योगवासिष्ठ से सुभाषित

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नवीनतम अद्यतन: 25 सित॰ 2026

25 सित॰ 2026
योगवासिष्ठ

यथा यथा प्रयत्नः स्याद्भवेदाशु फलं तथा। इति पौरुषमेवास्ति दैवमस्तु तदेव च॥

yathā yathā prayatnaḥ syād bhaved āśu phalaṃ tathā । iti pauruṣam evāsti daivam astu tad eva ca ॥

योगवासिष्ठ का यह श्लोक फल को मनुष्य के प्रयत्न से जोड़ता है और पुरुषार्थ को ही दैव मानने की शिक्षा देता है।

दृढ़तासफलता
27 मई 2026
योगवासिष्ठ

यो यमर्थं प्रार्थयते तदर्थं चेहते क्रमात्। अवश्यं स तमाप्नोति न चेदर्धान्निवर्तते॥

yo yam arthaṃ prārthayate tadarthaṃ cehate kramāt । avaśyaṃ sa tam āpnoti na ced ardhān nivartate ॥

योगवासिष्ठ का यह श्लोक बताता है कि सच्ची इच्छा, क्रमबद्ध प्रयास और मार्ग से बीच में न लौटने का धैर्य मनुष्य को उसके लक्ष्य तक पहुँचाता है।

दृढ़तासफलताअनुशासन