नेतृत्व पर सुभाषित

7 सुभाषित इस विषय पर

यह विषय 6 स्रोतों से आए 7 सुभाषितों को एक साथ लाता है।

नवीनतम अद्यतन: 14 सित॰ 2026

14 सित॰ 2026
गणेशपञ्चरत्नम्

मुदाकरात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं कलाधरावतंसकं विलासिलोकरक्षकम्। अनायकैकनायकं विनाशितेभदैत्यकं नताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायकम्॥

mudākarāttamodakaṁ sadā vimuktisādhakaṁ kalādharāvataṁsakaṁ vilāsilokarakṣakam । anāyakaikanāyakaṁ vināśitebhadaityakaṁ natāśubhāśunāśakaṁ namāmi taṁ vināyakam ॥

श्रीविनायक की यह भक्तिपूर्ण स्तुति उन्हें मुक्ति के साधक, जगत् के रक्षक और अशुभ के शीघ्र नाशक के रूप में नमन करती है।

भक्तिआध्यात्मिकतानेतृत्व
10 जून 2026
कामन्दकीय नीतिसार

सदानुरक्तप्रकृतिः प्रजापालनतत्परः। विनीतात्मा हि नृपतिर्भूयसी श्रियमश्नुते॥

sadānuraktaprakṛtiḥ prajāpālanatatparaḥ । vinītātmā hi nṛpatir bhūyasī śriyam aśnute ॥

यह सुभाषित बताता है कि जनता के कल्याण, सुरक्षा और उन्नति के लिए विनम्र भाव से समर्पित नेतृत्व ही यश और समृद्धि पाता है।

सुशासननेतृत्वकर्तव्यनैतिकता
29 अप्रैल 2026
अर्थशास्त्र

राज्ञो हि व्रतमुत्थानं यज्ञः कार्यानुशासनम्। दक्षिणा वृत्तिसाम्यं च दीक्षितस्याभिषेचनम्॥

rājño hi vratamutthānaṁ yajñaḥ kāryānuśāsanam । dakṣiṇā vṛttisāmyaṁ ca dīkṣitasyābhiṣecanam ॥

कौटिल्य के अर्थशास्त्र का यह श्लोक एक राजा या जनप्रतिनिधि के सच्चे कर्तव्यों और पवित्र संकल्प का वर्णन करता है।

सुशासननेतृत्वकर्तव्यनैतिकता
24 अप्रैल 2026
अर्थशास्त्र

प्रजासुखे सुखं राज्ञः प्रजानां च हिते हितम्। नात्मप्रियं प्रियं राज्ञः प्रजानां तु प्रियं प्रियम्॥

prajāsukhe sukhaṁ rājñaḥ prajānāṁ ca hite hitam । nātmapriyaṁ priyaṁ rājñaḥ prajānāṁ tu priyaṁ priyam ॥

कौटिल्य के अर्थशास्त्र का यह श्लोक सुशासन के मूल सिद्धांत को परिभाषित करता है: जनता की खुशी में ही नेतृत्व की सार्थकता है।

सुशासननेतृत्वकर्तव्यनैतिकता
19 फ़र॰ 2026
महाभारत

गोपायितारं दातारं धर्मनित्यमतन्द्रितम्। अकामद्वेषसंयुक्तमनुरज्यन्ति मानवाः॥

gopāyitāraṁ dātāraṁ dharmanityamatandritam । akāmadveṣasaṁyuktam anurajyanti mānavāḥ ॥

आदर्श शासक रक्षा और पोषण करता है, कर्तव्य में स्थिर रहता है और प्रजा के साथ निष्पक्ष तथा संयमित शासन करता है।

सुशासननेतृत्वकर्तव्यनैतिकता
29 जन॰ 2026
अथर्ववेद

एको बहूनामसि मन्य ईडिता विशं विशं युद्धाय सं शिशाधि। अकृत्तरुक्त्वया युजा वयं द्युमन्तं घोषं विजयाय कृण्मसि॥

eko bahūnāmasi manya īḍitā viśaṃ viśaṃ yuddhāya saṃ śiśādhi । akṛttaruk tvayā yujā vayaṃ dyumantaṃ ghoṣaṃ vijayāya kṛṇmasi ॥

मन्यु सूक्त का यह मंत्र अनुशासित युद्ध-ऊर्जा, सामूहिक साहस और विवेकपूर्ण दिशा में प्राप्त सम्मानजनक विजय का आह्वान करता है।

साहसनेतृत्वशक्तिअनुशासन
25 दिस॰ 2025
भगवद् गीता

यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः। स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥

yad yad ācarati śreṣṭhas tat tad evetaro janaḥ । sa yat pramāṇaṃ kurute lokas tad anuvartate ॥

श्रेष्ठ व्यक्तियों का आचरण और उनके स्थापित मानदंड समाज को दिशा देते हैं, क्योंकि अन्य लोग स्वाभाविक रूप से उनका अनुसरण करते हैं।

नेतृत्वचरित्रनैतिकताकर्तव्य