खद्योतो द्योतते तावद् - बड़े प्रकाश के सामने

22 अक्टू॰ 2026

खद्योतो द्योतते तावद् यावन्नोदयते शशी। उदिते तु सहस्रांशौ न खद्योतो न चन्द्रमाः॥

khadyoto dyotate tāvad yāvannodayate śaśī। udite tu sahasrāṃśau na khadyoto na candramāḥ॥

खद्योतो द्योतते तावद् यावन्नोदयते का अर्थ

आकाश में चमकता हुआ जुगनू चन्द्रमा के अभाव में ही कुछ समय तक चमकता दिखाई देता है। लेकिन सूर्य के उदित होते ही न जुगनू का प्रकाश दिखाई देता है और न ही चन्द्रमा का। इसी प्रकार, छोटी उपलब्धि का प्रभाव तभी तक रहता है, जब तक उससे श्रेष्ठ उपलब्धि सामने नहीं आती। इसलिए अहंकार के बजाय विनम्रता और निरन्तर सीखने का भाव रखना चाहिए।

अनुवाद टिप्पणी: यह अनुवाद प्रधानमंत्री के X पोस्ट के वीडियो से यथावत् लिया गया है। उपलब्धियों, विनम्रता और निरन्तर सीखने की सलाह इसकी व्याख्या है; संस्कृत में जुगनू, चन्द्रमा और उगते सूर्य का वर्णन है।

शब्दार्थ

खद्योतोkhadyoto

जुगनू; खद्योतः का सन्धिरूप

द्योततेdyotate

चमकता है

तावद्tāvad

तब तक

यावन्नोदयतेyāvannodayate

जब तक उदित नहीं होता; यावत् + न + उदयते

शशीśaśī

चन्द्रमा

उदितेudite

उदित होने पर

तुtu

परन्तु

सहस्रांशौsahasrāṃśau

हजार किरणों वाला सूर्य; उदिते के साथ, सूर्य के उदित होने पर

नna

न

खद्योतोkhadyoto

जुगनू; खद्योतः का सन्धिरूप

नna

न

चन्द्रमाःcandramāḥ

चन्द्रमा

व्याख्या

श्लोक जुगनू, चन्द्रमा और सूर्य को उनके बढ़ते प्रकाश के क्रम में रखता है। तावद् और यावत् का सम्बन्ध बताता है कि जुगनू की चमक का प्रभाव चन्द्रमा के उदय न होने तक है। सहस्रांशु अर्थात् हजार किरणों वाला सूर्य उदित होता है तो दोनों छोटे प्रकाश उसके सामने फीके पड़ जाते हैं। अन्योक्ति के रूप में यह दृश्य मनुष्य की उस प्रतिष्ठा का भी संकेत दे सकता है जो आसपास उपस्थित लोगों से तुलना पर निर्भर करती है। दैनिक जीवन में इससे अपनी क्षमता का आकलन व्यापक दृष्टि से करने की प्रेरणा मिलती है, क्योंकि अधिक कुशल व्यक्ति से परिचय होने पर अपनी योग्यता के बारे में हमारी धारणा बदल सकती है।

शार्ङ्गधर पद्धति से और सुभाषित

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शार्ङ्गधर पद्धति

प्रथमवयसि पीतं तोयमल्पं स्मरन्तः शिरसि निहितभारा नारिकेला नराणाम्। ददति जलमनल्पास्वादमाजीवितान्तं न हि कृतमुपकारं साधवो विस्मरन्ति॥

prathamavayasi pītaṃ toyamalpaṃ smarantaḥ śirasi nihitabhārā nārikelā narāṇām । dadati jalamanalpāsvādamājīvitāntaṃ na hi kṛtamupakāraṃ sādhavo vismaranti ॥

नारियल का वृक्ष बचपन में मिले थोड़े जल के बदले जीवन भर मधुर जल देता है। यही सज्जनों की कृतज्ञता का उदाहरण है।

चरित्रनैतिकताप्रकृति
हितोपदेश

शुचित्वं त्यागिता शौर्यं सामान्यं सुखदुःखयोः। दाक्षिण्यं चानुरक्तिश्च सत्यता च सुहृद्गुणाः॥

śucitvaṃ tyāgitā śauryaṃ sāmānyaṃ sukhaduḥkhayoḥ । dākṣiṇyaṃ cānuraktiśca satyatā ca suhṛdguṇāḥ ॥

निर्मलता, त्याग, साहस, सुख-दुःख में समान भाव, शिष्टता, अनुराग और सत्यता सच्चे मित्र के गुण हैं।

चरित्रनैतिकतासाहस
सुभाषितरत्नभाण्डागारम्

उद्यमः साहसं धैर्यं बुद्धिः शक्तिः पराक्रमः। षडेते यत्र वर्तन्ते तत्र दैवं सहायकृत्॥

udyamaḥ sāhasaṃ dhairyaṃ buddhiḥ śaktiḥ parākramaḥ । ṣaḍete yatra vartante tatra daivaṃ sahāyakṛt ॥

उद्यम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम से युक्त व्यक्ति को दैव का सहयोग भी प्राप्त होता है।

दृढ़तासाहसविद्याशक्ति

प्रकृति पर और सुभाषित

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शार्ङ्गधर पद्धति

प्रथमवयसि पीतं तोयमल्पं स्मरन्तः शिरसि निहितभारा नारिकेला नराणाम्। ददति जलमनल्पास्वादमाजीवितान्तं न हि कृतमुपकारं साधवो विस्मरन्ति॥

prathamavayasi pītaṃ toyamalpaṃ smarantaḥ śirasi nihitabhārā nārikelā narāṇām । dadati jalamanalpāsvādamājīvitāntaṃ na hi kṛtamupakāraṃ sādhavo vismaranti ॥

नारियल का वृक्ष बचपन में मिले थोड़े जल के बदले जीवन भर मधुर जल देता है। यही सज्जनों की कृतज्ञता का उदाहरण है।

चरित्रनैतिकताप्रकृति
देवी महात्म्यम्

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

yā devī sarvabhūteṣu śakti-rūpeṇa saṃsthitā । namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ ॥

देवी महात्म्यम् की यह प्रार्थना सभी प्राणियों में शक्ति के रूप में विद्यमान देवी को बारंबार नमन करती है।

शक्तिभक्तिआध्यात्मिकता
देवी महात्म्यम्

त्वं वैष्णवी शक्तिरनन्तवीर्या विश्वस्य बीजं परमासि माया। सम्मोहितं देवि समस्तमेतत् त्वं वै प्रसन्ना भुवि मुक्तिहेतुः॥

tvaṃ vaiṣṇavī śaktiranantavīryā viśvasya bījaṃ paramāsi māyā । sammohitaṃ devi samastametat tvaṃ vai prasannā bhuvi muktihetuḥ ॥

देवी महात्म्यम् का यह श्लोक देवी को विश्व का मूल कारण और अपनी कृपा से मुक्ति देने वाली शक्ति के रूप में स्तुति करता है।

भक्तिशक्तिआध्यात्मिकता