रसिकजीवनम् से सुभाषित
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नवीनतम अद्यतन: 7 अग॰ 2026
7 अग॰ 2026
रसिकजीवनम्
किं चन्द्रमाः प्रत्युपकारलिप्सया करोति गोभिः कुमुदावबोधनम्। स्वभाव एवोन्नतचेतसां सतां परोपकारव्यसनं हि जीवितम्॥
kiṃ candramāḥ pratyupakāralipsayā karoti gobhiḥ kumudāvabodhanam । svabhāva evonnatacetasāṃ satāṃ paropakāravyasanaṃ hi jīvitam ॥
चन्द्रमा बिना प्रत्युपकार की इच्छा के कुमुदिनी को जगाता है; वैसे ही सज्जनों के लिए परोपकार जीवन का स्वाभाविक भाव है।
निःस्वार्थ सेवाचरित्र