स्वास्थ्य पर सुभाषित

10 सुभाषित इस विषय पर

यह विषय 6 स्रोतों से आए 10 सुभाषितों को एक साथ लाता है।

नवीनतम अद्यतन: 28 सित॰ 2026

28 सित॰ 2026
चरक संहिता

सुखोपविष्टास्ते तत्र पुण्यां चक्रुः कथामिमाम्। धर्मार्थकाममोक्षाणामारोग्यं मूलमुत्तमम्॥

sukhopaviṣṭās te tatra puṇyāṃ cakruḥ kathām imām । dharmārthakāmamokṣāṇām ārogyaṃ mūlam uttamam ॥

चरक संहिता आरोग्य को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति का सर्वोत्तम आधार बताती है।

स्वास्थ्यधर्मसमृद्धिआध्यात्मिकता
23 सित॰ 2026
चरक संहिता

हिताहितं सुखं दुःखमायुस्तस्य हिताहितम्। मानं च तच्च यत्रोक्तमायुर्वेदः स उच्यते॥

hitāhitaṃ sukhaṃ duḥkham āyus tasya hitāhitam । mānaṃ ca tac ca yatroktam āyurvedaḥ sa ucyate ॥

चरक संहिता आयुर्वेद को हित-अहित, सुख-दुःख, जीवन के अनुकूल-प्रतिकूल तत्त्वों और आयु के मान का ज्ञान बताती है।

स्वास्थ्यकल्याण
28 अग॰ 2026
भविष्य महापुराण

एष प्रभावो रक्षायाः कथितस्ते युधिष्ठिर। जयदः सुखदश्चैव पुत्रारोग्यधनप्रदः॥

eṣa prabhāvo rakṣāyāḥ kathitas te yudhiṣṭhira । jayadaḥ sukhadaś caiva putrārogyadhanapradaḥ ॥

भविष्य महापुराण का यह श्लोक रक्षा सूत्र को जय, सुख, सन्तति, आरोग्य और धन प्रदान करने वाला बताता है।

सफलताकल्याणस्वास्थ्यसमृद्धि
15 जुल॰ 2026
महाभारत

धन्यानामुत्तमं दाक्ष्यं धनानामुत्तमं श्रुतम्। लाभानां श्रेय आरोग्यं सुखानां तुष्टिरुत्तमा॥

dhanyānām uttamaṃ dākṣyaṃ dhanānām uttamaṃ śrutam । lābhānāṃ śreya ārogyaṃ sukhānāṃ tuṣṭir uttamā ॥

महाभारत के यक्षप्रश्न का यह श्लोक बताता है कि कौशल, विद्या, आरोग्य और संतोष जीवन की श्रेष्ठ संपदाएँ हैं।

विद्यासामर्थ्यस्वास्थ्यकल्याणज्ञान
4 जून 2026

योगेन चित्तस्य पदेन वाचां मलं शरीरस्य च वैद्यकेन। योऽपाकरोत् तं प्रवरं मुनीनां पतञ्जलिं प्राञ्जलिरानतोऽस्मि॥

yogena cittasya padena vācāṃ malaṃ śarīrasya ca vaidyakena । yo'pākarot taṃ pravaraṃ munīnāṃ patañjaliṃ prāñjalir ānato'smi ॥

महर्षि पतञ्जलि को समर्पित यह पारंपरिक मंगलाचरण मन के लिए योग, वाणी के लिए व्याकरण और शरीर के लिए आयुर्वेद की शुद्धिकारक भूमिका बताता है।

योगस्वास्थ्यविद्या
7 अप्रैल 2026
अष्टाङ्गहृदयम्

लाघवं कर्मसामर्थ्यं दीप्तोऽग्निर्मेदसः क्षयः। विभक्तघनगात्रत्वं व्यायामादुपजायते॥

lāghavaṁ karmasāmarthyaṁ dīpto’gnir medasaḥ kṣayaḥ । vibhaktaghanagātratvaṁ vyāyāmādupajāyate ॥

अष्टाङ्गहृदयम् के अनुसार जानें कि कैसे नियमित व्यायाम शरीर की कार्यक्षमता, चयापचय (Metabolism) और शारीरिक संरचना को बेहतर बनाकर उत्तम स्वास्थ्य का मार्ग प्रशस्त करता है।

स्वास्थ्यअनुशासनकल्याण
16 मार्च 2026

व्यायामाल्लभते स्वास्थ्यं दीर्घायुष्यं बलं सुखम्। आरोग्यं परमं भाग्यं स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम्॥

vyāyāmāl labhate svāsthyaṁ dīrghāyuṣyaṁ balaṁ sukham । ārogyaṁ paramaṁ bhāgyaṁ svāsthyaṁ sarvārthasādhanam ॥

नियमित व्यायाम स्वास्थ्य, बल, दीर्घायु और अपने दायित्वों को प्रभावी ढंग से निभाने की शारीरिक क्षमता प्रदान करता है।

स्वास्थ्यअनुशासनकल्याण
6 फ़र॰ 2026
अथर्ववेद

उपस्थास्ते अनमीवा अयक्ष्मा अस्मभ्यं सन्तु पृथिवि प्रसूताः। दीर्घं न आयुः प्रतिबुध्यमाना वयं तुभ्यं बलिहृतः स्याम॥

upasthāste anamīvā ayakṣmā asmabhyaṃ santu pṛthivi prasūtāḥ । dīrghaṃ na āyuḥ pratibudhyamānā vayaṃ tubhyaṃ balihṛtaḥ syāma ॥

अथर्ववेद के भूमि सूक्त से ली गई यह प्रार्थना पृथ्वी माता से उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और राष्ट्र सेवा के विवेक की याचना करती है।

प्रकृतिस्वास्थ्यकल्याणभक्ति
4 फ़र॰ 2026

औषधेष्वपि सर्वेषु हास्यं श्रेष्ठं वदन्ति ह। स्वाधीनं सुलभं चैवारोग्यानन्दविवर्धनम्॥

auṣadheṣv api sarveṣu hāsyaṃ śreṣṭhaṃ vadanti ha । svādhīnaṃ sulabhaṃ caivārogyānandavivardhanam ॥

यह सुभाषित बताता है कि क्यों हास्य को सभी उपचारों में सर्वोत्तम और सुलभ मार्ग माना गया है।

स्वास्थ्यकल्याण
10 दिस॰ 2025
योगचूडामण्युपनिषद्

आसनेन रुजो हन्ति प्राणायामेन पातकम्। विकारं मानसं योगी प्रत्याहारेण सर्वदा॥ धारणाभिर्मनोधैर्यं याति चैतन्यमद्भुतम्। समाधौ मोक्षमाप्नोति त्यक्त्वा कर्म शुभाशुभम्॥

āsanena rujo hanti prāṇāyāmena pātakam । vikāraṁ mānasaṁ yogī pratyāhāreṇa sarvadā ॥ dhāraṇābhir mano dhairyaṁ yāti caitanyam adbhutam । samādhau mokṣam āpnoti tyaktvā karma śubhāśubham ॥

आसन, प्राणायाम और अनुशासित योगाभ्यास शरीर के रोग और अंतर्मन की अशुद्धि दूर कर साधक को गहन मुक्ति के लिए तैयार करते हैं।

योगस्वास्थ्यआत्मज्ञानअनुशासन