व्यायामाल्लभते स्वास्थ्यं - स्वास्थ्य ही परम भाग्य है

16 मार्च 2026

व्यायामाल्लभते स्वास्थ्यं दीर्घायुष्यं बलं सुखम्। आरोग्यं परमं भाग्यं स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम्॥

vyāyāmāl labhate svāsthyaṁ dīrghāyuṣyaṁ balaṁ sukham । ārogyaṁ paramaṁ bhāgyaṁ svāsthyaṁ sarvārthasādhanam ॥

प्रधानमंत्री का संदेश

अच्छा स्वास्थ्य ही जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है, जिसमें व्यायाम की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। मैं सभी देशवासियों के स्वस्थ और सुखी जीवन की कामना करता हूं।

व्यायामाल्लभते स्वास्थ्यं दीर्घायुष्यं बलं का अर्थ

व्यायाम से स्वास्थ्य, लम्बी आयु, बल और सुख की प्राप्ति होती है। निरोगी होना परम भाग्य है और स्वास्थ्य से अन्य सभी कार्य सिद्ध होते हैं।

शब्दार्थ

व्यायामात्vyāyāmāt

व्यायाम से

वि + आ + √यम्

लभतेlabhate

प्राप्त करता है

√लभ्

स्वास्थ्यम्svāsthyam

स्वास्थ्य

स्व + √स्था

दीर्घायुष्यम्dīrghāyuṣyam

दीर्घायु

दीर्घ + आयुस्

बलम्balam

बल

बल

सुखम्sukham

सुख

सुख

आरोग्यम्ārogyam

आरोग्य

अ + रोग

परमम् भाग्यम्paramaṁ bhāgyam

परम भाग्य

√भज्

सर्वार्थसाधनम्sarvārthasādhanam

समस्त प्रयोजनों का साधन

सर्व + अर्थ + √साध्

व्याख्या

यह श्लोक व्यायाम को स्वास्थ्य, दीर्घायु, बल, सुख और आरोग्य का साधन बताता है। वह स्वास्थ्य को परम भाग्य और समस्त प्रयोजनों का साधन कहता है, इसलिए शारीरिक कल्याण को केवल रूप या खेल-कौशल के बजाय सक्षम बनाने वाला आधार मानता है। पाठ स्वयं व्यायाम की आवृत्ति या तीव्रता निर्धारित नहीं करता और न हर कार्य में सफलता की गारंटी देता है। ऐसी व्यावहारिक सलाह उचित हो सकती है, पर उसे श्लोक की संक्षिप्त फल-सूची से अलग रखना चाहिए। इसका स्रोत अभी अनुसन्धेय है।

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devyā yayā tatamidaṃ jagadātmaśaktyā niśśeṣadevagaṇaśaktisamūhamūrtyā । tāmambikāmakhiladevamaharṣipūjyāṃ bhaktyā natāḥ sma vidadhātu śubhāni sā naḥ ॥

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नैतिकताशांतिविद्याअनुशासन