विद्दशालभाञ्जिका से सुभाषित
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नवीनतम अद्यतन: 21 जून 2026
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3 अप्रैल 2026
विद्दशालभाञ्जिका
श्रियः प्रदुग्धे विपदो रुणद्धि यशांसि सूते मलिनं प्रमार्ष्टि। संस्कारशौचेन परं पुनीते शुद्धा हि बुद्धिः किल कामधेनुः॥
śriyaḥ pradugdhe vipado ruṇaddhi yaśāṃsi sūte malinaṃ pramārṣṭi । saṃskāraśauchena paraṃ punīte śuddhā hi buddhiḥ kila kāmadhenuḥ ॥
यह सुभाषित संस्कारित और शुद्ध बुद्धि की शक्ति का गुणगान करता है, और इसकी तुलना कामधेनु से करता है जो सभी इच्छाओं को पूर्ण करती है।
ज्ञानविद्याचरित्र