आत्मज्ञान पर सुभाषित

15 सुभाषित इस विषय पर

यह विषय 6 स्रोतों से आए 15 सुभाषितों को एक साथ लाता है।

नवीनतम अद्यतन: 4 अग॰ 2026

4 अग॰ 2026
भगवद् गीता

न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते। तत्स्वयं योगसंसिद्धः कालेनात्मनि विन्दति॥

na hi jñānena sadṛśaṁ pavitram iha vidyate । tat svayaṁ yogasaṁsiddhaḥ kālenātmani vindati ॥

ज्ञान से बढ़कर कोई पवित्र करने वाला नहीं; योग से सिद्ध साधक उसे समय आने पर अपने भीतर पाता है।

विद्यायोगआत्मज्ञान
3 जुल॰ 2026
अमरनाथाष्टकम्

वाग्बुद्धिचित्तकरणैश्च तपोभिरुग्रैः शक्यं समाकलयितुं न यदीयरूपम्। तं भक्तिभावसुलभं शरणं नतानां नित्यं भजाम्यमरनाथमहं दयालुम्॥

vāgbuddhicittakaraṇaiś ca tapobhir ugraiḥ śakyaṃ samākalayituṃ na yadīyarūpam । taṃ bhaktibhāvasulabhaṃ śaraṇaṃ natānāṃ nityaṃ bhajāmy amaranātham ahaṃ dayālum ॥

भगवान अमरनाथ की यह भक्तिपूर्ण वंदना बताती है कि वे वाणी, बुद्धि, मन, इन्द्रियों और तप से परे हैं, पर भक्तिभाव से सहज प्राप्त होते हैं।

भक्तिआध्यात्मिकताविनम्रताआत्मज्ञान
1 जुल॰ 2026
कठोपनिषद्

विज्ञानसारथिर्यस्तु मनः प्रग्रहवान्नरः। सोऽध्वनः पारमाप्नोति तद्विष्णोः परमं पदम्॥

vijñānasārathir yastu manaḥ pragrahavān naraḥ । so'dhvanaḥ pāram āpnoti tad viṣṇoḥ paramaṁ padam ॥

कठोपनिषद् का यह मंत्र बताता है कि विवेकपूर्ण ज्ञान जब सारथि बनता है और मन संयमित रहता है, तब साधक जीवन-पथ पार कर परम लक्ष्य तक पहुँचता है।

विद्याअनुशासनआत्मज्ञानसफलता
25 जून 2026
अष्टावक्र गीता

स्वातन्त्र्यात् सुखमाप्नोति स्वातन्त्र्याल्लभते परम्। स्वातन्त्र्यान्निर्वृतिं गच्छेत् स्वातन्त्र्यात् परमं पदम्॥

svātantryāt sukham āpnoti svātantryāl labhate param । svātantryān nirvṛtiṃ gacchet svātantryāt paramaṃ padam ॥

अष्टावक्र गीता स्वतंत्रता को सुख, शांति, आत्मबोध और परम अवस्था की प्राप्ति का मार्ग बताती है।

स्वतंत्रताशांतिआत्मज्ञानआध्यात्मिकता
26 मई 2026
दर्शनोपनिषद्

आत्मा शुद्धः सदा नित्यः सुखरूपः स्वयम्प्रभः। अज्ञानान्मलिनो भाति ज्ञानाच्छुद्धो भवत्ययम्॥

ātmā śuddhaḥ sadā nityaḥ sukharūpaḥ svayaṃprabhaḥ । ajñānān malino bhāti jñānāc chuddho bhavaty ayam ॥

दर्शनोपनिषद् का यह मंत्र आत्मा के नित्य, शुद्ध और स्वयंप्रकाश स्वरूप को बताते हुए अज्ञान के आवरण को ज्ञान से दूर करने की प्रेरणा देता है।

आत्मज्ञानविद्या
1 मई 2026

नान्तर्बहिश्च लोकेषु त्वात्मानं दृष्टवान् क्वचित्। आष्टाङ्गिकेन मार्गेण परमां शान्तिमाययौ॥

nāntar bahiśca lokeṣu tvātmānaṁ dṛṣṭavān kvacit । āṣṭāṅgikena mārgeṇa paramāṁ śāntim āyayau ॥

बौद्ध दृष्टि वाला यह संस्कृत श्लोक स्थायी आत्मा के अभाव की समझ, अष्टांगिक मार्ग और परम शांति की प्राप्ति को जोड़ता है।

शांतिआत्मज्ञानज्ञानआध्यात्मिकताधर्म
9 अप्रैल 2026

अन्तःस्थमेव यज्ज्ञानं ज्ञानादपि च यत्परम्। तदेव सर्वसंसारसारं सद्भिरुपास्यते॥

antaḥsthameva yajjñānaṁ jñānādapi ca yatparam । tadeva sarvasaṁsārasāraṁ sadbhirupāsyate ॥

यह श्लोक उस आंतरिक ज्ञान का वर्णन करता है जो बाहरी शिक्षा से परे है और जिसे संपूर्ण संसार का वास्तविक सार माना गया है।

आत्मज्ञानविद्याआध्यात्मिकताज्ञान
8 अप्रैल 2026
विदुर नीति

आत्मज्ञानं समारम्भस्तितिक्षा धर्मनित्यता। यमर्था नापकर्षन्ति स वै पण्डित उच्यते॥

ātmajñānaṁ samārambhas titikṣā dharmanityatā । yam arthā nāpakarṣanti sa vai paṇḍita ucyate ॥

विदुर नीति का यह श्लोक एक बुद्धिमान व्यक्ति के गुणों का वर्णन करता है: आत्मज्ञान, दृढ़ निश्चय, सहनशीलता और प्रलोभनों से ऊपर उठकर जनकल्याण के मार्ग पर अडिग रहना।

ज्ञानआत्मज्ञानचरित्रधर्मदृढ़ता
20 फ़र॰ 2026
ईशावास्योपनिषद्

पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥

pūrṇam adaḥ pūrṇam idaṃ pūrṇāt pūrṇam udacyate । pūrṇasya pūrṇam ādāya pūrṇam evāvaśiṣyate ॥

ईशावास्य उपनिषद का यह मंत्र पूर्णता के सिद्धांत को समझाता है। आधुनिक संदर्भ में, यह दर्शाता है कि ज्ञान बाँटने से कम नहीं होता, बल्कि नई संभावनाओं को जन्म देता है।

आध्यात्मिकताआत्मज्ञान
18 फ़र॰ 2026
भगवद् गीता

ज्ञानं तेऽहं सविज्ञानमिदं वक्ष्याम्यशेषतः। यज्ज्ञात्वा नेह भूयोऽन्यज्ज्ञातव्यमवशिष्यते॥

jñānaṃ te'haṃ savijñānam idaṃ vakṣyāmyaśeṣataḥ । yajjñātvā neha bhūyo'nyajjñātavyamavaśiṣyate ॥

श्रीकृष्ण ऐसे ज्ञान और अनुभूत बोध का उपदेश देते हैं, जिसके बाद साधक के लिए जानने योग्य कोई आवश्यक सत्य शेष नहीं रहता।

विद्याआत्मज्ञानज्ञानआध्यात्मिकता
12 फ़र॰ 2026
भगवद् गीता

ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम्। छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित्॥

ūrdhvamūlam adhaḥśākham aśvatthaṃ prāhur avyayam । chandāṃsi yasya parṇāni yas taṃ veda sa vedavit ॥

संसाररूपी अश्वत्थ वृक्ष और वेदों के ज्ञान को समझाता यह गीता का श्लोक अध्यात्म की गहरी समझ प्रदान करता है।

आध्यात्मिकताआत्मज्ञानविद्याज्ञान
13 जन॰ 2026
कठोपनिषद्

उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत। क्षुरस्य धारा निशिता दुरत्यया दुर्गं पथस्तत्कवयो वदन्ति॥

uttiṣṭhata jāgrata prāpya varān nibodhata । kṣurasya dhārā niśitā duratyayā durgaṁ pathas tat kavayo vadanti ॥

कठोपनिषद् साधक को उठने, जागने, ज्ञानी गुरु के पास जाने और आत्मबोध के सूक्ष्म तथा कठिन मार्ग पर चलने का आह्वान करता है।

आत्मज्ञानविद्यामार्गदर्शनदृढ़ता
9 जन॰ 2026
स्कन्द पुराण

आदिनाथेन शर्वेण सर्वप्राणिहिताय वै। आद्यतत्त्वान्यथानीयं क्षेत्रमेतन्महाप्रभम्। प्रभासितं महादेवि यत्र सिद्ध्यन्ति मानवाः॥

ādināthena śarveṇa sarvaprāṇihitāya vai । ādyatattvānyathānīyaṁ kṣetrametanmahāprabham । prabhāsitaṁ mahādevi yatra siddhyanti mānavāḥ ॥

भगवान शिव के आदिनाथ रूप द्वारा जन-कल्याण हेतु प्रकट किया गया प्रभास क्षेत्र, जहाँ दिव्यता और सिद्धि का वास है।

आध्यात्मिकताआत्मज्ञानधर्मभक्ति
15 दिस॰ 2025
मनुस्मृति

सर्वं परवशं दुःखं सर्वमात्मवशं सुखम्। एतद् विद्यात् समासेन लक्षणं सुखदुःखयोः॥

sarvaṁ paravaśaṁ duḥkhaṁ sarvam ātmavaśaṁ sukham । etad vidyāt samāsena lakṣaṇaṁ sukha-duḥkhayoḥ ॥

पराधीनता सुख को दूसरों के हाथों में छोड़ देती है, जबकि आत्मवशता वह स्वतंत्रता और स्थिरता देती है जिससे कल्याण बढ़ता है।

आत्मज्ञानज्ञानस्वतंत्रताकल्याण
10 दिस॰ 2025
योगचूडामण्युपनिषद्

आसनेन रुजो हन्ति प्राणायामेन पातकम्। विकारं मानसं योगी प्रत्याहारेण सर्वदा॥ धारणाभिर्मनोधैर्यं याति चैतन्यमद्भुतम्। समाधौ मोक्षमाप्नोति त्यक्त्वा कर्म शुभाशुभम्॥

āsanena rujo hanti prāṇāyāmena pātakam । vikāraṁ mānasaṁ yogī pratyāhāreṇa sarvadā ॥ dhāraṇābhir mano dhairyaṁ yāti caitanyam adbhutam । samādhau mokṣam āpnoti tyaktvā karma śubhāśubham ॥

आसन, प्राणायाम और अनुशासित योगाभ्यास शरीर के रोग और अंतर्मन की अशुद्धि दूर कर साधक को गहन मुक्ति के लिए तैयार करते हैं।

योगस्वास्थ्यआत्मज्ञानअनुशासन