पद्म पुराण से सुभाषित

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नवीनतम अद्यतन: 5 अक्टू॰ 2026

संबंधित मार्गदर्शिकाएँ और श्लोक चयन

सुभाषित क्या है?
सुभाषित सुन्दर और सार्थक ढंग से कही गई स्मरणीय संस्कृत उक्ति है—प्रायः ऐसा स्वतंत्र पद्य जो ज्ञान, सलाह, अनुभव या किसी पूर्ण विचार को व्यक्त करता है।
अर्थ सहित संस्कृत श्लोक
संस्कृत ज्ञान का विचारपूर्वक चुना गया परिचय—देवनागरी पाठ, IAST लिप्यंतरण, हिन्दी-अंग्रेज़ी अर्थ, स्रोत और विस्तृत व्याख्या सहित।
जीवन पर संस्कृत श्लोक
विवेकपूर्ण कर्म, सत्य, चरित्र, संबंध, आत्मसंयम और श्रेष्ठ जीवन को आकार देने वाले दैनिक निर्णयों पर संस्कृत श्लोक।
31 मार्च 2026
पञ्चतन्त्र

श्रूयतां धर्मसर्वस्वं श्रुत्वा चैवावधार्यताम्। आत्मनः प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत्॥

śrūyatāṃ dharmasarvasvaṃ śrutvā caivāvadhāryatām । ātmanaḥ pratikūlāni pareṣāṃ na samācaret ॥

यह सुभाषित धर्म के समस्त सार को एक सुवर्ण नियम में समेटता है — जो व्यवहार अपने लिए अनुचित लगे, वह दूसरों के साथ कभी न करें।

नैतिकताधर्मचरित्र