सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैर - माँ सिद्धिदात्री की स्तुति

27 मार्च 2026

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

siddhagandharvayakṣādyairasurairamarairapi । sevyamānā sadā bhūyāt siddhidā siddhidāyinī ॥

प्रधानमंत्री का संदेश

मां सिद्धिदात्री को नमन! देवी मां से कामना है कि वे अपने सभी उपासकों को लक्ष्य-सिद्धि का आशीर्वाद दें।

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि का अर्थ

सिद्धों, गंधर्वों, यक्षों, असुरों और देवताओं द्वारा भी सदा पूजित होने वाली, सिद्धियां प्रदान करने वाली, माता सिद्धिदात्री हमारा सदा कल्याण करें।

शब्दार्थ

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैःsiddhagandharvayakṣādyaiḥ

सिद्ध, गन्धर्व, यक्ष आदि से

सिद्ध + गन्धर्व + यक्ष + आदि

असुरैःasuraiḥ

असुरों से

असुर

अमरैःamaraiḥ

अमरों से

अ + √मृ

अपिapi

भी

सेव्यमानाsevyamānā

सेवित होती हुईं

√सेव्

सदा भूयात्sadā bhūyāt

सदा हों

√भू

सिद्धिदाsiddhidā

सिद्धि देने वाली

√सिध् + √दा

सिद्धिदायिनीsiddhidāyinī

सिद्धिदायिनी

√सिध् + √दा

व्याख्या

माँ सिद्धिदात्री नवरात्रि के नौवें दिन पूजी जाने वाली देवी दुर्गा का नौवां और अंतिम स्वरूप हैं। जैसा कि उनके नाम से स्पष्ट है, वे सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। मार्कंडेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व—ये आठ सिद्धियाँ माँ सिद्धिदात्री की कृपा से ही प्राप्त होती हैं। उनकी उपासना पूर्णता और परम शांति की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। प्रथम पंक्ति की सूची ही तर्क का कार्य करती है: सिद्ध, गन्धर्व और यक्ष, फिर असुर और अमर एक साथ। देव-असुर विभाजन के दोनों ओर के प्राणी उनकी सेवा करते हैं—अर्थात् वे इस संघर्ष के किसी एक पक्ष में नहीं, उससे ऊपर हैं। दूसरी पंक्ति उसी भाव को दो रूपों में दोहराती है, 'सिद्धिदा' और 'सिद्धिदायिनी'; स्तोत्र इसी पुनरुक्ति से प्रत्येक श्लोक को उस नाम पर समाप्त करता है जिसकी वह स्तुति कर रहा है।

मूल पोस्ट

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नवदुर्गा स्तोत्रम् से और सुभाषित

स्रोत पृष्ठ देखें
26 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥

śvete vṛṣe samārūḍhā śvetāmbaradharā śuciḥ । mahāgaurī śubhaṁ dadyān mahādevapramodadā ॥

नवदुर्गा के आठवें स्वरूप माँ महागौरी की स्तुति, जो पवित्रता और शांति की प्रतीक हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता
25 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा। वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥

vāmapādollasallohalatākaṇṭakabhūṣaṇā । vardhanmūrdhadhvajā kṛṣṇā kālarātrirbhayaṅkarī ॥

नवदुर्गा स्तोत्र का यह श्लोक माँ कालरात्रि के भयंकर किंतु मंगलकारी स्वरूप का वर्णन करता है, जो अंधकार और भय का नाश करने वाली हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता
24 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥

candrahāsojjvalakarā śārdūlavaravāhanā । kātyāyanī śubhaṁ dadyād devī dānavaghātinī ॥

चन्द्रहास खड्ग धारण करने वाली और सिंह पर सवार माँ कात्यायनी की वंदना, जो शुभ फल और शक्ति प्रदान करती हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता

भक्ति पर और सुभाषित

विषय पृष्ठ देखें
29 सित॰ 2026
सुभाषितरत्नभाण्डागारम्

उद्यमः साहसं धैर्यं बुद्धिः शक्तिः पराक्रमः। षडेते यत्र वर्तन्ते तत्र दैवं सहायकृत्॥

udyamaḥ sāhasaṃ dhairyaṃ buddhiḥ śaktiḥ parākramaḥ । ṣaḍete yatra vartante tatra daivaṃ sahāyakṛt ॥

उद्यम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम से युक्त व्यक्ति को दैव का सहयोग भी प्राप्त होता है।

दृढ़तासाहसविद्याशक्ति
28 सित॰ 2026
चरक संहिता

सुखोपविष्टास्ते तत्र पुण्यां चक्रुः कथामिमाम्। धर्मार्थकाममोक्षाणामारोग्यं मूलमुत्तमम्॥

sukhopaviṣṭās te tatra puṇyāṃ cakruḥ kathām imām । dharmārthakāmamokṣāṇām ārogyaṃ mūlam uttamam ॥

चरक संहिता आरोग्य को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति का सर्वोत्तम आधार बताती है।

स्वास्थ्यधर्मसमृद्धिआध्यात्मिकता
17 सित॰ 2026
विश्वकर्माष्टकम्

अनादिरप्रमेयश्च अरूपश्च जयाजयः। लोकरूपो जगन्नाथः विश्वकर्मन्नमो नमः॥

anādir aprameyaś ca arūpaś ca jayājayaḥ । lokarūpo jagannāthaḥ viśvakarman namo namaḥ ॥

विश्वकर्माष्टकम् का यह श्लोक अनादि, अप्रमेय और अरूप प्रभु को नमन करता है, जिनका स्वरूप सम्पूर्ण जगत है।

भक्तिआध्यात्मिकता