लाघवं कर्मसामर्थ्यं - व्यायाम एवं उत्तम स्वास्थ्य

7 अप्रैल 2026

लाघवं कर्मसामर्थ्यं दीप्तोऽग्निर्मेदसः क्षयः। विभक्तघनगात्रत्वं व्यायामादुपजायते॥

lāghavaṁ karmasāmarthyaṁ dīpto’gnir medasaḥ kṣayaḥ । vibhaktaghanagātratvaṁ vyāyāmādupajāyate ॥

प्रधानमंत्री का संदेश

विश्व स्वास्थ्य दिवस पर मैं सभी देशवासियों के उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं। मेरा आग्रह है कि खुद को स्वस्थ रखने के लिए हरसंभव प्रयास जरूर करें।

लाघवं कर्मसामर्थ्यं दीप्तोऽग्निर्मेदसः का अर्थ

व्यायाम करने से कार्य करने की शक्ति बढ़ती है, जठराग्नि प्रदीप्त होती है, मोटापा घटता है और शरीर के अंग सुदृढ़ और सुगठित होने लगते हैं।

शब्दार्थ

लाघवम्lāghavam

हल्कापन

लघु

कर्मसामर्थ्यम्karmasāmarthyam

कर्म-सामर्थ्य

कर्मन् + समर्थ

दीप्तःdīptaḥ

प्रदीप्त

√दीप्

अग्निःagniḥ

जठराग्नि

अग्नि

मेदसःmedasaḥ

मेद का

मेदस्

क्षयःkṣayaḥ

क्षय

√क्षि

विभक्तघनगात्रत्वम्vibhaktaghanagātratvam

सुविभक्त और सुदृढ़ अंग

वि + √भज् + घन + गात्र

व्यायामात्vyāyāmāt

व्यायाम से

वि + आ + √यम्

उपजायतेupajāyate

उत्पन्न होता है

उप + √जन्

व्याख्या

अष्टाङ्गहृदयम् का यह श्लोक व्यायाम के पाँच परिणाम गिनाता है: लाघव या हल्कापन, कार्य करने की क्षमता, प्रदीप्त जठराग्नि, मेद की कमी और दृढ़ तथा स्पष्ट अंग-संरचना। सूची में अनुभव, कार्यक्षमता, पाचन और शरीर के दिखाई देने वाले रूप से जुड़े प्रभाव साथ आते हैं; इसका क्रम पूरी तरह भीतर से बाहर की ओर नहीं है, क्योंकि दीप्त अग्नि कार्यक्षमता और मेद-क्षय के बीच आती है। ग्रन्थ में इसका स्थान भी महत्त्वपूर्ण है: यह दिनचर्या अध्याय में है, इसलिए व्यायाम को केवल रोगोपचार नहीं, सामान्य नित्यक्रम का अंग माना गया है। इस प्रकार श्लोक नियमित व्यायाम को शरीर की तत्परता, पाचन, संरचना और रूप से एक साथ जोड़ता है।

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स्वास्थ्यकल्याण