सुत्रामाणं पृथिवीं द्याम् - कल्याण की दिव्य नौका

22 सित॰ 2026

सुत्रामाणं पृथिवीं द्यामनेहसं सुशर्माणमदितिं सुप्रणीतिम् । दैवीं नावं स्वरित्रामनागसो अस्रवन्तीमा रुहेमा स्वस्तये॥

sutrāmāṇaṃ pṛthivīṃ dyām anehasaṃ suśarmāṇam aditiṃ supraṇītim । daivīṃ nāvaṃ svaritrām anāgaso asravantīm ā ruhemā svastaye ॥

सुत्रामाणं पृथिवीं द्यामनेहसं का अर्थ

मनुष्य उत्तम संरक्षण करने वाली, स्थिर पृथ्वी और कल्याणकारी, निर्बाध आकाशरूपी आधार का आश्रय लें। पापरहित होकर, शुभ मार्ग से ले जाने वाली, उत्तम चप्पुओं से युक्त दिव्य नौका के समान कल्याणकारी साधनों का आश्रय लेकर सुख और मंगल को प्राप्त करें।

शब्दार्थ

सुत्रामाणम्sutrāmāṇam

उत्तम संरक्षण देने वाली

सु + त्रामन्

पृथिवीम्pṛthivīm

पृथ्वी को

पृथिवी

द्याम्dyām

द्युलोक को

दिव्

अनेहसम्anehasam

अविघ्न, अक्षत

अनेहस्

सुशर्माणम्suśarmāṇam

उत्तम आश्रय देने वाली

सु + शर्मन्

अदितिम्aditim

अदिति को, जो अखण्ड हैं

अदिति

सुप्रणीतिम्supraṇītim

सुन्दर मार्गदर्शन करने वाली

सु + प्र + √नी

दैवीम् नावम्daivīṃ nāvam

दिव्य नौका को

देव + नौ

स्वरित्राम्svaritrām

उत्तम चप्पुओं वाली

सु + अरित्र

अनागसोanāgaso

दोष या क्षति से रहित

अन् + आगस्

अस्रवन्तीम्asravantīm

न रिसने वाली

अ + √स्रु

आ रुहेमā ruhema

हम चढ़ें

आ + √रुह्

स्वस्तयेsvastaye

कल्याण के लिए

सु + अस्ति

व्याख्या

यह मन्त्र पृथ्वी, द्युलोक और अदिति को एक ही व्यापक संरक्षण की छवि में जोड़ता है। ‘सुत्रामाणम्’, ‘सुशर्माणम्’ और ‘सुप्रणीतिम्’ क्रमशः उत्तम रक्षा, सुन्दर आश्रय और उचित मार्गदर्शन का भाव रखते हैं, जबकि अन्त का ‘स्वस्तये’ इस प्रार्थना का उद्देश्य—कल्याण—स्पष्ट करता है। इसकी केन्द्रीय उपमा अच्छे चप्पुओं से युक्त ऐसी दिव्य नौका है जो सुरक्षित और रिसाव से रहित है तथा जिस पर सब मिलकर चढ़ना चाहते हैं। नौका की यह छवि बताती है कि पार पहुँचने के लिए केवल लक्ष्य नहीं, भरोसेमन्द आधार और सही दिशा भी आवश्यक हैं। दिया गया अर्थ इस वैदिक कामना को मनुष्यों के सुख, समृद्धि और मंगल की प्रार्थना के रूप में विस्तार देता है, जबकि मूल मन्त्र सामूहिक ‘हम चढ़ें’ की संक्षिप्त वाणी में बोलता है।

मूल पोस्ट

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अथर्ववेद से और सुभाषित

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15 सित॰ 2026
अथर्ववेद

सहृदयं सांमनस्यमविद्वेषं कृणोमि वः। अन्यो अन्यमभि हर्यत वत्सं जातमिवाघ्न्या॥

sahṛdayaṁ sāṃmanasyam avidveṣaṁ kṛṇomi vaḥ । anyo anyam abhi haryata vatsaṁ jātam ivāghnyā ॥

अथर्ववेद का यह मंत्र सहृदयता, सांमनस्य और द्वेषमुक्त जीवन का आह्वान करते हुए नवजात बछड़े के प्रति गाय के स्नेह को आदर्श बनाता है।

एकतासामंजस्यअहिंसा
10 सित॰ 2026
ऋग्वेद

स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः। स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥

svasti na indro vṛddhaśravāḥ svasti naḥ pūṣā viśvavedāḥ । svasti nas tārkṣyo ariṣṭanemiḥ svasti no bṛhaspatir dadhātu ॥

ऋग्वेद का यह स्वस्ति-मन्त्र इन्द्र, पूषा, तार्क्ष्य और बृहस्पति से हम सबके कल्याण की कामना करता है।

कल्याणभक्तिआध्यात्मिकता
27 अग॰ 2026
ऋग्वेद

तन्तुं तन्वन्रजसो भानुमन्विहि ज्योतिष्मतः पथो रक्ष धिया कृतान्। अनुल्बणं वयत जोगुवामपो मनुर्भव जनया दैव्यं जनम्॥

tantuṃ tanvan rajaso bhānum anv ihi jyotiṣmataḥ patho rakṣa dhiyā kṛtān । anulbaṇaṃ vayata joguvām apo manur bhava janayā daivyaṃ janam ॥

ऋग्वेद का यह मन्त्र बुद्धि से निर्मित ज्योतिर्मय मार्गों की रक्षा और सच्चा मनुष्य बनकर दैवी गुणों से युक्त जन के निर्माण का आह्वान करता है।

विद्याकर्तव्यचरित्रआध्यात्मिकता

प्रकृति पर और सुभाषित

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23 सित॰ 2026
चरक संहिता

हिताहितं सुखं दुःखमायुस्तस्य हिताहितम्। मानं च तच्च यत्रोक्तमायुर्वेदः स उच्यते॥

hitāhitaṃ sukhaṃ duḥkham āyus tasya hitāhitam । mānaṃ ca tac ca yatroktam āyurvedaḥ sa ucyate ॥

चरक संहिता आयुर्वेद को हित-अहित, सुख-दुःख, जीवन के अनुकूल-प्रतिकूल तत्त्वों और आयु के मान का ज्ञान बताती है।

स्वास्थ्यकल्याण
10 सित॰ 2026
ऋग्वेद

स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः। स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥

svasti na indro vṛddhaśravāḥ svasti naḥ pūṣā viśvavedāḥ । svasti nas tārkṣyo ariṣṭanemiḥ svasti no bṛhaspatir dadhātu ॥

ऋग्वेद का यह स्वस्ति-मन्त्र इन्द्र, पूषा, तार्क्ष्य और बृहस्पति से हम सबके कल्याण की कामना करता है।

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यजुर्वेद

शं नो वातः पवतां शं नस्तपतु सूर्यः। शं नः कनिक्रदद् देवः पर्जन्योऽभिवर्षतु॥

śaṃ no vātaḥ pavatāṃ śaṃ nas tapatu sūryaḥ । śaṃ naḥ kanikradad devaḥ parjanyo 'bhivarṣatu ॥

शुक्ल यजुर्वेद का यह मन्त्र वायु, सूर्य और वर्षा के देवता पर्जन्य से कल्याणकारी होने की प्रार्थना करता है।

कल्याणप्रकृति