सौन्दरनन्द से सुभाषित

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नवीनतम अद्यतन: 31 अग॰ 2026

31 अग॰ 2026
सौन्दरनन्द

यद् यदेव प्रसक्तं हि वितर्कयति मानवः। अभ्यासात् तेन तेनास्य नतिर्भवति चेतसः॥

yad yad eva prasaktaṃ hi vitarkayati mānavaḥ । abhyāsāt tena tenāsya natir bhavati cetasaḥ ॥

मनुष्य जिस विषय का बार-बार चिन्तन करता है, उसका चित्त उसी दिशा में झुकने लगता है।

अनुशासनचरित्र