श्वेते वृषे समारूढा - माँ महागौरी की स्तुति

26 मार्च 2026

श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥

śvete vṛṣe samārūḍhā śvetāmbaradharā śuciḥ । mahāgaurī śubhaṁ dadyān mahādevapramodadā ॥

प्रधानमंत्री का संदेश

मां महागौरी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम! उनकी दिव्य आभा हर किसी के जीवन में सुख-समृद्धि और आरोग्य लेकर आए।

श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा का अर्थ

श्वेत वृषभ पर सवार, सफेद वस्त्र धारण करने वाली, अत्यंत पवित्र और महादेव को प्रसन्न करने वाली माँ महागौरी मुझे शुभ आशीर्वाद प्रदान करें।

शब्दार्थ

श्वेते वृषेśvete vṛṣe

श्वेत वृषभ पर

श्वेत + वृष

समारूढाsamārūḍhā

आरूढ़

सम् + आ + √रुह्

श्वेताम्बरधराśvetāmbaradharā

श्वेत वस्त्र धारण किए

श्वेत + अम्बर + √धृ

शुचिःśuciḥ

पवित्र

√शुच्

महागौरीmahāgaurī

महागौरी

महा + गौर

शुभम् दद्यात्śubhaṁ dadyāt

शुभ प्रदान करें

√शुभ् + √दा

महादेवप्रमोददाmahādevapramodadā

महादेव को आनन्द देने वाली

महादेव + प्र + √मुद् + √दा

व्याख्या

यह ध्यान श्लोक नवदुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी को श्वेत वृषभ पर आरूढ़, श्वेत वस्त्रधारिणी और पवित्र बताता है। श्वेतता वृषभ और वस्त्र के लिए कही गई है, जबकि 'शुचिः' उससे सम्बद्ध पर भिन्न गुण, पवित्रता, जोड़ता है। श्लोक में त्रिशूल, डमरू, हस्तमुद्राएँ, रक्षा या वरदान-मुद्रा का उल्लेख नहीं है; वे व्यापक मूर्तिशास्त्रीय परम्परा के अंग हैं। प्रार्थना केवल यह है कि महागौरी शुभ प्रदान करें। 'महादेवप्रमोददा' उन्हें महादेव को आनन्द देने वाली बताता है।

मूल पोस्ट

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नवदुर्गा स्तोत्रम् से और सुभाषित

स्रोत पृष्ठ देखें
27 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

siddhagandharvayakṣādyairasurairamarairapi । sevyamānā sadā bhūyāt siddhidā siddhidāyinī ॥

नवदुर्गा के नौवें स्वरूप माँ सिद्धिदात्री की स्तुति, जो सभी सिद्धियों और शक्तियों को प्रदान करने वाली हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता
25 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा। वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥

vāmapādollasallohalatākaṇṭakabhūṣaṇā । vardhanmūrdhadhvajā kṛṣṇā kālarātrirbhayaṅkarī ॥

नवदुर्गा स्तोत्र का यह श्लोक माँ कालरात्रि के भयंकर किंतु मंगलकारी स्वरूप का वर्णन करता है, जो अंधकार और भय का नाश करने वाली हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता
24 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥

candrahāsojjvalakarā śārdūlavaravāhanā । kātyāyanī śubhaṁ dadyād devī dānavaghātinī ॥

चन्द्रहास खड्ग धारण करने वाली और सिंह पर सवार माँ कात्यायनी की वंदना, जो शुभ फल और शक्ति प्रदान करती हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता

भक्ति पर और सुभाषित

विषय पृष्ठ देखें
29 सित॰ 2026
सुभाषितरत्नभाण्डागारम्

उद्यमः साहसं धैर्यं बुद्धिः शक्तिः पराक्रमः। षडेते यत्र वर्तन्ते तत्र दैवं सहायकृत्॥

udyamaḥ sāhasaṃ dhairyaṃ buddhiḥ śaktiḥ parākramaḥ । ṣaḍete yatra vartante tatra daivaṃ sahāyakṛt ॥

उद्यम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम से युक्त व्यक्ति को दैव का सहयोग भी प्राप्त होता है।

दृढ़तासाहसविद्याशक्ति
28 सित॰ 2026
चरक संहिता

सुखोपविष्टास्ते तत्र पुण्यां चक्रुः कथामिमाम्। धर्मार्थकाममोक्षाणामारोग्यं मूलमुत्तमम्॥

sukhopaviṣṭās te tatra puṇyāṃ cakruḥ kathām imām । dharmārthakāmamokṣāṇām ārogyaṃ mūlam uttamam ॥

चरक संहिता आरोग्य को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति का सर्वोत्तम आधार बताती है।

स्वास्थ्यधर्मसमृद्धिआध्यात्मिकता
17 सित॰ 2026
विश्वकर्माष्टकम्

अनादिरप्रमेयश्च अरूपश्च जयाजयः। लोकरूपो जगन्नाथः विश्वकर्मन्नमो नमः॥

anādir aprameyaś ca arūpaś ca jayājayaḥ । lokarūpo jagannāthaḥ viśvakarman namo namaḥ ॥

विश्वकर्माष्टकम् का यह श्लोक अनादि, अप्रमेय और अरूप प्रभु को नमन करता है, जिनका स्वरूप सम्पूर्ण जगत है।

भक्तिआध्यात्मिकता