देव्या यया ततमिदम् – जगदम्बा का आशीर्वाद

17 अप्रैल 2026

देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या। तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः॥

devyā yayā tatam idaṁ jagad ātmaśaktyā niśśeṣa-devagaṇa-śakti-samūha-mūrtyā । tām ambikām akhila-deva-maharṣi-pūjyāṁ bhaktyā natāḥ sma vidadhātu śubhāni sā naḥ ॥

प्रधानमंत्री का संदेश

हमारी नारी शक्ति सशक्त भारत की पहचान है। देश की माताएं-बहनें और बेटियां अपनी अटूट संकल्पशक्ति, निष्ठा और सेवाभाव से आज हर क्षेत्र में भारतवर्ष का गौरव बढ़ा रही हैं।

देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या का अर्थ

जिन देवी ने अपनी शक्ति से इस संपूर्ण जगत को व्याप्त किया है और जो समस्त देवताओं की शक्तियों के समूह का साक्षात् स्वरूप हैं, उन समस्त देवताओं और महर्षियों द्वारा पूजनीया अम्बिका को हम भक्तिपूर्वक नमस्कार करते हैं। वे जगदम्बा हमारा कल्याण करें।

शब्दार्थ

देव्याdevyā

देवी के द्वारा

√दिव्

ययाyayā

जिनसे

यद्

ततम्tatam

व्याप्त

√तन्

इदम् जगत्idaṁ jagat

यह जगत्

√गम्

आत्मशक्त्याātmaśaktyā

अपनी शक्ति से

आत्मन् + शक्ति

यह करण कारक देवी द्वारा अपनी शक्ति से जगत् को व्याप्त करने का वर्णन करता है।

निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्याniśśeṣadevagaṇaśaktisamūhamūrtyā

समस्त देवगणों की शक्ति के समूह-स्वरूप

निस् + शेष + देव + गण + शक्ति + समूह + मूर्ति

ताम् अम्बिकाम्tām ambikām

उन अम्बिका को

अम्बा

अखिलदेवमहर्षिपूज्याम्akhiladevamaharṣipūjyām

समस्त देवों और महर्षियों से पूज्य

अखिल + देव + महर्षि + √पूज्

भक्त्याbhaktyā

भक्ति से

√भज्

नताः स्मnatāḥ sma

हम नत हैं

√नम्

विदधातुvidadhātu

विधान करें

वि + √धा

शुभानिśubhāni

शुभ

√शुभ्

सा नःsā naḥ

वे हमारे लिए

तद्

व्याख्या

यह मंत्र देवी को "निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या" के रूप में परिभाषित करता है, जिसका अर्थ है—सभी दिव्य शक्तियों का एकीकृत स्वरूप। आज के संदर्भ में, यह श्लोक इस विचार को पुष्ट करता है कि राष्ट्र का विकास उसकी नारी शक्ति के सामूहिक सामर्थ्य का परिणाम है। यह दर्शाता है कि महिलाएं समाज का केवल एक हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वे आधारभूत शक्ति हैं जो हर क्षेत्र को गति और जीवंतता प्रदान करती हैं। यह श्लोक शक्रादि स्तुति का है, जिसे महिषासुर वध के पश्चात् देवगण गाते हैं—इसीलिए यहाँ उन्हें समस्त देवशक्तियों के समूह-स्वरूप कहा गया है। 'आत्मशक्त्या' उस शक्ति को बताता है जिससे देवी जगत् को व्याप्त करती हैं, जबकि पूर्ववर्ती समास उन्हें समस्त देवगण की शक्तियों के समूह-स्वरूप में प्रस्तुत करता है। शक्ति उधार ली गई थी या स्वतंत्र थी—श्लोक स्वयं ऐसा विरोध स्थापित नहीं करता।

मूल पोस्ट

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देवी महात्म्यम् से और सुभाषित

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12 अक्टू॰ 2026
देवी महात्म्यम्

देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या। तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः॥

devyā yayā tatamidaṃ jagadātmaśaktyā niśśeṣadevagaṇaśaktisamūhamūrtyā । tāmambikāmakhiladevamaharṣipūjyāṃ bhaktyā natāḥ sma vidadhātu śubhāni sā naḥ ॥

देवी महात्म्यम् की यह प्रार्थना जगत् में व्याप्त और समस्त देवशक्तियों की स्वरूप माँ अम्बिका को नमन करके सबके लिए मंगल माँगती है।

भक्तिशक्तिकल्याण

भक्ति पर और सुभाषित

विषय पृष्ठ देखें
12 अक्टू॰ 2026
देवी महात्म्यम्

देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या। तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः॥

devyā yayā tatamidaṃ jagadātmaśaktyā niśśeṣadevagaṇaśaktisamūhamūrtyā । tāmambikāmakhiladevamaharṣipūjyāṃ bhaktyā natāḥ sma vidadhātu śubhāni sā naḥ ॥

देवी महात्म्यम् की यह प्रार्थना जगत् में व्याप्त और समस्त देवशक्तियों की स्वरूप माँ अम्बिका को नमन करके सबके लिए मंगल माँगती है।

भक्तिशक्तिकल्याण
29 सित॰ 2026
सुभाषितरत्नभाण्डागारम्

उद्यमः साहसं धैर्यं बुद्धिः शक्तिः पराक्रमः। षडेते यत्र वर्तन्ते तत्र दैवं सहायकृत्॥

udyamaḥ sāhasaṃ dhairyaṃ buddhiḥ śaktiḥ parākramaḥ । ṣaḍete yatra vartante tatra daivaṃ sahāyakṛt ॥

उद्यम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम से युक्त व्यक्ति को दैव का सहयोग भी प्राप्त होता है।

दृढ़तासाहसविद्याशक्ति
28 सित॰ 2026
चरक संहिता

सुखोपविष्टास्ते तत्र पुण्यां चक्रुः कथामिमाम्। धर्मार्थकाममोक्षाणामारोग्यं मूलमुत्तमम्॥

sukhopaviṣṭās te tatra puṇyāṃ cakruḥ kathām imām । dharmārthakāmamokṣāṇām ārogyaṃ mūlam uttamam ॥

चरक संहिता आरोग्य को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति का सर्वोत्तम आधार बताती है।

स्वास्थ्यधर्मसमृद्धिआध्यात्मिकता