ऐतरेय ब्राह्मण से सुभाषित
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नवीनतम अद्यतन: 2 जुल॰ 2026
संबंधित मार्गदर्शिकाएँ और श्लोक चयन
श्लोक और सुभाषित में क्या अंतर है?
श्लोक मुख्यतः संस्कृत पद्य या छन्दबद्ध स्तोत्र-पंक्ति है; सुभाषित सुन्दर और स्मरणीय ढंग से कही गई सार्थक उक्ति है। अनेक सुभाषित श्लोक होते हैं, किंतु दोनों शब्द समान नहीं हैं।
अर्थ सहित संस्कृत श्लोक
संस्कृत ज्ञान का विचारपूर्वक चुना गया परिचय—देवनागरी पाठ, IAST लिप्यंतरण, हिन्दी-अंग्रेज़ी अर्थ, स्रोत और विस्तृत व्याख्या सहित।
2 जुल॰ 2026
ऐतरेय ब्राह्मण
नानाश्रान्ताय श्रीरस्तीति रोहित शुश्रुम। पापो नृषद्वरो जन इन्द्र इच्चरतः सखा चरैवेति॥
nānāśrāntāya śrīr astīti rohita śuśruma । pāpo nṛṣadvaro jana indra ic carataḥ sakhā caraiveti ॥
ऐतरेय ब्राह्मण की चरैवेति परंपरा का यह मंत्र बताता है कि समृद्धि निरंतर प्रयत्न करने वाले को मिलती है, निष्क्रिय रहने वाले को नहीं।
दृढ़ताअनुशासनसफलताकर्म
13 फ़र॰ 2026
ऐतरेय ब्राह्मण
चरन् वै मधु विन्दति चरन् स्वादुमुदुम्बरम्। सूर्यस्य पश्य श्रेमाणं यो न तन्द्रयते चरंश्चरैवेति॥
caran vai madhu vindati caran svādum udumbaram । sūryasya paśya śremāṇaṃ yo na tandrayate caraṃś caraiveti ॥
गतिशील रहने और कर्मठता का संदेश देता यह श्लोक बताता है कि सूर्य की तरह निरंतर चलते रहने वाला ही यश प्राप्त करता है।
दृढ़ताकर्मअनुशासनऊर्जा
21 जन॰ 2026
ऐतरेय ब्राह्मण
चरैवेति चरैवेति चरन्वै मधु विन्दति। सूर्यास्य पश्य श्रेमाणं न मामार न जीर्यति॥
caraiveti caraiveti caranvai madhu vindati । sūryāsya paśya śremāṇaṃ na māmāra na jīryati ॥
वैदिक उद्घोष ‘चरैवेति’ सूर्य की अविराम गति से प्रेरणा लेकर सतत कर्म को प्रगति का मार्ग बताता है।
दृढ़ताअनुशासनज्ञान