए समर्पित जीवन अपने आदर्शों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों में जीवित रह सकता है। त्याग और सार्वजनिक सेवा का यह संबंध पोस्ट का अनुप्रयोग है; मंत्र स्वयं सीधे त्याग द्वारा अमृतत्व की प्राप्ति की बात करता है।

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विद्यासामर्थ्यचरित्रनैतिकता