श्रीमद्भागवत पुराण से सुभाषित

इस स्रोत से लिए गए 3 सुभाषित देखें।

यह स्रोत 6 विषयों में फैले 3 सुभाषित प्रदान करता है।

नवीनतम अद्यतन: 8 सित॰ 2026

संबंधित मार्गदर्शिकाएँ और श्लोक चयन

विद्या पर संस्कृत श्लोक
ज्ञान पर श्लोक—विद्या किसलिए है, सच्चे गुरु का लक्षण क्या है, और सूचना तथा बोध में क्या अंतर है।
8 सित॰ 2026
श्रीमद्भागवत पुराण

अणुभ्यश्च महद्भ्यश्च शास्त्रेभ्यः कुशलो नरः। सर्वतः सारमादद्यात् पुष्पेभ्य इव षट्पदः॥

aṇubhyaśca mahadbhyaśca śāstrebhyaḥ kuśalo naraḥ । sarvataḥ sāramādadyāt puṣpebhya iva ṣaṭpadaḥ ॥

श्रीमद्भागवत पुराण का श्लोक: कुशल व्यक्ति छोटे-बड़े हर शास्त्र से सार ग्रहण करे, जैसे भ्रमर अनेक पुष्पों से मधु लेता है।

विद्याज्ञानविविधता
19 अग॰ 2026
श्रीमद्भागवत पुराण

एतावज्जन्मसाफल्यं देहिनामिह देहिषु। प्राणैरर्थैर्धिया वाचा श्रेय एवाचरेत् सदा॥

etāvaj janmasāphalyaṁ dehinām iha dehiṣu । prāṇair arthair dhiyā vācā śreya evācaret sadā ॥

श्रीमद्भागवत पुराण का यह श्लोक कहता है कि जन्म तब सार्थक होता है जब मनुष्य प्राण, धन, बुद्धि और वाणी से सदा दूसरों का कल्याण करे।

निःस्वार्थ सेवानैतिकताकर्तव्यसफलता
1 जन॰ 2026
श्रीमद्भागवत पुराण

ज्ञानं विरक्तिरैश्वर्यं शौर्यं तेजो बलं स्मृतिः। स्वातन्त्र्यं कौशलं कान्तिर्धैर्यं मार्दवमेव च॥

jñānaṁ viraktiḥ aiśvaryam śauryaṁ tejo balaṁ smṛtiḥ । svātantryaṁ kauśalaṁ kāntiḥ dhairyaṁ mārdavaṁ eva ca ॥

ज्ञान, वैराग्य, सामर्थ्य, शौर्य, तेज, धैर्य और कोमलता जैसे पूरक गुण मिलकर एक परिपक्व चरित्र का निर्माण करते हैं।

चरित्रविद्यासाहसस्वतंत्रताज्ञान