वैयक्तिकता पर सुभाषित

3 सुभाषित इस विषय पर

यह विषय 3 स्रोतों से आए 3 सुभाषितों को एक साथ लाता है।

नवीनतम अद्यतन: 21 जून 2026

17 जून 2026
कुमारसम्भवम्

त्वत्सम्भावितमात्मानं बहु मन्यामहे वयम्। प्रायः प्रत्ययमाधत्ते स्वगुणेषूत्तमादरः॥

tvatsambhāvitam ātmānaṃ bahu manyāmahe vayam । prāyaḥ pratyayam ādhatte svaguṇeṣūttamādaraḥ ॥

यह सुभाषित बताता है कि श्रेष्ठ व्यक्तियों से मिला आदर मनुष्य को अपने गुणों के प्रति दृढ़ आत्मविश्वास देता है।

सम्मानआत्मविश्वासवैयक्तिकताचरित्र
15 जून 2026
सुभाषितरत्नभाण्डागारम्

पिण्डे पिण्डे मतिर्भिन्ना कुण्डे कुण्डे नवं पयः। जातौ जातौ नवाचाराः नवा वाणी मुखे मुखे॥

piṇḍe piṇḍe matir bhinnā kuṇḍe kuṇḍe navaṃ payaḥ । jātau jātau navācārāḥ navā vāṇī mukhe mukhe ॥

यह सुभाषित बताता है कि विविध समाज में हर मन, समुदाय, आचार और वाणी की अपनी अलग पहचान होती है।

विविधतावैयक्तिकतासंस्कृति
18 मार्च 2026
नीतिशतकम्

एकेनापि हि शूरेण पादाक्रान्तं महीतलम्। क्रियते भास्करेणेव स्फारस्फुरिततेजसा॥

ekenāpi hi śūreṇa pādākrāntaṃ mahītalam । kriyate bhāskareṇeva sphārasphuritetejasā ॥

जैसे सूर्य अकेले ही अपने तेज से समस्त पृथ्वी को प्रकाशित करता है, वैसे ही एक सच्चा वीर अकेले अपने साहस से पूरी धरती पर अपना प्रभाव स्थापित कर सकता है।

साहसआत्मविश्वासवैयक्तिकताशक्ति