सामर्थ्य पर सुभाषित

16 सुभाषित इस विषय पर

यह विषय 6 स्रोतों से आए 16 सुभाषितों को एक साथ लाता है।

नवीनतम अद्यतन: 6 अक्टू॰ 2026

6 अक्टू॰ 2026
समराङ्गणसूत्रधार

ज्ञानवांश्च तथा वाग्मी कर्मस्वपि च निष्ठितः। एवं युक्तोऽपि न श्रेयान् यदि शीलविवर्जितः॥

jñānavāṃśca tathā vāgmī karmasvapi ca niṣṭhitaḥ । evaṃ yukto'pi na śreyān yadi śīlavivarjitaḥ ॥

ज्ञान, वाक्पटुता और कर्मकुशलता होने पर भी सदाचार से रहित व्यक्ति श्रेष्ठ नहीं होता।

विद्यासामर्थ्यचरित्रनैतिकता
3 सित॰ 2026
मालविकाग्निमित्रम्

पात्रविशेषे न्यस्तं गुणान्तरं व्रजति शिल्पमाधातुः। जलमिव समुद्रशुक्तौ मुक्ताफलतां पयोदस्य॥

pātraviśeṣe nyastaṃ guṇāntaraṃ vrajati śilpam ādhātuḥ । jalam iva samudraśuktau muktāphalatāṃ payodasya ॥

कालिदास का यह श्लोक योग्य पात्र में विकसित कौशल की तुलना सीप में मोती बनने वाले मेघजल से करता है।

सामर्थ्यशिक्षामार्गदर्शन
14 अग॰ 2026
महासुभाषितसंग्रह

उद्यमस्य प्रसादेन दृश्यन्ते विविधाः कलाः। कातरा एव जल्पन्ति यद् भाव्यं तद् भविष्यति॥

udyamasya prasādena dṛśyante vividhāḥ kalāḥ । kātarā eva jalpanti yad bhāvyaṁ tad bhaviṣyati ॥

महासुभाषितसंग्रह का यह श्लोक कहता है कि उद्यम से विविध कलाएँ प्रकट होती हैं, जबकि कातर लोग भाग्य की बात भर करते हैं।

दृढ़तासाहससामर्थ्य
22 जुल॰ 2026
चाणक्य-सार-संग्रह

परकार्येषु युक्तात्मा स्वकार्यं क्षिप्रसाधनम्। सुहृत्कार्येषु निर्वृत्तौ राजकार्येषु विक्रमः॥

parakāryeṣu yuktātmā svakāryaṁ kṣiprasādhanam । suhṛtkāryeṣu nirvṛttau rājakāryeṣu vikramaḥ ॥

चाणक्य-सार-संग्रह का यह श्लोक परकार्य में निष्ठा, स्वकार्य में तत्परता, मित्रों के कार्य में विश्वसनीयता और राजकार्य में पराक्रम को श्रेष्ठता का लक्षण मानता है।

कर्तव्यसामर्थ्यसुशासनसाहस
21 जुल॰ 2026
महासुभाषितसंग्रह

एकाग्रताथ सङ्कल्पः स्नायुवद् वर्द्धनक्षमौ। नित्याभ्यासप्रयोगाभ्याम् अधिकाधिकमृध्यतः॥

ekāgratātha saṅkalpaḥ snāyuvad varddhanakṣamau । nityābhyāsaprayogābhyām adhikādhikamṛdhyataḥ ॥

एकाग्रता और संकल्प स्थिर गुण नहीं, बल्कि नियमित अभ्यास और सार्थक प्रयोग से स्नायुओं की तरह निरंतर विकसित होने वाली क्षमताएँ हैं।

अनुशासनदृढ़तासामर्थ्य
15 जुल॰ 2026
महाभारत

धन्यानामुत्तमं दाक्ष्यं धनानामुत्तमं श्रुतम्। लाभानां श्रेय आरोग्यं सुखानां तुष्टिरुत्तमा॥

dhanyānām uttamaṃ dākṣyaṃ dhanānām uttamaṃ śrutam । lābhānāṃ śreya ārogyaṃ sukhānāṃ tuṣṭir uttamā ॥

महाभारत के यक्षप्रश्न का यह श्लोक बताता है कि कौशल, विद्या, आरोग्य और संतोष जीवन की श्रेष्ठ संपदाएँ हैं।

विद्यासामर्थ्यस्वास्थ्यकल्याणज्ञान
1 जून 2026
मालविकाग्निमित्रम्

श्लिष्टा क्रिया कस्यचिदात्मसंस्था सङ्क्रान्तिरन्यस्य विशेषयुक्ता। यस्योभयं साधु स शिक्षकाणां धुरि प्रतिष्ठापयितव्य एव॥

śliṣṭā kriyā kasyacid ātmasaṃsthā saṅkrāntir anyasya viśeṣayuktā । yasyobhayaṃ sādhu sa śikṣakāṇāṃ dhuri pratiṣṭhāpayitavya eva ॥

यह श्लोक उस दुर्लभ शिक्षक की प्रशंसा करता है जिसमें स्वयं निपुण होने की क्षमता और दूसरों तक ज्ञान-कौशल पहुँचाने की योग्यता, दोनों साथ हों।

शिक्षाविद्यामार्गदर्शनसामर्थ्य
15 मई 2026
विदुर नीति

यथाशक्ति चिकीर्षन्ति यथाशक्ति च कुर्वते। न किञ्चिदवमन्यन्ते नराः पण्डितबुद्धयः॥

yathāśakti cikīrṣanti yathāśakti ca kurvate । na kiñcidavamanyante narāḥ paṇḍitabuddhayaḥ ॥

विदुर नीति का यह श्लोक बताता है कि सच्ची बुद्धिमत्ता वही है जो यथाशक्ति लक्ष्य निर्धारित करे, अनुशासित कर्म करे और किसी भी बात को तुच्छ न समझे।

ज्ञानसामर्थ्यअनुशासनचरित्र
13 मई 2026
शिव पुराण

एवं परस्परापेक्षा शक्तिशक्तिमतोः स्थिता। न शिवेन विना शक्तिर्न शक्त्या विना शिवः॥

evaṁ parasparāpekṣā śaktiśaktimatoḥ sthitā । na śivena vinā śaktirna śaktyā vinā śivaḥ ॥

शक्ति और सामर्थ्य परस्पर पूरक हैं — जैसे शिव के बिना शक्ति नहीं और शक्ति के बिना शिव नहीं, वैसे ही सामर्थ्य और ऊर्जा के समन्वय से ही सृजन, प्रगति और सफलता संभव होती है।

शक्तिसामर्थ्यसामंजस्यआध्यात्मिकता
7 मई 2026
महाभारत

उदीर्णमनसो योधा वाहनानि च भारत। यस्यां भवन्ति सेनायां ध्रुवं तस्यां जयं वदेत्॥

udīrṇamanaso yodhā vāhanāni ca bhārata । yasyāṁ bhavanti senāyāṁ dhruvaṁ tasyāṁ jayaṁ vadet ॥

महाभारत से लिया गया यह श्लोक बताता है कि उत्साहित सैनिक और उत्कृष्ट संसाधन ही किसी सेना की जीत को सुनिश्चित करते हैं।

साहससामर्थ्यशक्तिसफलताअनुशासन
4 मई 2026
चाणक्य नीति

को हि भारः समर्थानां किं दूरं व्यवसायिनाम्। को विदेशः सुविद्यानां कः परः प्रियवादिनाम्॥

ko hi bhāraḥ samarthānāṁ kiṁ dūraṁ vyavasāyinām । ko videśaḥ suvidyānāṁ kaḥ paraḥ priyavādinām ॥

यह श्लोक बताता है कि कैसे कौशल, परिश्रम, शिक्षा और मधुर वाणी सफलता और अपनेपन की सभी बाधाओं को दूर कर देते हैं।

सामर्थ्यशिक्षादृढ़ताचरित्र
28 अप्रैल 2026
विदुर नीति

उत्थानं संयमो दाक्ष्यमप्रमादो धृतिः स्मृतिः। समीक्ष्य च समारम्भो विद्धिमूलं भवस्य तु॥

utthānaṁ saṁyamo dākṣyam apramādo dhṛtiḥ smṛtiḥ । samīkṣya ca samārambho viddhi mūlaṁ bhavasya tu ॥

विदुर नीति का यह श्लोक उन्नति के उन सात आधारभूत स्तंभों का वर्णन करता है जो व्यक्ति और राष्ट्र की समृद्धि के लिए अनिवार्य हैं।

अनुशासनसामर्थ्यसफलतादृढ़ताज्ञान
9 फ़र॰ 2026
चरक संहिता

विद्या वितर्को विज्ञानं स्मृतिस्तत्परता क्रिया। यस्यैते षड्गुणास्तस्य नासाध्यमतिवर्तते॥

vidyā vitarko vijñānaṃ smṛtis tatparatā kriyā । yasyaite ṣaḍguṇās tasya nāsādhyam ativartate ॥

विद्या, तर्क, विवेकपूर्ण ज्ञान, स्मृति, तत्परता और सक्रिय प्रयास मिलकर व्यक्ति को कठिन कार्य सिद्ध करने का व्यावहारिक सामर्थ्य देते हैं।

विद्यासामर्थ्यशिक्षाकर्म
3 फ़र॰ 2026
विदुर नीति

श्रीर्मङ्गलात् प्रभवति प्रागल्भ्यात् सम्प्रवर्धते। दाक्ष्यात् तु कुरुते मूलं संयमात् प्रतितिष्ठति॥

śrīrmaṅgalāt prabhavati prāgalbhyāt sampravardhate । dākṣyāt tu kurute mūlaṃ saṃyamāt pratitiṣṭhati ॥

विदुर नीति का यह श्लोक बताता है कि कैसे श्री (लक्ष्मी) शुभ कर्मों से जन्म लेती है और संयम से स्थिर होती है।

समृद्धिसामर्थ्यअनुशासनआत्मविश्वास
2 फ़र॰ 2026
सुभाषितावलि

नाम्भोधिरर्थितामेति सदाम्भोभिश्च पूर्यते। आत्मा तु पात्रतां नेयः पात्रमायान्ति सम्पदः॥

nāmbhodhir arthitām eti sadāmbhobhiśca pūryate । ātmā tu pātratāṁ neyaḥ pātramāyānti sampadaḥ ॥

यह श्लोक सिखाता है कि वास्तविक समृद्धि बाहरी याचना से नहीं, बल्कि आंतरिक योग्यता और पात्रता से प्राप्त होती है।

सामर्थ्यचरित्रसमृद्धि
17 दिस॰ 2025
हितोपदेश

अल्पानामपि वस्तूनां संहतिः कार्यसाधिका। तृणैर्गुणत्वमापन्नैर्बध्यन्ते मत्तदन्तिनः॥

alpanām api vastūnāṁ saṃhatiḥ kārya-sādhikā । tṛṇair guṇatvam āpannair badhyante mattadantinaḥ ॥

छोटी और दुर्बल वस्तुएँ भी सुव्यवस्थित रूप से जुड़कर महान कार्य कर सकती हैं, जैसे तृणों की रस्सी हाथी को बाँध लेती है।

एकतासामर्थ्यशक्ति