शिवशक्त्यविनाभाव स्तोत्र से सुभाषित

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नवीनतम अद्यतन: 17 अक्टू॰ 2026

शिवशक्त्यविनाभाव स्तोत्र

तव च का किल न स्तुतिरम्बिके! सकलशब्दमयी किल ते तनुः। निखिलमूर्तिषु मे भवदन्वयो मनसिजासु बहिःप्रसरासु च॥

tava ca kā kila na stutirambike! sakalaśabdamayī kila te tanuḥ । nikhilamūrtiṣu me bhavadanvayo manasijāsu bahiḥprasarāsu ca ॥

अम्बिका की यह स्तुति समस्त शब्दों, मन में उठने वाले रूपों और बाहरी जगत में देवी की व्याप्ति देखती है।

भक्तिआध्यात्मिकता