भक्ति पर सुभाषित

28 सुभाषित इस विषय पर

यह विषय 6 स्रोतों से आए 28 सुभाषितों को एक साथ लाता है।

नवीनतम अद्यतन: 13 अक्टू॰ 2026

13 अक्टू॰ 2026
देवी महात्म्यम्

त्वं वैष्णवी शक्तिरनन्तवीर्या विश्वस्य बीजं परमासि माया। सम्मोहितं देवि समस्तमेतत् त्वं वै प्रसन्ना भुवि मुक्तिहेतुः॥

tvaṃ vaiṣṇavī śaktiranantavīryā viśvasya bījaṃ paramāsi māyā । sammohitaṃ devi samastametat tvaṃ vai prasannā bhuvi muktihetuḥ ॥

देवी महात्म्यम् का यह श्लोक देवी को विश्व का मूल कारण और अपनी कृपा से मुक्ति देने वाली शक्ति के रूप में स्तुति करता है।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता
12 अक्टू॰ 2026
देवी महात्म्यम्

देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या। तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः॥

devyā yayā tatamidaṃ jagadātmaśaktyā niśśeṣadevagaṇaśaktisamūhamūrtyā । tāmambikāmakhiladevamaharṣipūjyāṃ bhaktyā natāḥ sma vidadhātu śubhāni sā naḥ ॥

देवी महात्म्यम् की यह प्रार्थना जगत् में व्याप्त और समस्त देवशक्तियों की स्वरूप माँ अम्बिका को नमन करके सबके लिए मंगल माँगती है।

भक्तिशक्तिकल्याण
17 सित॰ 2026
विश्वकर्माष्टकम्

अनादिरप्रमेयश्च अरूपश्च जयाजयः। लोकरूपो जगन्नाथः विश्वकर्मन्नमो नमः॥

anādir aprameyaś ca arūpaś ca jayājayaḥ । lokarūpo jagannāthaḥ viśvakarman namo namaḥ ॥

विश्वकर्माष्टकम् का यह श्लोक अनादि, अप्रमेय और अरूप प्रभु को नमन करता है, जिनका स्वरूप सम्पूर्ण जगत है।

भक्तिआध्यात्मिकता
14 सित॰ 2026
गणेशपञ्चरत्नम्

मुदाकरात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं कलाधरावतंसकं विलासिलोकरक्षकम्। अनायकैकनायकं विनाशितेभदैत्यकं नताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायकम्॥

mudākarāttamodakaṁ sadā vimuktisādhakaṁ kalādharāvataṁsakaṁ vilāsilokarakṣakam । anāyakaikanāyakaṁ vināśitebhadaityakaṁ natāśubhāśunāśakaṁ namāmi taṁ vināyakam ॥

श्रीविनायक की यह भक्तिपूर्ण स्तुति उन्हें मुक्ति के साधक, जगत् के रक्षक और अशुभ के शीघ्र नाशक के रूप में नमन करती है।

भक्तिआध्यात्मिकतानेतृत्व
10 सित॰ 2026
ऋग्वेद

स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः। स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥

svasti na indro vṛddhaśravāḥ svasti naḥ pūṣā viśvavedāḥ । svasti nas tārkṣyo ariṣṭanemiḥ svasti no bṛhaspatir dadhātu ॥

ऋग्वेद का यह स्वस्ति-मन्त्र इन्द्र, पूषा, तार्क्ष्य और बृहस्पति से हम सबके कल्याण की कामना करता है।

कल्याणभक्तिआध्यात्मिकता
4 सित॰ 2026
कृष्णाष्टकम्

वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्। देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥

vasudevasutaṁ devaṁ kaṁsacāṇūramardanam । devakīparamānandaṁ kṛṣṇaṁ vande jagadgurum ॥

वसुदेव-पुत्र, कंस और चाणूर के संहारक, देवकी के परम आनन्द और जगद्गुरु श्रीकृष्ण की श्रद्धापूर्ण वन्दना।

भक्तिआध्यात्मिकता
10 अग॰ 2026
ऋग्वेद

भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः। स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभिर्व्यशेम देवहितं यदायुः॥

bhadraṃ karṇebhiḥ śṛṇuyāma devā bhadraṃ paśyemākṣabhir yajatrāḥ । sthirair aṅgais tuṣṭuvāṃsas tanūbhir vyaśema devahitaṃ yad āyuḥ ॥

ऋग्वेद की यह प्रार्थना शुभ सुनने और देखने, स्थिर अंगों के साथ स्तुति करने तथा देवों द्वारा निर्धारित आयु को पूर्ण करने की कामना करती है।

कल्याणभक्ति
16 जुल॰ 2026
स्कन्द पुराण

देवदेव जगन्नाथ सुरासुरनमस्कृत। पुण्यश्लोकाव्ययानन्त परमात्मन्नमोऽस्तु ते॥

devadeva jagannātha surāsuranamaskṛta । puṇyaślokāvyayānanta paramātman namo’stu te ॥

भगवान जगन्नाथ को देवताओं के भी देव, जगत के स्वामी और सभी हृदयों में स्थित परमात्मा मानकर किया गया भक्तिपूर्ण प्रणाम।

भक्तिआध्यात्मिकता
3 जुल॰ 2026
अमरनाथाष्टकम्

वाग्बुद्धिचित्तकरणैश्च तपोभिरुग्रैः शक्यं समाकलयितुं न यदीयरूपम्। तं भक्तिभावसुलभं शरणं नतानां नित्यं भजाम्यमरनाथमहं दयालुम्॥

vāgbuddhicittakaraṇaiś ca tapobhir ugraiḥ śakyaṃ samākalayituṃ na yadīyarūpam । taṃ bhaktibhāvasulabhaṃ śaraṇaṃ natānāṃ nityaṃ bhajāmy amaranātham ahaṃ dayālum ॥

भगवान अमरनाथ की यह भक्तिपूर्ण वंदना बताती है कि वे वाणी, बुद्धि, मन, इन्द्रियों और तप से परे हैं, पर भक्तिभाव से सहज प्राप्त होते हैं।

भक्तिआध्यात्मिकताविनम्रताआत्मज्ञान
22 अप्रैल 2026
अथर्ववेद

यस्यां वृक्षा वानस्पत्या ध्रुवास्तिष्ठन्ति विश्वहा। पृथिवीं धेनुं प्रदुहां न उदिच्छन्तु नमोऽस्तु पृथिव्यै॥

yasyāṃ vṛkṣā vānaspatyā dhruvāstiṣṭhanti viśvahā । pṛthivīṃ dhenuṃ praduhāṃ na udicchantu namo’stu pṛthivyai ॥

अथर्ववेद के भूमि सूक्त से ली गई यह प्रार्थना पृथ्वी माता को समस्त संसाधनों की प्रदाता और जीवन की आधारशिला के रूप में सम्मानित करती है।

प्रकृतिभक्तिआध्यात्मिकता
17 अप्रैल 2026
देवी महात्म्यम्

देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या। तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः॥

devyā yayā tatam idaṁ jagad ātmaśaktyā niśśeṣa-devagaṇa-śakti-samūha-mūrtyā । tām ambikām akhila-deva-maharṣi-pūjyāṁ bhaktyā natāḥ sma vidadhātu śubhāni sā naḥ ॥

देवी महात्म्य का यह मंत्र उस जगदम्बा को नमन करता है जो सम्पूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त हैं और समस्त शक्तियों के एकीकृत सामर्थ्य का साक्षात् स्वरूप हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकतानारीशक्ति
6 अप्रैल 2026
हितोपदेश

सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादात्तस्य धूर्जटेः। जाह्नवीफेनलेखेव यन्मूर्ध्नि शशिनः कला॥

siddhiḥ sādhye satām astu prasādāt tasya dhūrjaṭeḥ । jāhnavī-phena-lekheva yan-mūrdhni śaśinaḥ kalā ॥

जिन महादेव के मस्तक पर चन्द्रमा की कला गंगा के झाग के समान सुशोभित है, उनकी कृपा से सज्जनों के संकल्प सिद्ध हों।

भक्तिआध्यात्मिकतादृढ़ताचरित्र
2 अप्रैल 2026
रामरक्षास्तोत्रम्

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शिरसा नमामि॥

manojavaṁ mārutatulyavegaṁ jitendriyaṁ buddhimatāṁ variṣṭham । vātātmajaṁ vānarayūthamukhyaṁ śrīrāmadūtaṁ śirasā namāmi ॥

श्री राम के दूत हनुमान जी की यह वंदना उनकी गति, बुद्धि और इंद्रिय संयम की प्रशंसा करती है।

भक्तिसाहसज्ञानअनुशासनविनम्रता
27 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

siddhagandharvayakṣādyairasurairamarairapi । sevyamānā sadā bhūyāt siddhidā siddhidāyinī ॥

नवदुर्गा के नौवें स्वरूप माँ सिद्धिदात्री की स्तुति, जो सभी सिद्धियों और शक्तियों को प्रदान करने वाली हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता
26 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥

śvete vṛṣe samārūḍhā śvetāmbaradharā śuciḥ । mahāgaurī śubhaṁ dadyān mahādevapramodadā ॥

नवदुर्गा के आठवें स्वरूप माँ महागौरी की स्तुति, जो पवित्रता और शांति की प्रतीक हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता
25 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा। वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥

vāmapādollasallohalatākaṇṭakabhūṣaṇā । vardhanmūrdhadhvajā kṛṣṇā kālarātrirbhayaṅkarī ॥

नवदुर्गा स्तोत्र का यह श्लोक माँ कालरात्रि के भयंकर किंतु मंगलकारी स्वरूप का वर्णन करता है, जो अंधकार और भय का नाश करने वाली हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता
24 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥

candrahāsojjvalakarā śārdūlavaravāhanā । kātyāyanī śubhaṁ dadyād devī dānavaghātinī ॥

चन्द्रहास खड्ग धारण करने वाली और सिंह पर सवार माँ कात्यायनी की वंदना, जो शुभ फल और शक्ति प्रदान करती हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता
23 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदाऽस्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

siṁhāsanagatā nityaṁ padmāśritakaradvayā । śubhadā’stu sadā devī skandamātā yaśasvinī ॥

नवरात्रि के पांचवें दिन पूजी जाने वाली माँ स्कन्दमाता की स्तुति, जो वात्सल्य और ममता की प्रतिमूर्ति हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता
22 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदाऽस्तु मे॥

surāsampūrṇakalaśaṃ rudhirāplutameva ca । dadhānā hastapadmābhyāṃ kūṣmāṇḍā śubhadā'stu me ॥

ब्रह्मांड की सृजन शक्ति माँ कूष्माण्डा की प्रार्थना, जो अपने हाथों में अमृत कलश धारण करती हैं और भक्तों का कल्याण करती हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता
21 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

piṇḍajapravarārūḍhā caṇḍakopāstrakairyutā । prasādaṁ tanute mahyaṁ candraghaṇṭeti viśrutā ॥

माँ चंद्रघंटा की स्तुति, जो देवी दुर्गा का तीसरा रूप हैं, सिंह पर सवार होकर शांति और कल्याण प्रदान करती हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता
20 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

dadhānā karapadmābhyām akṣamālā-kamaṇḍalū । devī prasīdatu mayi brahmacāriṇy-anuttamā ॥

नवरात्रि के दूसरे दिन पूजी जाने वाली माँ ब्रह्मचारिणी का यह श्लोक उनके तपस्वी स्वरूप और अनुशासन की महिमा का गान करता है।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता
19 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

vande vāñchitalābhāya candrārdhakṛtaśekharām । vṛṣārūḍhāṃ śūladharāṃ śailaputrīṃ yaśasvinīm ॥

यह श्लोक नवरात्रि के प्रथम दिन पूजी जाने वाली देवी शैलपुत्री की स्तुति है, जो भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं और संयम, शांति तथा शक्ति की प्रतीक हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता
11 फ़र॰ 2026
ऋग्वेद

यस्येमे हिमवन्तो महित्वा यस्य समुद्रं रसया सहाहुः। यस्येमाः प्रदिशो यस्य बाहू कस्मै देवाय हविषा विधेम॥

yasyeme himavanto mahitvā yasya samudraṃ rasayā sahāhuḥ । yasyemāḥ pradiśo yasya bāhū kasmai devāya haviṣā vidhema ॥

राष्ट्र की महिमा का गान करता यह मंत्र हमें देश के प्रति सर्वस्व समर्पण करने की प्रेरणा देता है।

भक्तिआध्यात्मिकताप्रकृति
6 फ़र॰ 2026
अथर्ववेद

उपस्थास्ते अनमीवा अयक्ष्मा अस्मभ्यं सन्तु पृथिवि प्रसूताः। दीर्घं न आयुः प्रतिबुध्यमाना वयं तुभ्यं बलिहृतः स्याम॥

upasthāste anamīvā ayakṣmā asmabhyaṃ santu pṛthivi prasūtāḥ । dīrghaṃ na āyuḥ pratibudhyamānā vayaṃ tubhyaṃ balihṛtaḥ syāma ॥

अथर्ववेद के भूमि सूक्त से ली गई यह प्रार्थना पृथ्वी माता से उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और राष्ट्र सेवा के विवेक की याचना करती है।

प्रकृतिस्वास्थ्यकल्याणभक्ति
15 जन॰ 2026
ऋग्वेद

अस्माकमिन्द्रः समृतेषु ध्वजेष्वस्माकं या इषवस्ता जयन्तु। अस्माकं वीरा उत्तरे भवन्त्वस्माँ उ देवा अवता हवेषु॥

asmākam indraḥ samṛteṣu dhvajeṣv asmākaṁ yā iṣavas tā jayantu । asmākaṁ vīrā uttare bhavantv asmā̃ u devā avatā haveṣu ॥

यह वैदिक प्रार्थना संघर्ष में साहस, समुदाय की रक्षा और ऊँचे उठे ध्वजों के नीचे विजय के लिए इन्द्र का आह्वान करती है।

साहसशक्तिभक्ति
14 जन॰ 2026

सूर्यो देवो दिवं गच्छेत् मकरस्थो रविः प्रभुः। उत्तरायणे महापुण्यं सर्वपापप्रणाशनम्॥

sūryo devo divaṃ gacchet makarastho raviḥ prabhuḥ । uttarāyaṇe mahāpuṇyaṃ sarvapāpapraṇāśanam ॥

यह भक्तिपूर्ण श्लोक सूर्य की उत्तरायण गति को प्रकाश, शुद्धि, दान और आध्यात्मिक पुण्य से जुड़ा शुभ परिवर्तन मानता है।

आध्यात्मिकताभक्तिधर्मऊर्जा
9 जन॰ 2026
स्कन्द पुराण

आदिनाथेन शर्वेण सर्वप्राणिहिताय वै। आद्यतत्त्वान्यथानीयं क्षेत्रमेतन्महाप्रभम्। प्रभासितं महादेवि यत्र सिद्ध्यन्ति मानवाः॥

ādināthena śarveṇa sarvaprāṇihitāya vai । ādyatattvānyathānīyaṁ kṣetrametanmahāprabham । prabhāsitaṁ mahādevi yatra siddhyanti mānavāḥ ॥

भगवान शिव के आदिनाथ रूप द्वारा जन-कल्याण हेतु प्रकट किया गया प्रभास क्षेत्र, जहाँ दिव्यता और सिद्धि का वास है।

आध्यात्मिकताआत्मज्ञानधर्मभक्ति
8 जन॰ 2026
द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम्

सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्। भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये॥

saurāṣṭradeśe viśade'tiramye jyotirmayaṁ candrakalāvataṁsam । bhaktipradānāya kṛpāvatīrṇaṁ taṁ somanāthaṁ śaraṇaṁ prapadye ॥

सौराष्ट्र की पवित्र भूमि में स्थित, ज्योति स्वरूप भगवान सोमनाथ की वंदना करते हुए यह श्लोक श्रद्धा और शांति का प्रतीक है।

भक्तिआध्यात्मिकता