कथासरित्सागर से सुभाषित

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नवीनतम अद्यतन: 9 अक्टू॰ 2026

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कर्म और उसके फल पर श्लोक—परिश्रम से क्या उत्पन्न होता है, निष्क्रियता का मूल्य क्या है, और मन, वचन तथा कर्म मिलकर जीवन को कैसे गढ़ते हैं।
9 अक्टू॰ 2026
कथासरित्सागर

वत्सराजोऽपि तं प्राप्तं प्रदत्तोपायनं नृपम्। प्रीत्या सम्मानयामास शूरा हि प्रणतिप्रियाः॥

vatsarājo 'pi taṃ prāptaṃ pradattopāyanaṃ nṛpam । prītyā sammānayāmāsa śūrā hi praṇatipriyāḥ ॥

भेंट लेकर आए राजा का वत्सराज स्नेह से सम्मान करते हैं। श्लोक वीरों के मन में विनम्र प्रणाम के प्रति आदर बताता है।

साहसविनम्रतासम्मान
20 अग॰ 2026
कथासरित्सागर

आपत्काले च कष्टेऽपि नोत्साहस्त्यज्यते बुधैः। इति प्रबोधितस्तेन कथञ्चिद् दृढबुद्धिना॥

āpatkāle ca kaṣṭe’pi notsāhas tyajyate budhaiḥ । iti prabodhitastena kathañcid dṛḍhabuddhinā ॥

कथासरित्सागर का यह अंश सिखाता है कि बुद्धिमान लोग संकट और कठिनाई में भी अपना उत्साह नहीं छोड़ते।

दृढ़ताज्ञान
15 अप्रैल 2026
कथासरित्सागर

इत्थं फलति शुद्धेन सिक्तं सङ्कल्पवारिणा। पुण्यबीजमपि स्वल्पं पुंसां कृषिकृतामिव॥

itthaṁ phalati śuddhena siktaṁ saṅkalpavāriṇā । puṇyabījamapi svalpaṁ puṁsāṁ kṛṣikṛtāmiva ॥

जिस प्रकार किसान द्वारा बोया गया छोटा-सा बीज भरपूर फसल देता है, उसी प्रकार शुद्ध संकल्प के साथ किया गया छोटा-सा प्रयास भी महान सफलता दिलाता है।

कर्मकृषिदृढ़तासफलता
30 मार्च 2026
कथासरित्सागर

विचित्रचरितोल्लेखचमत्कारितचेतनम्। प्राप्यते किं यशः शुभ्रमनङ्गीकृत्य साहसम्॥

vicitracaritollekhacamatkāritacetanam । prāpyate kiṃ yaśaḥ śubhramanaṅgīkṛtya sāhasam ॥

इस श्लोक में बताया गया है कि उज्ज्वल यश और विलक्षण उपलब्धियाँ केवल साहस को अपनाने से ही प्राप्त होती हैं।

साहससफलता