अन्योक्तिमुक्तावली से सुभाषित
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नवीनतम अद्यतन: 22 अक्टू॰ 2026
शार्ङ्गधर पद्धति
खद्योतो द्योतते तावद् यावन्नोदयते शशी। उदिते तु सहस्रांशौ न खद्योतो न चन्द्रमाः॥
khadyoto dyotate tāvad yāvannodayate śaśī। udite tu sahasrāṃśau na khadyoto na candramāḥ॥
जुगनू चन्द्रमा के उदय तक चमकता है; सूर्य के उदय पर दोनों का प्रकाश फीका पड़ जाता है। श्लोक अधिक तेज के सामने छोटे प्रकाश की स्थिति दिखाता है।
प्रकृतिशक्ति
शार्ङ्गधर पद्धति
प्रथमवयसि पीतं तोयमल्पं स्मरन्तः शिरसि निहितभारा नारिकेला नराणाम्। ददति जलमनल्पास्वादमाजीवितान्तं न हि कृतमुपकारं साधवो विस्मरन्ति॥
prathamavayasi pītaṃ toyamalpaṃ smarantaḥ śirasi nihitabhārā nārikelā narāṇām । dadati jalamanalpāsvādamājīvitāntaṃ na hi kṛtamupakāraṃ sādhavo vismaranti ॥
नारियल का वृक्ष बचपन में मिले थोड़े जल के बदले जीवन भर मधुर जल देता है। यही सज्जनों की कृतज्ञता का उदाहरण है।
चरित्रनैतिकताप्रकृति