अमरनाथाष्टकम् से सुभाषित

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नवीनतम अद्यतन: 3 जुल॰ 2026

3 जुल॰ 2026
अमरनाथाष्टकम्

वाग्बुद्धिचित्तकरणैश्च तपोभिरुग्रैः शक्यं समाकलयितुं न यदीयरूपम्। तं भक्तिभावसुलभं शरणं नतानां नित्यं भजाम्यमरनाथमहं दयालुम्॥

vāgbuddhicittakaraṇaiś ca tapobhir ugraiḥ śakyaṃ samākalayituṃ na yadīyarūpam । taṃ bhaktibhāvasulabhaṃ śaraṇaṃ natānāṃ nityaṃ bhajāmy amaranātham ahaṃ dayālum ॥

भगवान अमरनाथ की यह भक्तिपूर्ण वंदना बताती है कि वे वाणी, बुद्धि, मन, इन्द्रियों और तप से परे हैं, पर भक्तिभाव से सहज प्राप्त होते हैं।

भक्तिआध्यात्मिकताविनम्रताआत्मज्ञान