हरिहरसुभाषितम् से सुभाषित

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नवीनतम अद्यतन: 9 सित॰ 2026

9 सित॰ 2026
हरिहरसुभाषितम्

उपदिशति लोकवृत्तं वितरति वित्तं विनोदयति चित्तम्। उत्तम्भयति महत्त्वं विद्या हृद्या सुराजसेवेव॥

upadiśati lokavṛttaṁ vitarati vittaṁ vinodayati cittam । uttambhayati mahattvaṁ vidyā hṛdyā surājaseveva ॥

हरिहर विद्या को लोक-व्यवहार, समृद्धि, प्रसन्नता और महत्त्व प्रदान करने वाली बताते हैं।

शिक्षासमृद्धिसुशासन