मत्स्य पुराण से सुभाषित

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नवीनतम अद्यतन: 12 अग॰ 2026

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12 अग॰ 2026
विदुर नीति

चक्षुषा मनसा वाचा कर्मणा च चतुर्विधम्। प्रसादयति यो लोकं तं लोकोऽनुप्रसीदति॥

cakṣuṣā manasā vācā karmaṇā ca caturvidham । prasādayati yo lokaṁ taṁ loko'nuprasīdati ॥

विदुर नीति सिखाती है कि जो व्यक्ति दृष्टि, विचार, वाणी और कर्म से लोगों को प्रसन्न करता है, उसे लोगों का सद्भाव भी प्राप्त होता है।

सामंजस्यकर्म
5 फ़र॰ 2026
मत्स्य पुराण

विकल्पमात्रावस्थाने वैरूप्यं मनसो भवेत्। पश्चान्मूलक्रियारम्भगम्भीरावर्तदुस्तरः॥

vikalpamātrāvasthāne vairūpyaṃ manaso bhavet । paścānmūlakriyārambhagambhīrāvartadustaraḥ ॥

मत्स्य पुराण का यह श्लोक चेतावनी देता है कि थोड़ा सा भी संशय मन को विकृत कर सकता है और कार्य में दुर्गम बाधाएं उत्पन्न कर सकता है।

अनुशासनआत्मविश्वासज्ञान