शास्त्रे प्रतिष्ठा - प्रभावी कर्म के छह गुण

19 जून 2026

शास्त्रे प्रतिष्ठा सहजश्च बोधः प्रागल्भ्यमभ्यस्तगुणा च वाणी। कालानुरोधः प्रतिभानवत्त्वमेते गुणाः कामदुघाः क्रियासु॥

śāstre pratiṣṭhā sahajaśca bodhaḥ prāgalbhyam abhyastaguṇā ca vāṇī । kālānurodhaḥ pratibhānavattvam ete guṇāḥ kāmadughāḥ kriyāsu ॥

प्रधानमंत्री का संदेश

ज्ञान, विवेक और दूरदर्शिता जैसे सद्गुण जीवन में सफलता का प्रमुख आधार हैं। इनसे समृद्ध व्यक्ति कठिन से कठिन चुनौतियों में भी विजयी होता है।

शास्त्रे प्रतिष्ठा सहजश्च बोधः का अर्थ

विषय का प्रामाणिक ज्ञान, स्वाभाविक विवेकशीलता, निर्भीक आत्मविश्वास, अभ्यास से परिष्कृत ओजस्वी वाणी, समय की मांग को पहचानने की दूरदर्शिता और नित्य नवीन सूझबूझ- ये छह गुण मानव के प्रत्येक पुरुषार्थ में 'कामधेनु' के समान सिद्ध होते हैं, जो हर साध्य को साध देते हैं।

शब्दार्थ

शास्त्रेśāstre

शास्त्र में

√शास्

प्रतिष्ठाpratiṣṭhā

प्रतिष्ठा

प्रति + √स्था

सहजःsahajaḥ

सहज

सह + √जन्

च बोधःca bodhaḥ

और बोध

√बुध्

प्रागल्भ्यम्prāgalbhyam

प्रागल्भ्य

प्र + गल्भ

अभ्यस्तगुणाabhyastaguṇā

अभ्यास से सिद्ध

अभि + √अस् + गुण

च वाणीca vāṇī

और वाणी

√वण्

कालानुरोधःkālānurodhaḥ

काल के अनुकूल चलना

काल + अनु + √रुध्

प्रतिभानवत्त्वम्pratibhānavattvam

प्रतिभा से युक्त होना

प्रति + √भा

एते गुणाःete guṇāḥ

ये गुण

गुण

कामदुघाःkāmadughāḥ

कामधेनु के समान फलदायी

काम + √दुह्

क्रियासुkriyāsu

क्रियाओं में

√कृ

व्याख्या

भवभूति के मालतीमाधवम् का यह श्लोक उन छह गुणों को एक साथ रखता है जो क्षमता को प्रभावी कर्म में बदलते हैं: विषय का दृढ़ ज्ञान, सहज बोध, निर्भीक प्रगल्भता, अभ्यास से निखरी वाणी, समय की आवश्यकता को पहचानने की दृष्टि और नित्य नवीन प्रतिभा। 'प्रतिष्ठा' का भाव अपने शास्त्र या विषय में मजबूत आधार से है, जबकि 'प्रागल्भ्य' ज्ञान को निडरता और आत्मविश्वास के साथ व्यवहार में उतारने की योग्यता है। 'अभ्यस्तगुणा वाणी' बताती है कि ओजस्वी अभिव्यक्ति केवल आत्मविश्वास से नहीं, बल्कि निरंतर अभ्यास से परिष्कृत होती है। कामधेनु की उपमा इन गुणों की संयुक्त फलदायिनी शक्ति को व्यक्त करती है। समय-बोध के बिना ज्ञान निष्क्रिय रह सकता है और विवेक के बिना आत्मविश्वास उतावलापन बन सकता है; इसलिए श्लोक सफलता को विद्या, निर्णय-क्षमता, संवाद, दूरदर्शिता और सृजनशीलता के संतुलित मेल के रूप में देखता है। प्रधानमंत्री के संदेश के संदर्भ में यह कठिन चुनौतियों का स्पष्ट बुद्धि से सामना करने और समझ को विजयी कर्म में बदलने का व्यावहारिक सूत्र प्रस्तुत करता है।

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sve sve karmaṇyabhirataḥ saṁsiddhiṁ labhate naraḥ । svakarmanirataḥ siddhiṁ yathā vindati tacchṛṇu ॥

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