सुरासम्पूर्णकलशं - माँ कूष्माण्डा की कृपा

22 मार्च 2026

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदाऽस्तु मे॥

surāsampūrṇakalaśaṃ rudhirāplutameva ca । dadhānā hastapadmābhyāṃ kūṣmāṇḍā śubhadā'stu me ॥

प्रधानमंत्री का संदेश

अदम्य साहस और आध्यात्मिक शक्ति की प्रतीक मां कूष्मांडा का चरण-वंदन! उनकी दिव्य ऊर्जा से हर हृदय में नवचेतना जागृत हो।

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च का अर्थ

अपने पवित्र हाथों में रक्त और सुरा से भरे कलश धारण करने वाली माता कूष्मांडा मुझे आशीर्वाद दें व मेरे लिए कल्याणकारी हों।

शब्दार्थ

सुरासम्पूर्णकलशम्surāsampūrṇakalaśam

सुरा से भरा कलश

सुरा + सम् + √पॄ + कलश

रुधिराप्लुतम्rudhirāplutam

रुधिर से आप्लुत

रुधिर + आ + √प्लु

एव चeva ca

और

दधानाdadhānā

धारण किए हुए

√धा

हस्तपद्माभ्याम्hastapadmābhyām

कमल-सदृश दोनों हाथों में

हस्त + पद्म

कूष्माण्डाkūṣmāṇḍā

कूष्माण्डा

शुभदा अस्तु मेśubhadāstu me

मुझे शुभ देने वाली हों

√शुभ् + √दा

व्याख्या

यह ध्यान श्लोक नवदुर्गा के चौथे स्वरूप माँ कूष्माण्डा का मंगलमय और उग्र, दोनों प्रकार का चित्र प्रस्तुत करता है। संस्कृत में उनके कमल-समान हाथों में सुरा से पूर्ण और रक्त से लाल हुआ कलश वर्णित है। यह बिंब तांत्रिक तथा वीर प्रतीक-जगत से आता है, जहाँ देवी उन शक्तियों को धारण, रूपांतरित और वश में करती हैं जिन्हें सामान्य जीवन भयावह या अशुद्ध मानता है। भक्ति-परंपरा की व्याख्याएँ इस पात्र को प्रायः अमृत या जीवन-ऊर्जा के रूप में सहज बनाकर देवी की सृजन और पोषण शक्ति पर बल देती हैं। वही व्याख्या संग्रहीत अर्थ को स्पष्ट करती है, जबकि शाब्दिक पाठ उनके वरदायी रूप के साथ उनके दुर्जेय स्वरूप को भी सुरक्षित रखता है।

मूल पोस्ट

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नवदुर्गा स्तोत्रम् से और सुभाषित

स्रोत पृष्ठ देखें
27 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

siddhagandharvayakṣādyairasurairamarairapi । sevyamānā sadā bhūyāt siddhidā siddhidāyinī ॥

नवदुर्गा के नौवें स्वरूप माँ सिद्धिदात्री की स्तुति, जो सभी सिद्धियों और शक्तियों को प्रदान करने वाली हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता
26 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥

śvete vṛṣe samārūḍhā śvetāmbaradharā śuciḥ । mahāgaurī śubhaṁ dadyān mahādevapramodadā ॥

नवदुर्गा के आठवें स्वरूप माँ महागौरी की स्तुति, जो पवित्रता और शांति की प्रतीक हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता
25 मार्च 2026
नवदुर्गा स्तोत्रम्

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा। वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥

vāmapādollasallohalatākaṇṭakabhūṣaṇā । vardhanmūrdhadhvajā kṛṣṇā kālarātrirbhayaṅkarī ॥

नवदुर्गा स्तोत्र का यह श्लोक माँ कालरात्रि के भयंकर किंतु मंगलकारी स्वरूप का वर्णन करता है, जो अंधकार और भय का नाश करने वाली हैं।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता

भक्ति पर और सुभाषित

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12 अक्टू॰ 2026
देवी महात्म्यम्

देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या। तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः॥

devyā yayā tatamidaṃ jagadātmaśaktyā niśśeṣadevagaṇaśaktisamūhamūrtyā । tāmambikāmakhiladevamaharṣipūjyāṃ bhaktyā natāḥ sma vidadhātu śubhāni sā naḥ ॥

देवी महात्म्यम् की यह प्रार्थना जगत् में व्याप्त और समस्त देवशक्तियों की स्वरूप माँ अम्बिका को नमन करके सबके लिए मंगल माँगती है।

भक्तिशक्तिकल्याण
29 सित॰ 2026
सुभाषितरत्नभाण्डागारम्

उद्यमः साहसं धैर्यं बुद्धिः शक्तिः पराक्रमः। षडेते यत्र वर्तन्ते तत्र दैवं सहायकृत्॥

udyamaḥ sāhasaṃ dhairyaṃ buddhiḥ śaktiḥ parākramaḥ । ṣaḍete yatra vartante tatra daivaṃ sahāyakṛt ॥

उद्यम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम से युक्त व्यक्ति को दैव का सहयोग भी प्राप्त होता है।

दृढ़तासाहसविद्याशक्ति
28 सित॰ 2026
चरक संहिता

सुखोपविष्टास्ते तत्र पुण्यां चक्रुः कथामिमाम्। धर्मार्थकाममोक्षाणामारोग्यं मूलमुत्तमम्॥

sukhopaviṣṭās te tatra puṇyāṃ cakruḥ kathām imām । dharmārthakāmamokṣāṇām ārogyaṃ mūlam uttamam ॥

चरक संहिता आरोग्य को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति का सर्वोत्तम आधार बताती है।

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