आत्मविश्वास पर सुभाषित

16 सुभाषित इस विषय पर

यह विषय 6 स्रोतों से आए 16 सुभाषितों को एक साथ लाता है।

नवीनतम अद्यतन: 13 अग॰ 2026

13 अग॰ 2026
वाल्मीकि रामायण

दैवं पुरुषकारेण यः समर्थः प्रबाधितुम्। न दैवेन विपन्नार्थः पुरुषः सोऽवसीदति॥

daivaṁ puruṣakāreṇa yaḥ samarthaḥ prabādhitum । na daivena vipannārthaḥ puruṣaḥ so’vasīdati ॥

वाल्मीकि रामायण का यह श्लोक सिखाता है कि जो मनुष्य पुरुषार्थ से दैव का सामना करने में समर्थ है, वह विपरीत परिस्थितियों में निराश नहीं होता।

दृढ़तासाहसआत्मविश्वाससफलता
9 जुल॰ 2026
वाल्मीकि रामायण

अनिर्वेदः श्रियो मूलमनिर्वेदः परं सुखम्। अनिर्वेदो हि सततं सर्वार्थेषु प्रवर्तकः॥

anirvedaḥ śriyo mūlam anirvedaḥ paraṁ sukham । anirvedo hi satataṁ sarvārtheṣu pravartakaḥ ॥

वाल्मीकि रामायण के सुन्दर काण्ड का यह श्लोक बताता है कि निराशा से मुक्त उत्साह, दृढ़ विश्वास और सतत प्रयास ही उन्नति और सफलता का आधार हैं।

दृढ़ताआत्मविश्वाससफलताअनुशासन
19 जून 2026
मालतीमाधवम्

शास्त्रे प्रतिष्ठा सहजश्च बोधः प्रागल्भ्यमभ्यस्तगुणा च वाणी। कालानुरोधः प्रतिभानवत्त्वमेते गुणाः कामदुघाः क्रियासु॥

śāstre pratiṣṭhā sahajaśca bodhaḥ prāgalbhyam abhyastaguṇā ca vāṇī । kālānurodhaḥ pratibhānavattvam ete guṇāḥ kāmadughāḥ kriyāsu ॥

भवभूति के मालतीमाधवम् का यह श्लोक उन छह गुणों का वर्णन करता है जो मानव-प्रयास को फलदायी बनाकर लक्ष्य तक पहुंचाते हैं।

विद्याज्ञानआत्मविश्वासअनुशासनसफलता
17 जून 2026
कुमारसम्भवम्

त्वत्सम्भावितमात्मानं बहु मन्यामहे वयम्। प्रायः प्रत्ययमाधत्ते स्वगुणेषूत्तमादरः॥

tvatsambhāvitam ātmānaṃ bahu manyāmahe vayam । prāyaḥ pratyayam ādhatte svaguṇeṣūttamādaraḥ ॥

यह सुभाषित बताता है कि श्रेष्ठ व्यक्तियों से मिला आदर मनुष्य को अपने गुणों के प्रति दृढ़ आत्मविश्वास देता है।

सम्मानआत्मविश्वासवैयक्तिकताचरित्र
30 अप्रैल 2026
वाल्मीकि रामायण

अनिर्वेदो हि सततं सर्वार्थेषु प्रवर्तकः। करोति सफलं जन्तोः कर्म यच्च करोति सः॥

anirvedo hi satataṁ sarvārtheṣu pravartakaḥ । karoti saphalaṁ jantoḥ karma yacca karoti saḥ ॥

वाल्मीकि रामायण का यह श्लोक सिखाता है कि किस प्रकार उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा किसी भी कार्य को सफल बनाने के लिए आवश्यक हैं।

दृढ़तासफलताआत्मविश्वाससाहस
10 अप्रैल 2026
वाल्मीकि रामायण

व्यसने वाऽर्थकृच्छ्रे वा भये वा जीवनान्तके। विमृशन् वै स्वया बुद्ध्या धृतिमान् नावसीदति॥

vyasane vā’rthakṛcchre vā bhaye vā jīvanāntake । vimṛśan vai svayā buddhyā dhṛtimān nāvasīdati ॥

वाल्मीकि रामायण का यह श्लोक सिखाता है कि आर्थिक संकट या प्राणों के भय की स्थिति में कैसे धैर्य और स्वयं के विवेक द्वारा दुःख और मानसिक अवसाद से बचा जा सकता है।

दृढ़ताज्ञानसाहसआत्मविश्वास
18 मार्च 2026
नीतिशतकम्

एकेनापि हि शूरेण पादाक्रान्तं महीतलम्। क्रियते भास्करेणेव स्फारस्फुरिततेजसा॥

ekenāpi hi śūreṇa pādākrāntaṃ mahītalam । kriyate bhāskareṇeva sphārasphuritetejasā ॥

जैसे सूर्य अकेले ही अपने तेज से समस्त पृथ्वी को प्रकाशित करता है, वैसे ही एक सच्चा वीर अकेले अपने साहस से पूरी धरती पर अपना प्रभाव स्थापित कर सकता है।

साहसआत्मविश्वासवैयक्तिकताशक्ति
17 मार्च 2026
कामन्दकीय नीतिसार

एकोऽपि सिंहः साहस्रं यूथं मथ्नाति दन्तिनाम्। तस्मात् सिंहमिवोदारमात्मानं वीक्ष्य सम्पतेत्॥

eko'pi siṁhaḥ sāhasraṁ yūthaṁ mathnāti dantinām । tasmāt siṁham ivodāram ātmānaṁ vīkṣya sampatet ॥

जैसे एक अकेला सिंह हाथियों के झुंड पर भारी पड़ता है, वैसे ही साहस और संकल्प से मनुष्य कठिनतम चुनौतियों को पार कर सकता है।

साहसआत्मविश्वासचरित्रशक्ति
5 मार्च 2026
वाल्मीकि रामायण

उत्साहो बलवानार्य नास्त्युत्साहात् परं बलम्। सोत्साहस्यास्ति लोकेऽस्मिन् न किञ्चिदपि दुर्लभम्॥

utsāho balavān ārya nāsty utsāhāt paraṃ balam । sotsāhasyāsti loke’smin na kiñcid api durlabham ॥

उत्साह ही सबसे बड़ा बल है। रामायण का यह श्लोक हमें याद दिलाता है कि एक उत्साही व्यक्ति के लिए कोई भी लक्ष्य दुर्लभ नहीं है।

ऊर्जादृढ़तासाहसआत्मविश्वास
2 मार्च 2026
ऋग्वेद

न वा उ मां वृजने वारयन्ते न पर्वतासो यदहं मनस्ये। मम स्वनात् कृधुकर्णो भयात एवेदनु द्यून्किरणः समेजात्॥

na vā u māṃ vṛjane vārayante na parvatāso yad ahaṃ manasye । mama svanāt kṛdhukarṇo bhayāta eved anu dyūn kiraṇaḥ samejāt ॥

ऋग्वेद का यह मंत्र अदम्य इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास की महिमा का गान करता है, जो बड़े से बड़े पहाड़ों जैसी बाधाओं को भी पार करने में सक्षम है।

आत्मविश्वाससाहसदृढ़ता
5 फ़र॰ 2026
मत्स्य पुराण

विकल्पमात्रावस्थाने वैरूप्यं मनसो भवेत्। पश्चान्मूलक्रियारम्भगम्भीरावर्तदुस्तरः॥

vikalpamātrāvasthāne vairūpyaṃ manaso bhavet । paścānmūlakriyārambhagambhīrāvartadustaraḥ ॥

मत्स्य पुराण का यह श्लोक चेतावनी देता है कि थोड़ा सा भी संशय मन को विकृत कर सकता है और कार्य में दुर्गम बाधाएं उत्पन्न कर सकता है।

अनुशासनआत्मविश्वासज्ञान
3 फ़र॰ 2026
विदुर नीति

श्रीर्मङ्गलात् प्रभवति प्रागल्भ्यात् सम्प्रवर्धते। दाक्ष्यात् तु कुरुते मूलं संयमात् प्रतितिष्ठति॥

śrīrmaṅgalāt prabhavati prāgalbhyāt sampravardhate । dākṣyāt tu kurute mūlaṃ saṃyamāt pratitiṣṭhati ॥

विदुर नीति का यह श्लोक बताता है कि कैसे श्री (लक्ष्मी) शुभ कर्मों से जन्म लेती है और संयम से स्थिर होती है।

समृद्धिसामर्थ्यअनुशासनआत्मविश्वास
12 जन॰ 2026
हर्षचरित

अङ्गणवेदी वसुधा कुल्या जलधिः स्थली च पातालम्। वल्मीकश्च सुमेरुः कृतप्रतिज्ञस्य वीरस्य॥

aṅgaṇavedī vasudhā kulyā jaladhiḥ sthalī ca pātālam । valmīkaśca sumeruḥ kṛtapratijñasya vīrasya ॥

दृढ़ संकल्पी वीर के लिए कुछ भी असंभव नहीं। जानिए कैसे एक मजबूत इच्छाशक्ति बाधाओं को अवसरों में बदल देती है।

साहसदृढ़ताआत्मविश्वास
5 जन॰ 2026
पञ्चतन्त्र

वनानि दहतो वह्नेः सखा भवति मारुतः। स एव दीपनाशाय कृशे कस्यास्ति सौहृदम्॥

vanāni dahato vahneḥ sakhā bhavati mārutaḥ । sa eva dīpanāśāya kṛśe kasyāsti sauhṛdam ॥

जंगल की आग को हवा बढ़ावा देती है, पर वही हवा दीपक को बुझा देती है। यह श्लोक हमें स्वयं को सामर्थ्यवान बनाने की महत्ता सिखाता है।

शक्तिआत्मविश्वासज्ञान
2 जन॰ 2026
महाभारत

उत्थातव्यं जागृतव्यं योक्तव्यं भूतिकर्मसु। भविष्यतीत्येव मनः कृत्वा सततमव्यथैः॥

utthātavyaṃ jāgṛtavyaṃ yoktavyaṃ bhūtikarmasu । bhaviṣyatītyeva manaḥ kṛtvā satatam avyathaiḥ ॥

उठें, जागरूक रहें, विषाद त्यागें और इस विश्वास के साथ कर्म में लगें कि सार्थक प्रयास अवश्य फल दे सकता है।

दृढ़ताअनुशासनआत्मविश्वाससफलता
29 दिस॰ 2025
सुभाषितावलि

नात्युच्चशिखरो मेरुर्नातिनीचं रसातलम्। व्यवसायद्वितीयानां नात्यपारो महोदधिः॥

na aty ucca śikharaḥ meru na atīnīcaṁ rasātalam । vyavasāya-dvitīyānāṁ na aty-apāro mahodadhiḥ ॥

दृढ़ संकल्प वाले व्यक्ति के लिए न कोई शिखर बहुत ऊँचा है, न सागर बहुत विशाल और न कोई कार्य पुरुषार्थ से परे।

दृढ़ताआत्मविश्वासअनुशासनसफलता