उपस्थास्ते अनमीवा - पृथ्वी माता से प्रार्थना

6 फ़र॰ 2026

उपस्थास्ते अनमीवा अयक्ष्मा अस्मभ्यं सन्तु पृथिवि प्रसूताः। दीर्घं न आयुः प्रतिबुध्यमाना वयं तुभ्यं बलिहृतः स्याम॥

upasthāste anamīvā ayakṣmā asmabhyaṃ santu pṛthivi prasūtāḥ । dīrghaṃ na āyuḥ pratibudhyamānā vayaṃ tubhyaṃ balihṛtaḥ syāma ॥

उपस्थास्ते अनमीवा अयक्ष्मा अस्मभ्यं का अर्थ

हे पृथ्वी माता! तेरी गोद से उत्पन्न होने वाली वनस्पतियाँ, अन्न और औषधियाँ हमें निरोगी बनाएं, ताकि हम शक्तिशाली बनकर जीवन का सही विवेक प्राप्त करें और मातृभूमि के लिए सदा अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले बनें।

शब्दार्थ

उपस्थाः तेupasthās te

तुम पर उगने वाली

उप + √स्था

अनमीवाःanamīvāḥ

रोगरहित

अन् + अमीव

अयक्ष्माःayakṣmāḥ

क्षयरोग से मुक्त

अ + यक्ष्म

अस्मभ्यम् सन्तुasmabhyaṁ santu

हमारे लिए हों

√अस्

पृथिविpṛthivi

हे पृथ्वी

√प्रथ्

प्रसूताःprasūtāḥ

उत्पन्न

प्र + √सू

दीर्घम् नः आयुःdīrghaṁ na āyuḥ

हमारी दीर्घ आयु

आयुस्

प्रतिबुध्यमानाःpratibudhyamānāḥ

जागते हुए

प्रति + √बुध्

वयम् तुभ्यम्vayaṁ tubhyam

हम तुम्हारे लिए

बलिहृतः स्यामbalihṛtaḥ syāma

बलि अर्पित करने वाले हों

बलि + √हृ

व्याख्या

यह श्लोक अथर्ववेद के प्रसिद्ध भूमि सूक्त का हिस्सा है। यह प्रकृति के प्रति उस वैदिक श्रद्धा को दर्शाता है जहाँ पृथ्वी को एक पालन-पोषण करने वाली माता के रूप में देखा गया है। साधक "अनमीवा" (रोगों से मुक्ति) और "अयक्ष्मा" (क्षय रोगों से मुक्ति) की प्रार्थना करता है, क्योंकि उत्तम स्वास्थ्य ही महान उद्देश्यों की प्राप्ति का आधार है। यहाँ जीवन का अंतिम लक्ष्य "प्रतिबुध्यमाना" यानी सदैव जागृत रहकर विवेकपूर्ण जीवन जीना और अपनी मातृभूमि के प्रति समर्पित रहना बताया गया है। साझा अर्थ के अंत में मातृभूमि के लिए सर्वस्व समर्पण की बात है, जबकि 'बलिहृतः स्याम' का भाव पृथ्वी को बलि अर्थात् भेंट अर्पित करते रहने का है। ऋचा रोगमुक्त वनस्पतियों और दीर्घ आयु की प्रार्थना करती है और उत्तर में पृथ्वी के प्रति आभार का पारस्परिक सम्बन्ध स्थापित करती है।

मूल पोस्ट

पोस्ट लोड हो रहा है...

अथर्ववेद से और सुभाषित

स्रोत पृष्ठ देखें
22 सित॰ 2026
अथर्ववेद

सुत्रामाणं पृथिवीं द्यामनेहसं सुशर्माणमदितिं सुप्रणीतिम् । दैवीं नावं स्वरित्रामनागसो अस्रवन्तीमा रुहेमा स्वस्तये॥

sutrāmāṇaṃ pṛthivīṃ dyām anehasaṃ suśarmāṇam aditiṃ supraṇītim । daivīṃ nāvaṃ svaritrām anāgaso asravantīm ā ruhemā svastaye ॥

अथर्ववेद का यह मन्त्र पृथ्वी, द्युलोक और अदिति को सुरक्षित दिव्य नौका के रूप में देखता है, जो मनुष्य को कल्याण की ओर ले जाती है।

प्रकृतिकल्याण
15 सित॰ 2026
अथर्ववेद

सहृदयं सांमनस्यमविद्वेषं कृणोमि वः। अन्यो अन्यमभि हर्यत वत्सं जातमिवाघ्न्या॥

sahṛdayaṁ sāṃmanasyam avidveṣaṁ kṛṇomi vaḥ । anyo anyam abhi haryata vatsaṁ jātam ivāghnyā ॥

अथर्ववेद का यह मंत्र सहृदयता, सांमनस्य और द्वेषमुक्त जीवन का आह्वान करते हुए नवजात बछड़े के प्रति गाय के स्नेह को आदर्श बनाता है।

एकतासामंजस्यअहिंसा
17 अग॰ 2026
ऋग्वेद

समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः। समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति॥

samānī va ākūtiḥ samānā hṛdayāni vaḥ । samānam astu vo mano yathā vaḥ susahāsati ॥

ऋग्वेद का अंतिम मंत्र समान संकल्प, समान हृदय और समान मन की कामना करता है, जिससे सब परस्पर सौहार्द के साथ मिलकर रह सकें।

एकतासामंजस्य

प्रकृति पर और सुभाषित

विषय पृष्ठ देखें
12 अक्टू॰ 2026
देवी महात्म्यम्

देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या। तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः॥

devyā yayā tatamidaṃ jagadātmaśaktyā niśśeṣadevagaṇaśaktisamūhamūrtyā । tāmambikāmakhiladevamaharṣipūjyāṃ bhaktyā natāḥ sma vidadhātu śubhāni sā naḥ ॥

देवी महात्म्यम् की यह प्रार्थना जगत् में व्याप्त और समस्त देवशक्तियों की स्वरूप माँ अम्बिका को नमन करके सबके लिए मंगल माँगती है।

भक्तिशक्तिकल्याण
28 सित॰ 2026
चरक संहिता

सुखोपविष्टास्ते तत्र पुण्यां चक्रुः कथामिमाम्। धर्मार्थकाममोक्षाणामारोग्यं मूलमुत्तमम्॥

sukhopaviṣṭās te tatra puṇyāṃ cakruḥ kathām imām । dharmārthakāmamokṣāṇām ārogyaṃ mūlam uttamam ॥

चरक संहिता आरोग्य को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति का सर्वोत्तम आधार बताती है।

स्वास्थ्यधर्मसमृद्धिआध्यात्मिकता
23 सित॰ 2026
चरक संहिता

हिताहितं सुखं दुःखमायुस्तस्य हिताहितम्। मानं च तच्च यत्रोक्तमायुर्वेदः स उच्यते॥

hitāhitaṃ sukhaṃ duḥkham āyus tasya hitāhitam । mānaṃ ca tac ca yatroktam āyurvedaḥ sa ucyate ॥

चरक संहिता आयुर्वेद को हित-अहित, सुख-दुःख, जीवन के अनुकूल-प्रतिकूल तत्त्वों और आयु के मान का ज्ञान बताती है।

स्वास्थ्यकल्याण