बृहदारण्यकोपनिषद् से सुभाषित

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नवीनतम अद्यतन: 23 जुल॰ 2026

23 जुल॰ 2026
बृहदारण्यकोपनिषद्

यश्चायमस्मिन्नाकाशे तेजोमयोऽमृतमयः पुरुषः सर्वानुभूः। यश्चायमस्मिन्नात्मनि तेजोमयोऽमृतमयः पुरुषः सर्वानुभूः॥

yaścāyamasminnākāśe tejomayo'mṛtamayaḥ puruṣaḥ sarvānubhūḥ । yaścāyamasminnātmani tejomayo'mṛtamayaḥ puruṣaḥ sarvānubhūḥ ॥

बृहदारण्यकोपनिषद् से निर्मित यह संयुक्त पाठ आकाश में स्थित तेजोमय, अमृतमय सत्ता और आत्मा में उपस्थित उसी सत्य की एकता व्यक्त करता है।

आध्यात्मिकतासामंजस्य