सुभाषितावलि से सुभाषित

इस स्रोत से लिए गए 5 सुभाषित देखें।

यह स्रोत 6 विषयों में फैले 5 सुभाषित प्रदान करता है।

नवीनतम अद्यतन: 12 अग॰ 2026

संबंधित मार्गदर्शिकाएँ और श्लोक चयन

प्रेरणादायक संस्कृत श्लोक
उत्साह, साहस, अनुशासन, धैर्य और निरंतर पुरुषार्थ पर संस्कृत श्लोक—अर्थ और व्यावहारिक संदर्भ सहित।
कर्म पर संस्कृत श्लोक
कर्म और उसके फल पर श्लोक—परिश्रम से क्या उत्पन्न होता है, निष्क्रियता का मूल्य क्या है, और मन, वचन तथा कर्म मिलकर जीवन को कैसे गढ़ते हैं।
12 अग॰ 2026
विदुर नीति

चक्षुषा मनसा वाचा कर्मणा च चतुर्विधम्। प्रसादयति यो लोकं तं लोकोऽनुप्रसीदति॥

cakṣuṣā manasā vācā karmaṇā ca caturvidham । prasādayati yo lokaṁ taṁ loko'nuprasīdati ॥

विदुर नीति सिखाती है कि जो व्यक्ति दृष्टि, विचार, वाणी और कर्म से लोगों को प्रसन्न करता है, उसे लोगों का सद्भाव भी प्राप्त होता है।

सामंजस्यकर्म
28 मई 2026
सुभाषितावलि

अनन्तोद्भूतभूतौघसङ्कुले भूतलेऽखिले। शस्त्रे शास्त्रे त्रिचतुराश्चतुरा यदि मादृशाः॥

anantodbhūtabhūtaughasaṅkule bhūtale'khile । śastre śāstre tricaturāś caturā yadi mādṛśāḥ ॥

यह श्लोक उस विरले व्यक्तित्व की वंदना करता है जो शस्त्र (शौर्य) और शास्त्र (ज्ञान) दोनों में समान रूप से निपुण हो।

ज्ञानसाहसविद्याचरित्र
4 मई 2026
चाणक्य नीति

को हि भारः समर्थानां किं दूरं व्यवसायिनाम्। को विदेशः सुविद्यानां कः परः प्रियवादिनाम्॥

ko hi bhāraḥ samarthānāṁ kiṁ dūraṁ vyavasāyinām । ko videśaḥ suvidyānāṁ kaḥ paraḥ priyavādinām ॥

यह श्लोक बताता है कि कैसे कौशल, परिश्रम, शिक्षा और मधुर वाणी सफलता और अपनेपन की सभी बाधाओं को दूर कर देते हैं।

सामर्थ्यशिक्षादृढ़ताचरित्र
2 फ़र॰ 2026
सुभाषितावलि

नाम्भोधिरर्थितामेति सदाम्भोभिश्च पूर्यते। आत्मा तु पात्रतां नेयः पात्रमायान्ति सम्पदः॥

nāmbhodhir arthitām eti sadāmbhobhiśca pūryate । ātmā tu pātratāṁ neyaḥ pātramāyānti sampadaḥ ॥

यह श्लोक सिखाता है कि वास्तविक समृद्धि बाहरी याचना से नहीं, बल्कि आंतरिक योग्यता और पात्रता से प्राप्त होती है।

सामर्थ्यचरित्रसमृद्धि
29 दिस॰ 2025
सुभाषितावलि

नात्युच्चशिखरो मेरुर्नातिनीचं रसातलम्। व्यवसायद्वितीयानां नात्यपारो महोदधिः॥

na aty ucca śikharaḥ meru na atīnīcaṁ rasātalam । vyavasāya-dvitīyānāṁ na aty-apāro mahodadhiḥ ॥

दृढ़ संकल्प वाले व्यक्ति के लिए न कोई शिखर बहुत ऊँचा है, न सागर बहुत विशाल और न कोई कार्य पुरुषार्थ से परे।

दृढ़ताआत्मविश्वासअनुशासनसफलता