सिंहासनगता नित्यं - माँ स्कन्दमाता की स्तुति

23 मार्च 2026

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदाऽस्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

siṁhāsanagatā nityaṁ padmāśritakaradvayā । śubhadā’stu sadā devī skandamātā yaśasvinī ॥

प्रधानमंत्री का संदेश

देवी स्कन्दमाता की करबद्ध प्रार्थना! मेरी कामना है कि अपने ममतामयी स्नेह और आशीर्वाद से वे सबका जीवन आलोकित करें।

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया का अर्थ

जो हमेशा सिंह पर विराजमान रहती हैं, जिनके दोनों हाथों में कमल का फूल है, ऐसी यशस्विनी देवी स्कन्दमाता सदैव हमें शुभ फल प्रदान करें।

शब्दार्थ

सिंहासनगताsiṁhāsanagatā

सिंहासन पर विराजमान

सिंह + आसन + √गम्

नित्यम्nityam

सदा

नित्य

पद्माश्रितकरद्वयाpadmāśritakaradvayā

दोनों हाथ कमल से सम्बद्ध

पद्म + आ + √श्रि + कर + द्वि

शुभदाśubhadā

शुभ देने वाली

√शुभ् + √दा

अस्तु सदाastu sadā

सदा हों

√अस्

देवीdevī

देवी

√दिव्

स्कन्दमाताskandamātā

स्कन्दमाता

स्कन्द + मातृ

यशस्विनीyaśasvinī

यशस्विनी

यशस्

व्याख्या

स्कन्दमाता स्कन्द की माता हैं, किन्तु यह संक्षिप्त श्लोक न बालक स्कन्द का चित्रण करता है और न सिंह-वाहन का। 'सिंहासनगता' का सामान्य अर्थ सिंहासन पर विराजमान है; संग्रहीत अर्थ प्रचलित मूर्ति-चित्र के अनुसार इसे सिंह पर विराजमान कहता है। अगला समास दोनों हाथों को कमल से जोड़ता है, पर उनकी सटीक मुद्रा नहीं बताता। 'शुभदा' और 'यशस्विनी' उनकी स्तुति कल्याण देने वाली और यशस्विनी देवी के रूप में करते हैं। गोद में स्कन्द, अतिरिक्त भुजाएँ और मुद्राएँ इस उद्धृत पाठ के बजाय व्यापक भक्ति-परम्परा के अंग हैं।

मूल पोस्ट

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नवदुर्गा स्तोत्रम् से और सुभाषित

स्रोत पृष्ठ देखें
27 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

siddhagandharvayakṣādyairasurairamarairapi । sevyamānā sadā bhūyāt siddhidā siddhidāyinī ॥

नवदुर्गा के नौवें स्वरूप माँ सिद्धिदात्री की स्तुति, जो सभी सिद्धियों और शक्तियों को प्रदान करने वाली हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता
26 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥

śvete vṛṣe samārūḍhā śvetāmbaradharā śuciḥ । mahāgaurī śubhaṁ dadyān mahādevapramodadā ॥

नवदुर्गा के आठवें स्वरूप माँ महागौरी की स्तुति, जो पवित्रता और शांति की प्रतीक हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता
25 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा। वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥

vāmapādollasallohalatākaṇṭakabhūṣaṇā । vardhanmūrdhadhvajā kṛṣṇā kālarātrirbhayaṅkarī ॥

नवदुर्गा स्तोत्र का यह श्लोक माँ कालरात्रि के भयंकर किंतु मंगलकारी स्वरूप का वर्णन करता है, जो अंधकार और भय का नाश करने वाली हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता

भक्ति पर और सुभाषित

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12 अक्टू॰ 2026
देवी महात्म्यम्

देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या। तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः॥

devyā yayā tatamidaṃ jagadātmaśaktyā niśśeṣadevagaṇaśaktisamūhamūrtyā । tāmambikāmakhiladevamaharṣipūjyāṃ bhaktyā natāḥ sma vidadhātu śubhāni sā naḥ ॥

देवी महात्म्यम् की यह प्रार्थना जगत् में व्याप्त और समस्त देवशक्तियों की स्वरूप माँ अम्बिका को नमन करके सबके लिए मंगल माँगती है।

भक्तिशक्तिकल्याण
29 सित॰ 2026
सुभाषितरत्नभाण्डागारम्

उद्यमः साहसं धैर्यं बुद्धिः शक्तिः पराक्रमः। षडेते यत्र वर्तन्ते तत्र दैवं सहायकृत्॥

udyamaḥ sāhasaṃ dhairyaṃ buddhiḥ śaktiḥ parākramaḥ । ṣaḍete yatra vartante tatra daivaṃ sahāyakṛt ॥

उद्यम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम से युक्त व्यक्ति को दैव का सहयोग भी प्राप्त होता है।

दृढ़तासाहसविद्याशक्ति
28 सित॰ 2026
चरक संहिता

सुखोपविष्टास्ते तत्र पुण्यां चक्रुः कथामिमाम्। धर्मार्थकाममोक्षाणामारोग्यं मूलमुत्तमम्॥

sukhopaviṣṭās te tatra puṇyāṃ cakruḥ kathām imām । dharmārthakāmamokṣāṇām ārogyaṃ mūlam uttamam ॥

चरक संहिता आरोग्य को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति का सर्वोत्तम आधार बताती है।

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