द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम् से सुभाषित
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नवीनतम अद्यतन: 21 जून 2026
8 जन॰ 2026
द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम्
सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्। भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये॥
saurāṣṭradeśe viśade'tiramye jyotirmayaṁ candrakalāvataṁsam । bhaktipradānāya kṛpāvatīrṇaṁ taṁ somanāthaṁ śaraṇaṁ prapadye ॥
सौराष्ट्र की पवित्र भूमि में स्थित, ज्योति स्वरूप भगवान सोमनाथ की वंदना करते हुए यह श्लोक श्रद्धा और शांति का प्रतीक है।
भक्तिआध्यात्मिकता