चाणक्य-राज-नीति से सुभाषित

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नवीनतम अद्यतन: 22 जुल॰ 2026

22 जुल॰ 2026
चाणक्य-सार-संग्रह

परकार्येषु युक्तात्मा स्वकार्यं क्षिप्रसाधनम्। सुहृत्कार्येषु निर्वृत्तौ राजकार्येषु विक्रमः॥

parakāryeṣu yuktātmā svakāryaṁ kṣiprasādhanam । suhṛtkāryeṣu nirvṛttau rājakāryeṣu vikramaḥ ॥

चाणक्य-सार-संग्रह का यह श्लोक परकार्य में निष्ठा, स्वकार्य में तत्परता, मित्रों के कार्य में विश्वसनीयता और राजकार्य में पराक्रम को श्रेष्ठता का लक्षण मानता है।

कर्तव्यसामर्थ्यसुशासनसाहस