सम्मान पर सुभाषित

10 सुभाषित इस विषय पर

यह विषय 6 स्रोतों से आए 10 सुभाषितों को एक साथ लाता है।

नवीनतम अद्यतन: 9 अक्टू॰ 2026

9 अक्टू॰ 2026
कथासरित्सागर

वत्सराजोऽपि तं प्राप्तं प्रदत्तोपायनं नृपम्। प्रीत्या सम्मानयामास शूरा हि प्रणतिप्रियाः॥

vatsarājo 'pi taṃ prāptaṃ pradattopāyanaṃ nṛpam । prītyā sammānayāmāsa śūrā hi praṇatipriyāḥ ॥

भेंट लेकर आए राजा का वत्सराज स्नेह से सम्मान करते हैं। श्लोक वीरों के मन में विनम्र प्रणाम के प्रति आदर बताता है।

साहसविनम्रतासम्मान
26 अग॰ 2026
महाभारत

ज्ञानवृद्धान्प्रशंसन्तः शुश्रूषन्तः परस्परम्। विनिवृत्ताभिसन्धानाः सुखमेधन्ति सर्वशः॥

jñānavṛddhān praśaṃsantaḥ śuśrūṣantaḥ parasparam । vinivṛttābhisandhānāḥ sukhamedhanti sarvaśaḥ ॥

महाभारत का यह श्लोक ज्ञानवृद्धों के सम्मान, परस्पर सेवा और छिपे स्वार्थ के त्याग को सामूहिक सुख एवं उन्नति का आधार बताता है।

विद्यासम्मानएकतानिःस्वार्थ सेवासफलता
27 जुल॰ 2026
समराङ्गणसूत्रधार

शीलवान् पूजितो लोके शीलवान् साधुसम्मतः। शीलवान् सर्वकर्मार्हः शीलवान् प्रियदर्शनः॥

śīlavān pūjito loke śīlavān sādhusammataḥ । śīlavān sarvakarmārhaḥ śīlavān priyadarśanaḥ ॥

भोजदेव के समराङ्गणसूत्रधार का यह श्लोक बताता है कि शीलवान् व्यक्ति समाज में सम्मानित, सज्जनों द्वारा स्वीकृत, प्रत्येक कार्य के योग्य और सबको प्रिय होता है।

चरित्रनैतिकतासम्मान
6 जुल॰ 2026
नीतिशतकम्

जयन्ति ते सुकृतिनो रससिद्धाः कवीश्वराः। नास्ति येषां यशःकाये जरामरणजं भयम्॥

jayanti te sukṛtino rasasiddhāḥ kavīśvarāḥ । nāsti yeṣāṃ yaśaḥkāye jarāmaraṇajaṃ bhayam ॥

भर्तृहरि के नीतिशतकम् का यह श्लोक रससिद्ध कवीश्वरों के उस यश की बात करता है जो जरा और मृत्यु से परे है।

विद्यासम्मान
29 जून 2026
विदुर नीति

देशाचारान् समयाञ्जातिधर्मान् बुभूषते यस्तु परावरज्ञः। स तत्र तत्राधिगतः सदैव महाजनस्याधिपत्यं करोति॥

deśācārān samayāñ jātidharmān bubhūṣate yastu parāvarajñaḥ । sa tatra tatrādhigataḥ sadaiva mahājanasyādhipatyaṁ karoti ॥

विदुर नीति का यह श्लोक बताता है कि स्थानीय आचार, सामाजिक मर्यादाओं और समुदायों की समझ से विश्वास, सम्मान और प्रभाव प्राप्त होता है।

ज्ञानसंस्कृतिसम्मानचरित्र
17 जून 2026
कुमारसम्भवम्

त्वत्सम्भावितमात्मानं बहु मन्यामहे वयम्। प्रायः प्रत्ययमाधत्ते स्वगुणेषूत्तमादरः॥

tvatsambhāvitam ātmānaṃ bahu manyāmahe vayam । prāyaḥ pratyayam ādhatte svaguṇeṣūttamādaraḥ ॥

यह सुभाषित बताता है कि श्रेष्ठ व्यक्तियों से मिला आदर मनुष्य को अपने गुणों के प्रति दृढ़ आत्मविश्वास देता है।

सम्मानआत्मविश्वासवैयक्तिकताचरित्र
14 मई 2026
चाणक्य नीति

विद्वान् प्रशस्यते लोके विद्वान् सर्वत्र गौरवम्। विद्यया लभते सर्वं विद्या सर्वत्र पूज्यते॥

vidvān praśasyate loke vidvān sarvatra gauravam । vidyayā labhate sarvaṃ vidyā sarvatra pūjyate ॥

यह श्लोक विद्या और विद्वानों की महिमा का गुणगान करता है। ज्ञान से न केवल सम्मान प्राप्त होता है, बल्कि जीवन की समस्त उपलब्धियाँ भी मिलती हैं।

विद्याशिक्षासम्मान
16 अप्रैल 2026
ऋग्वेद

व्युच्छन्ती हि रश्मिभिर्विश्वमाभासि रोचनम्। ता त्वामुषर्वसूयवो गीर्भिः कण्वा अहूषत॥

vyucchantī hi raśmibhir viśvam ābhāsi rocanam । tā tvām uṣar vasūyavo gīrbhiḥ kaṇvā ahūṣata ॥

ऋग्वेद का यह मंत्र नारी शक्ति और ज्ञान की महिमा का वर्णन करता है, जो अज्ञान के अंधकार को मिटाकर सम्पूर्ण विश्व को आलोकित करती है।

नारीशक्तिसम्मानशक्ति
22 जन॰ 2026
स्कन्द पुराण

दशपुत्रसमा कन्या दशपुत्रान् प्रवर्धयन्। यत् फलम् लभते मर्त्यस्तल्लभ्यं कन्ययैकया॥

daśaputrasamā kanyā daśaputrān pravardhayan । yat phalam labhate martyastal labhyaṁ kanyayaikayā ॥

एक कन्या दस पुत्रों के समान होती है, यह श्लोक एक कन्या के पालन-पोषण के पुण्य को समझाता है।

नारीशक्तिसम्माननैतिकता
23 दिस॰ 2025
कृषि पाराशर

सुवर्ण-रौप्य-माणिक्य-वसनैरपि पूरिताः। तथापि प्रार्थयन्त्येव कृषकान् भक्ततृष्णया॥

suvarṇa-raupya-māṇikya-vasanair api pūritāḥ । tathāpi prārthayanti eva kṛṣakān bhaktatṛṣṇayā ॥

सोना, चाँदी, रत्न और उत्तम वस्त्र अन्न का स्थान नहीं ले सकते; समृद्ध व्यक्ति भी जीवन-निर्वाह के लिए किसान पर निर्भर है।

कृषिसमृद्धिविनम्रतासम्मान