शार्ङ्गधर पद्धति से सुभाषित

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यह स्रोत 6 विषयों में फैले 5 सुभाषित प्रदान करता है।

नवीनतम अद्यतन: 12 अग॰ 2026

संबंधित मार्गदर्शिकाएँ और श्लोक चयन

सुभाषित क्या है?
सुभाषित सुन्दर और सार्थक ढंग से कही गई स्मरणीय संस्कृत उक्ति है—प्रायः ऐसा स्वतंत्र पद्य जो ज्ञान, सलाह, अनुभव या किसी पूर्ण विचार को व्यक्त करता है।
श्लोक और सुभाषित में क्या अंतर है?
श्लोक मुख्यतः संस्कृत पद्य या छन्दबद्ध स्तोत्र-पंक्ति है; सुभाषित सुन्दर और स्मरणीय ढंग से कही गई सार्थक उक्ति है। अनेक सुभाषित श्लोक होते हैं, किंतु दोनों शब्द समान नहीं हैं।
अर्थ सहित संस्कृत श्लोक
संस्कृत ज्ञान का विचारपूर्वक चुना गया परिचय—देवनागरी पाठ, IAST लिप्यंतरण, हिन्दी-अंग्रेज़ी अर्थ, स्रोत और विस्तृत व्याख्या सहित।
जीवन पर संस्कृत श्लोक
विवेकपूर्ण कर्म, सत्य, चरित्र, संबंध, आत्मसंयम और श्रेष्ठ जीवन को आकार देने वाले दैनिक निर्णयों पर संस्कृत श्लोक।
बच्चों के लिए संस्कृत श्लोक
बच्चों के लिए छोटे और सरल संस्कृत श्लोक—स्पष्ट चित्र और सरल भाव वाले, देवनागरी पाठ, लिप्यंतरण तथा हिन्दी-अंग्रेज़ी अर्थ सहित।
12 अग॰ 2026
विदुर नीति

चक्षुषा मनसा वाचा कर्मणा च चतुर्विधम्। प्रसादयति यो लोकं तं लोकोऽनुप्रसीदति॥

cakṣuṣā manasā vācā karmaṇā ca caturvidham । prasādayati yo lokaṁ taṁ loko'nuprasīdati ॥

विदुर नीति सिखाती है कि जो व्यक्ति दृष्टि, विचार, वाणी और कर्म से लोगों को प्रसन्न करता है, उसे लोगों का सद्भाव भी प्राप्त होता है।

सामंजस्यकर्म
6 जुल॰ 2026
नीतिशतकम्

जयन्ति ते सुकृतिनो रससिद्धाः कवीश्वराः। नास्ति येषां यशःकाये जरामरणजं भयम्॥

jayanti te sukṛtino rasasiddhāḥ kavīśvarāḥ । nāsti yeṣāṃ yaśaḥkāye jarāmaraṇajaṃ bhayam ॥

भर्तृहरि के नीतिशतकम् का यह श्लोक रससिद्ध कवीश्वरों के उस यश की बात करता है जो जरा और मृत्यु से परे है।

विद्यासम्मान
10 जून 2026
कामन्दकीय नीतिसार

सदानुरक्तप्रकृतिः प्रजापालनतत्परः। विनीतात्मा हि नृपतिर्भूयसी श्रियमश्नुते॥

sadānuraktaprakṛtiḥ prajāpālanatatparaḥ । vinītātmā hi nṛpatir bhūyasī śriyam aśnute ॥

यह सुभाषित बताता है कि जनता के कल्याण, सुरक्षा और उन्नति के लिए विनम्र भाव से समर्पित नेतृत्व ही यश और समृद्धि पाता है।

सुशासननेतृत्वकर्तव्यनैतिकता
14 अप्रैल 2026
पञ्चतन्त्र

अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥

ayaṁ nijaḥ paro veti gaṇanā laghucetasām । udāracaritānāṁ tu vasudhaiva kuṭumbakam ॥

संकुचित मनुष्य लोगों को अपना और पराया मानता है, जबकि उदार हृदय वाला पूरे विश्व को एक परिवार समझता है।

एकताज्ञाननैतिकतासामंजस्य
31 मार्च 2026
पञ्चतन्त्र

श्रूयतां धर्मसर्वस्वं श्रुत्वा चैवावधार्यताम्। आत्मनः प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत्॥

śrūyatāṃ dharmasarvasvaṃ śrutvā caivāvadhāryatām । ātmanaḥ pratikūlāni pareṣāṃ na samācaret ॥

यह सुभाषित धर्म के समस्त सार को एक सुवर्ण नियम में समेटता है — जो व्यवहार अपने लिए अनुचित लगे, वह दूसरों के साथ कभी न करें।

नैतिकताधर्मचरित्र