कुलार्णव तन्त्र से सुभाषित
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नवीनतम अद्यतन: 29 जुल॰ 2026
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29 जुल॰ 2026
कुलार्णव तन्त्र
प्रेरकः सूचकश्चैव वाचको दर्शकस्तथा। शिक्षकः बोधकश्चैव षडेते गुरवः स्मृताः॥
prerakaḥ sūcakaścaiva vācako darśakastathā । śikṣakaḥ bodhakaścaiva ṣaḍete guravaḥ smṛtāḥ ॥
कुलार्णव तन्त्र गुरु के छह स्वरूप बताता है—प्रेरणा देने वाला, संकेत करने वाला, समझाने वाला, दिखाने वाला, शिक्षा देने वाला और बोध कराने वाला।
मार्गदर्शनशिक्षाविद्या