चित्तप्रशमनोपायो योग - मन और श्वास की शांति

22 जून 2026

चित्तप्रशमनोपायो योग इत्यभिधीयते। प्राणस्पन्दनिरोधो वा द्वेधा योगस्य धारणा॥

cittapraśamanopāyo yoga ity abhidhīyate । prāṇaspandanirodho vā dvedhā yogasya dhāraṇā ॥

प्रधानमंत्री का संदेश

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की बड़ी सफलता इस बात का प्रमाण है कि योग न केवल दुनियाभर में करोड़ों लोगों को शारीरिक रूप से स्वस्थ बना रहा है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास के साथ सकारात्मक जीवन जीने के लिए प्रेरित भी कर रहा है।

चित्तप्रशमनोपायो योग इत्यभिधीयते का अर्थ

चित्त को पूरी तरह शान्त करने का उपाय 'योग' कहलाता है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए योग की दो पद्धतियाँ बताई गई हैं - मन को शान्त करना और श्वास की गति को नियंत्रित करना।

शब्दार्थ

चित्तप्रशमनोपायःcittapraśamanopāyaḥ

चित्त को शान्त करने का उपाय

चित्त + प्र + √शम् + उपाय

योगःyogaḥ

योग

√युज्

इतिiti

इस प्रकार

अभिधीयतेabhidhīyate

कहा जाता है

अभि + √धा

प्राणस्पन्दनिरोधःprāṇaspandanirodhaḥ

प्राण की गति का निरोध

प्राण + √स्पन्द् + नि + √रुध्

वाvā

अथवा

द्वेधाdvedhā

दो प्रकार की

द्वि

योगस्यyogasya

योग की

√युज्

धारणाdhāraṇā

धारणा

√धृ

व्याख्या

यह श्लोक योग को केवल शारीरिक आसनों तक सीमित न रखकर चित्त के प्रशमन, अर्थात मन की हलचल को शांत करने की साधना के रूप में परिभाषित करता है। आगे योग की धारणा को दो भागों में समझाया गया है—चित्त की वृत्तियों को स्थिर करना और प्राण-स्पन्दन, यानी श्वास तथा जीवन-ऊर्जा की गति को नियंत्रित करना। ये दोनों उपाय अलग-अलग नहीं हैं; सम और संयमित श्वास मानसिक व्याकुलता को शांत करने में सहायक होती है, जबकि स्थिर मन श्वास को सहज और सूक्ष्म बनाता है। इस प्रकार योग ध्यान, आत्मसंयम और आंतरिक संतुलन की समन्वित साधना बन जाता है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के संदर्भ में यह भाव बताता है कि योग का प्रभाव शारीरिक स्वास्थ्य से आगे बढ़कर मन की शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक जीवन-दृष्टि तक पहुँचता है।

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