शक्ति पर सुभाषित

28 सुभाषित इस विषय पर

यह विषय 6 स्रोतों से आए 28 सुभाषितों को एक साथ लाता है।

नवीनतम अद्यतन: 12 अक्टू॰ 2026

12 अक्टू॰ 2026
देवी महात्म्यम्

देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या। तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः॥

devyā yayā tatamidaṃ jagadātmaśaktyā niśśeṣadevagaṇaśaktisamūhamūrtyā । tāmambikāmakhiladevamaharṣipūjyāṃ bhaktyā natāḥ sma vidadhātu śubhāni sā naḥ ॥

देवी महात्म्यम् की यह प्रार्थना जगत् में व्याप्त और समस्त देवशक्तियों की स्वरूप माँ अम्बिका को नमन करके सबके लिए मंगल माँगती है।

भक्तिशक्तिकल्याण
29 सित॰ 2026
सुभाषितरत्नभाण्डागारम्

उद्यमः साहसं धैर्यं बुद्धिः शक्तिः पराक्रमः। षडेते यत्र वर्तन्ते तत्र दैवं सहायकृत्॥

udyamaḥ sāhasaṃ dhairyaṃ buddhiḥ śaktiḥ parākramaḥ । ṣaḍete yatra vartante tatra daivaṃ sahāyakṛt ॥

उद्यम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम से युक्त व्यक्ति को दैव का सहयोग भी प्राप्त होता है।

दृढ़तासाहसविद्याशक्ति
12 जून 2026
शक्तिसंगमतंत्रम्

नारी त्रैलोक्यजननी नारी त्रैलोक्यरूपिणी। नारी त्रिभुवनाधारा नारी शक्तिस्वरूपिणी॥

nārī trailokyajananī nārī trailokyarūpiṇī । nārī tribhuvanādhārā nārī śaktisvarūpiṇī ॥

यह श्लोक नारी को तीनों लोकों की जननी, अभिव्यक्ति, आधार और शक्ति के वास्तविक स्वरूप के रूप में नमन करता है।

नारीशक्तिशक्तिआध्यात्मिकता
8 जून 2026
अथर्ववेद

यावच्चतस्रः प्रदिशश्चक्षुर्यावत् समश्नुते। तावत् समैत्विन्द्रियं मयि तद्धस्तिवर्चसम्॥

yāvac catasraḥ pradiśaś cakṣur yāvat samaśnute । tāvat samaitv indriyaṃ mayi tad dhastivarcasam ॥

अथर्ववेद का यह मंत्र चारों दिशाओं तक फैली समृद्धि, जागरूक दृष्टि और प्रकृति-संतुलन से जुड़े सतत कल्याण की प्रार्थना करता है।

शक्तिऊर्जा
3 जून 2026
विदुर नीति

धूमायन्ते व्यपेतानि ज्वलन्ति सहितानि च। धृतराष्ट्रोल्मुकानीव ज्ञातयो भरतर्षभ॥

dhūmāyante vyapetāni jvalanti sahitāni ca । dhṛtarāṣṭrolmukānīva jñātayo bharatarṣabha ॥

विदुर नीति का यह श्लोक बिखरी और संगठित लकड़ियों के रूपक से बताता है कि सामूहिकता सुप्त शक्ति को प्रकट और प्रभावी बना देती है।

एकताशक्तिसफलता
13 मई 2026
शिव पुराण

एवं परस्परापेक्षा शक्तिशक्तिमतोः स्थिता। न शिवेन विना शक्तिर्न शक्त्या विना शिवः॥

evaṁ parasparāpekṣā śaktiśaktimatoḥ sthitā । na śivena vinā śaktirna śaktyā vinā śivaḥ ॥

शक्ति और सामर्थ्य परस्पर पूरक हैं — जैसे शिव के बिना शक्ति नहीं और शक्ति के बिना शिव नहीं, वैसे ही सामर्थ्य और ऊर्जा के समन्वय से ही सृजन, प्रगति और सफलता संभव होती है।

शक्तिसामर्थ्यसामंजस्यआध्यात्मिकता
11 मई 2026
ऋग्वेद

अग्निर्मूर्धा दिवः ककुत्पतिः पृथिव्या अयम्। अपां रेतांसि जिन्वति॥

agnirmūrdhā divaḥ kakutpatiḥ pṛthivyā ayam । apāṁ retāṁsi jinvati ॥

एक वैदिक मंत्र जो अग्नि को द्युलोक की सर्वोच्च शक्ति और पदार्थ के भीतर ऊर्जा को जागृत करने वाले मूल तत्व के रूप में वर्णित करता है।

प्रकृतिऊर्जाशक्ति
7 मई 2026
महाभारत

उदीर्णमनसो योधा वाहनानि च भारत। यस्यां भवन्ति सेनायां ध्रुवं तस्यां जयं वदेत्॥

udīrṇamanaso yodhā vāhanāni ca bhārata । yasyāṁ bhavanti senāyāṁ dhruvaṁ tasyāṁ jayaṁ vadet ॥

महाभारत से लिया गया यह श्लोक बताता है कि उत्साहित सैनिक और उत्कृष्ट संसाधन ही किसी सेना की जीत को सुनिश्चित करते हैं।

साहससामर्थ्यशक्तिसफलताअनुशासन
17 अप्रैल 2026
देवी महात्म्यम्

देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या। तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः॥

devyā yayā tatam idaṁ jagad ātmaśaktyā niśśeṣa-devagaṇa-śakti-samūha-mūrtyā । tām ambikām akhila-deva-maharṣi-pūjyāṁ bhaktyā natāḥ sma vidadhātu śubhāni sā naḥ ॥

देवी महात्म्य का यह मंत्र उस जगदम्बा को नमन करता है जो सम्पूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त हैं और समस्त शक्तियों के एकीकृत सामर्थ्य का साक्षात् स्वरूप हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकतानारीशक्ति
16 अप्रैल 2026
ऋग्वेद

व्युच्छन्ती हि रश्मिभिर्विश्वमाभासि रोचनम्। ता त्वामुषर्वसूयवो गीर्भिः कण्वा अहूषत॥

vyucchantī hi raśmibhir viśvam ābhāsi rocanam । tā tvām uṣar vasūyavo gīrbhiḥ kaṇvā ahūṣata ॥

ऋग्वेद का यह मंत्र नारी शक्ति और ज्ञान की महिमा का वर्णन करता है, जो अज्ञान के अंधकार को मिटाकर सम्पूर्ण विश्व को आलोकित करती है।

नारीशक्तिसम्मानशक्ति
27 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

siddhagandharvayakṣādyairasurairamarairapi । sevyamānā sadā bhūyāt siddhidā siddhidāyinī ॥

नवदुर्गा के नौवें स्वरूप माँ सिद्धिदात्री की स्तुति, जो सभी सिद्धियों और शक्तियों को प्रदान करने वाली हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता
26 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥

śvete vṛṣe samārūḍhā śvetāmbaradharā śuciḥ । mahāgaurī śubhaṁ dadyān mahādevapramodadā ॥

नवदुर्गा के आठवें स्वरूप माँ महागौरी की स्तुति, जो पवित्रता और शांति की प्रतीक हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता
25 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा। वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥

vāmapādollasallohalatākaṇṭakabhūṣaṇā । vardhanmūrdhadhvajā kṛṣṇā kālarātrirbhayaṅkarī ॥

नवदुर्गा स्तोत्र का यह श्लोक माँ कालरात्रि के भयंकर किंतु मंगलकारी स्वरूप का वर्णन करता है, जो अंधकार और भय का नाश करने वाली हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता
24 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥

candrahāsojjvalakarā śārdūlavaravāhanā । kātyāyanī śubhaṁ dadyād devī dānavaghātinī ॥

चन्द्रहास खड्ग धारण करने वाली और सिंह पर सवार माँ कात्यायनी की वंदना, जो शुभ फल और शक्ति प्रदान करती हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता
23 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदाऽस्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

siṁhāsanagatā nityaṁ padmāśritakaradvayā । śubhadā’stu sadā devī skandamātā yaśasvinī ॥

नवरात्रि के पांचवें दिन पूजी जाने वाली माँ स्कन्दमाता की स्तुति, जो वात्सल्य और ममता की प्रतिमूर्ति हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता
22 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदाऽस्तु मे॥

surāsampūrṇakalaśaṃ rudhirāplutameva ca । dadhānā hastapadmābhyāṃ kūṣmāṇḍā śubhadā'stu me ॥

ब्रह्मांड की सृजन शक्ति माँ कूष्माण्डा की प्रार्थना, जो अपने हाथों में अमृत कलश धारण करती हैं और भक्तों का कल्याण करती हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता
21 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

piṇḍajapravarārūḍhā caṇḍakopāstrakairyutā । prasādaṁ tanute mahyaṁ candraghaṇṭeti viśrutā ॥

माँ चंद्रघंटा की स्तुति, जो देवी दुर्गा का तीसरा रूप हैं, सिंह पर सवार होकर शांति और कल्याण प्रदान करती हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता
20 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

dadhānā karapadmābhyām akṣamālā-kamaṇḍalū । devī prasīdatu mayi brahmacāriṇy-anuttamā ॥

नवरात्रि के दूसरे दिन पूजी जाने वाली माँ ब्रह्मचारिणी का यह श्लोक उनके तपस्वी स्वरूप और अनुशासन की महिमा का गान करता है।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता
19 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

vande vāñchitalābhāya candrārdhakṛtaśekharām । vṛṣārūḍhāṃ śūladharāṃ śailaputrīṃ yaśasvinīm ॥

यह श्लोक नवरात्रि के प्रथम दिन पूजी जाने वाली देवी शैलपुत्री की स्तुति है, जो भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं और संयम, शांति तथा शक्ति की प्रतीक हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता
18 मार्च 2026
नीतिशतकम्

एकेनापि हि शूरेण पादाक्रान्तं महीतलम्। क्रियते भास्करेणेव स्फारस्फुरिततेजसा॥

ekenāpi hi śūreṇa pādākrāntaṃ mahītalam । kriyate bhāskareṇeva sphārasphuritetejasā ॥

जैसे सूर्य अकेले ही अपने तेज से समस्त पृथ्वी को प्रकाशित करता है, वैसे ही एक सच्चा वीर अकेले अपने साहस से पूरी धरती पर अपना प्रभाव स्थापित कर सकता है।

साहसआत्मविश्वासवैयक्तिकताशक्ति
17 मार्च 2026
कामन्दकीय नीतिसार

एकोऽपि सिंहः साहस्रं यूथं मथ्नाति दन्तिनाम्। तस्मात् सिंहमिवोदारमात्मानं वीक्ष्य सम्पतेत्॥

eko'pi siṁhaḥ sāhasraṁ yūthaṁ mathnāti dantinām । tasmāt siṁham ivodāram ātmānaṁ vīkṣya sampatet ॥

जैसे एक अकेला सिंह हाथियों के झुंड पर भारी पड़ता है, वैसे ही साहस और संकल्प से मनुष्य कठिनतम चुनौतियों को पार कर सकता है।

साहसआत्मविश्वासचरित्रशक्ति
10 मार्च 2026
अथर्ववेद

यार्णवेऽधि सलिलमग्र आसीद्यां मायाभिरन्वचरन्मनीषिणः। यस्या हृदयं परमे व्योमन्त्सत्येनावृतममृतं पृथिव्याः। सा नो भूमिस्त्विषिं बलं राष्ट्रे दधातूत्तमे॥

yārṇave’dhi salilam agra āsīd yāṁ māyābhir anvacaran manīṣiṇaḥ । yasyā hṛdayaṁ parame vyoman tsatyenāvṛtam amṛtaṁ pṛthivyāḥ । sā no bhūmis tviṣiṁ balaṁ rāṣṭre dadhātūttame ॥

अथर्ववेद के पृथ्वी सूक्त से एक गंभीर प्रार्थना, जो राष्ट्र की शक्ति, तेज और समृद्धि के लिए भूमि का आह्वान करती है।

प्रकृतिशक्तिज्ञान
27 फ़र॰ 2026
महाभारत

न हि शौर्यात्परं किञ्चित् त्रिषु लोकेषु विद्यते। शूरः सर्वं पालयति सर्वं शूरे प्रतिष्ठितम्॥

na hi śauryāt paraṃ kiñcit triṣu lokeṣu vidyate । śūraḥ sarvaṃ pālayati sarvaṃ śūre pratiṣṭhitam ॥

यह श्लोक बताता है कि तीनों लोकों में शौर्य से बढ़कर कुछ नहीं है, और यही वह शक्ति है जो समस्त मर्यादा और व्यवस्था की रक्षा करती है।

साहसशक्तिधर्मकर्तव्य
29 जन॰ 2026
अथर्ववेद

एको बहूनामसि मन्य ईडिता विशं विशं युद्धाय सं शिशाधि। अकृत्तरुक्त्वया युजा वयं द्युमन्तं घोषं विजयाय कृण्मसि॥

eko bahūnāmasi manya īḍitā viśaṃ viśaṃ yuddhāya saṃ śiśādhi । akṛttaruk tvayā yujā vayaṃ dyumantaṃ ghoṣaṃ vijayāya kṛṇmasi ॥

मन्यु सूक्त का यह मंत्र अनुशासित युद्ध-ऊर्जा, सामूहिक साहस और विवेकपूर्ण दिशा में प्राप्त सम्मानजनक विजय का आह्वान करता है।

साहसनेतृत्वशक्तिअनुशासन
15 जन॰ 2026
ऋग्वेद

अस्माकमिन्द्रः समृतेषु ध्वजेष्वस्माकं या इषवस्ता जयन्तु। अस्माकं वीरा उत्तरे भवन्त्वस्माँ उ देवा अवता हवेषु॥

asmākam indraḥ samṛteṣu dhvajeṣv asmākaṁ yā iṣavas tā jayantu । asmākaṁ vīrā uttare bhavantv asmā̃ u devā avatā haveṣu ॥

यह वैदिक प्रार्थना संघर्ष में साहस, समुदाय की रक्षा और ऊँचे उठे ध्वजों के नीचे विजय के लिए इन्द्र का आह्वान करती है।

साहसशक्तिभक्ति
5 जन॰ 2026
पञ्चतन्त्र

वनानि दहतो वह्नेः सखा भवति मारुतः। स एव दीपनाशाय कृशे कस्यास्ति सौहृदम्॥

vanāni dahato vahneḥ sakhā bhavati mārutaḥ । sa eva dīpanāśāya kṛśe kasyāsti sauhṛdam ॥

जंगल की आग को हवा बढ़ावा देती है, पर वही हवा दीपक को बुझा देती है। यह श्लोक हमें स्वयं को सामर्थ्यवान बनाने की महत्ता सिखाता है।

शक्तिआत्मविश्वासज्ञान
30 दिस॰ 2025

सामर्थ्यमूलं स्वातन्त्र्यं श्रममूलं च वैभवम्। न्यायमूलं सुराज्यं स्यात् सङ्घमूलं महाबलम्॥

sāmarthyamūlaṁ svātantryaṁ śramamūlaṁ ca vaibhavam । nyāyamūlaṁ surājyaṁ syāt saṅghamūlaṁ mahābalaṁ ॥

शक्ति स्वतंत्रता का, परिश्रम समृद्धि का, न्याय सुशासन का और संगठित एकता सामूहिक बल का आधार बनती है।

स्वतंत्रताशक्तिदृढ़तासुशासनएकता
17 दिस॰ 2025
हितोपदेश

अल्पानामपि वस्तूनां संहतिः कार्यसाधिका। तृणैर्गुणत्वमापन्नैर्बध्यन्ते मत्तदन्तिनः॥

alpanām api vastūnāṁ saṃhatiḥ kārya-sādhikā । tṛṇair guṇatvam āpannair badhyante mattadantinaḥ ॥

छोटी और दुर्बल वस्तुएँ भी सुव्यवस्थित रूप से जुड़कर महान कार्य कर सकती हैं, जैसे तृणों की रस्सी हाथी को बाँध लेती है।

एकतासामर्थ्यशक्ति