रामरक्षास्तोत्रम् से सुभाषित

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नवीनतम अद्यतन: 21 जून 2026

2 अप्रैल 2026
रामरक्षास्तोत्रम्

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शिरसा नमामि॥

manojavaṁ mārutatulyavegaṁ jitendriyaṁ buddhimatāṁ variṣṭham । vātātmajaṁ vānarayūthamukhyaṁ śrīrāmadūtaṁ śirasā namāmi ॥

श्री राम के दूत हनुमान जी की यह वंदना उनकी गति, बुद्धि और इंद्रिय संयम की प्रशंसा करती है।

भक्तिसाहसज्ञानअनुशासनविनम्रता